लघुकथा : दिनेशराय द्विवेदी
कंप्यूटर मॉनिटर स्क्रीन पर नीली रोशनी फैली हुई थी. रिकार्डो की उंगलियाँ कीबोर्ड पर एक लयबद्ध ताल बजा रही थीं. उसके सामने, कोड की लाइनें एक जीवित प्राणी की तरह सरक रही थीं—“जीरो, इफ-एल्स लूप्स, न्यूरल नेटवर्क आर्किटेक्चर”. यह कोई साधारण प्रोजेक्ट नहीं था. इस प्रोजेक्ट में थिरेनियन सागर के मेडीसी द्वीप की सरकार अपने नागरिकों की सूची में से सरकार समर्थकों, सरकार विरोधियों और तटस्थ व्यक्तियों की पृथक सूचियाँ बनवा रही थी. फ़ाइल का नाम था: “ऑपरेशन_क्लीनस्लेट.पीवाई”.
"तुम्हारा एल्गोरिदम 'शोर' को 'सिग्नल' से अलग करने में कितना कारगर है, रिकार्डो?" एलेसेंड्रा की आवाज़ ठंडी और स्टील के ब्लेड सी तीखी थी.
"99.8 प्रतिशत," रिकार्डो ने बिना स्क्रीन से नज़र हटाए जवाब दिया. "यह सोशल मीडिया पोस्ट, लाइब्रेरी इश्यू रिकॉर्ड, ऑनलाइन गतिविधि और एसोसिएशन मैपिंग को क्रॉस-रेफरेंस करता है. अवांछित विचार पैटर्न को पहचानता है."
"अवांछित नहीं, रिकार्डो. जोखिम भरा," एलेसेंड्रा ने सुधारा. "हम एक स्वस्थ राजनीतिक पारिस्थितिकी तंत्र बना रहे हैं. गेहूँ में से कंकड़ अलग कर रहे हैं."
रिकार्डो ने सिर हिलाया. उसने खुद को यही समझाया था—यह सिर्फ़ डेटा था. बस आँकड़े. वे किसी को नुकसान नहीं पहुँचा सकती थीं.
पहली पायलट रन रिपोर्ट सुबह पाँच बजे आई. रिकार्डो ने कॉफ़ी का घूँट लिया और पीडीएफ़ खोला. पहले पन्ने पर एक ग्राफ़ था: "जोखिम स्कोर बनाम जनसंख्या घनत्व." वह आगे बढ़ा. नामों की सूची शुरू हुई.
नाम #127: एंटोनियो रोस्सी. कारण: 'क्रान्ति' शब्द का अत्यधिक उपयोग.
नाम #128: सोफिया कोंटे. कारण: विरोध प्रदर्शनों की फ़ोटो लाइक करना.
फिर नाम #129 आया.
एनरिको रोस्सी. आयु: 64. जोखिम स्कोर: 8.7/10.
रिकार्डो का दिल एक धड़कन के लिए रुक सा गया. उसकी सांसें अटक गईं.
कारण-
1. सार्वजनिक पुस्तकालय में साप्ताहिक उपस्थिति 95% (सामान्य से 400% अधिक).
2. पठन सामग्री: इतिहास, राजनीतिक सिद्धांत, नाटक. उप-श्रेणी: व्यंग्य.
3. स्थानीय नगर परिषद बैठकों में 12 बार प्रश्न पूछे गए.
4. ऑनलाइन खोज इतिहास में "जनतंत्र में जवाबदेही" शब्द समूह शामिल.
रिकार्डो ने माउस को स्क्रोल किया. स्क्रीन धुंधली हो गई. यह उसके पिता थे. इतिहास के सेवानिवृत्त प्रोफेसर. वह व्यक्ति जिसने उसे पढ़ना सिखाया था, जो उसे हर रविवार को पुस्तकालय ले जाता था.
उस रात रिकार्डो बिना बताए पिता के घर पहुँचा. ड्राइंग रूम में पुराने कागज़ और किताबों की गंध थी. एनरिको चश्मे के ऊपर से देखते हुए एक किताब पढ़ रहे थे.
"बेटा, इतनी रात को? कुछ हुआ तो नहीं?"
"नहीं पापा... बस... आप से मिलने आ गया."
रिकार्डो की नज़र डेस्क पर पड़ी एक फटी हुई, पीली पड़ चुकी किताब पर गई. —"जनता पागल हो गयी है — शिवराम."
"आप यह क्या पढ़ रहे हैं?" रिकार्डो ने पूछा, आवाज़ में एक कंपकंपी.
"अरे, एक पुराना भारतीय नाटक है. पचास साल पहले लिखा गया. लेखक का नाम है शिवराम, देख." पिता ने किताब खोली. एक पन्ना मुड़ा हुआ था, एक पैराग्राफ पर पेंसिल से गहरी रेखाएँ खिंची हुई थीं.
रिकार्डो ने पढ़ा:
"सरकार : मर जाने दो... हम और नई जनता बना लेंगे.
पूंजीपति: हाँ हम नई जनता बना लेंगे, और जनता चुन लेंगे..."
उसके शरीर में बिजली-सी दौड़ गई. यह वही शब्द थे जो एलेसेंड्रा ने इस्तेमाल किए थे—"नई जनता". पचास साल पहले एक भारतीय नाटककार ने भविष्यवाणी कर दी थी जो आज हकीकत बन रही थी.
"यह... यह क्या है, पापा?"
"इतिहास, बेटा. या शायद भविष्य का आईना. जब सत्ता जनता से डरने लगे, तो वह उसे बदलने की कोशिश करती है. तुम्हारा काम कैसा चल रहा है? तुम्हारा वह 'स्पेशल प्रोजेक्ट'?"
रिकार्डो ने जवाब नहीं दिया. वह केवल उस पन्ने को देखता रहा, जहाँ शब्द उसकी आँखों के सामने नाच रहे थे.
अगले दिन ऑफिस में, एलेसेंड्रा ने उसे कॉन्फ्रेंस रूम में बुलाया.
"रिपोर्ट देखी? कल तक फाइनल लिस्ट चाहिए. प्रोडक्शन में डालनी है."
"एलेसेंड्रा... इस लिस्ट में... मेरे पिता का नाम है."
एलेसेंड्रा की आँखों में कोई हलचल नहीं हुई. "तो क्या हुआ? एल्गोरिदम तटस्थ है. इमोशनल बायस मत डालो."
"पर वे कोई खतरा नहीं हैं! वे सिर्फ एक शिक्षक हैं जो पढ़ना पसंद करते हैं!"
"पढ़ना खतरनाक हो सकता है, रिकार्डो. विचार संक्रामक होते हैं. अब तुम यह तय करो—क्या तुम इस प्रोजेक्ट के लिए कमिटेड हो या नहीं? तुम्हारा कोड, या तुम्हारी भावनाएँ?"
उस पल, रिकार्डो को पिता की किताब वाला पन्ना याद आया. "हम नई जनता बना लेंगे." वह एक मशीन नहीं था. वह एक इंसान था.
"मैं इसे ठीक कर दूँगा," उसने धीरे से कहा.
रात के दो बजे थे. रिकार्डो अकेला ऑफिस में था. स्क्रीन पर उसका कोड खुला हुआ था. उसने एक नई फ़ाइल खोली—"क्लीनस्लेट_फिक्स.पीवाई".
उसने एक फ़ंक्शन लिखा. नाम दिया: इनोसेंट_अंडर_स्कोर. यह फ़ंक्शन, मास्टर एल्गोरिदम चलाने से पहले, डेटाबेस में हर नाम के साथ एक छोटा, अदृश्य बिट जोड़ देगा. यह बिट, रिपोर्ट जनरेट होते समय, डेटा को ऐसे मिला देगा कि हर व्यक्ति का 'जोखिम स्कोर' एक सामान्य सीमा में दिखेगा. गेहूँ और कंकड़ का अंतर धुंधला हो जाएगा. पूरी फसल एक जैसी दिखेगी.
यह एक वायरस था, लेकिन नैतिकता का. एक डिजिटल विद्रोह.
उसने 'रन' बटन दबाया. प्रोग्राम चलने लगा. "सिलेक्टिंग न्यू पीपल... प्रक्रिया रद्द." फिर एक एरर मैसेज: "दूषित डेटा. कोई स्पष्ट पैटर्न नहीं."
रिकार्डो ने एक लंबी सांस ली. उसने सारा कोड, सारी फाइलें एक यूएसबी ड्राइव पर कॉपी कीं. फिर अपनी निजी मेल पर एक मेल ड्राफ्ट तैयार किया, जिसमें सभी फाइलें अटैच थीं.
रिसीवर: कुछ चुनिंदा पत्रकार. विषय: "ऑपरेशन क्लीन स्लेट: कैसे आपका देश आपको चुन रहा है."
सेंड बटन पर उंगली रखने से पहले, उसने अपने फोन से पिता को मैसेज किया: "पापा, आप ठीक कहते थे. कभी-कभी किताबें, कोड से ज्यादा ताकतवर होती हैं."
एक सप्ताह बाद, अखबार की सुर्खियाँ थीं: "बड़ा डाटा स्कैंडल: सरकारी ठेकेदार नागरिकों को 'रिस्क' के आधार पर चिन्हित कर रहा था!"
रिकार्डो अपने पिता के साथ पुस्तकालय में बैठा था. उनके सामने शिवराम का वही नाटक खुला हुआ था.
"तुमने जो किया, वह साहसिक था, बेटा," पिता ने कहा.
"मैंने सिर्फ एक बग ठीक किया, पापा. सिस्टम में नहीं... अपने अंदर के सिस्टम में."
बाहर, सूरज निकल रहा था. लोग सामान्य जीवन जी रहे थे, इस बात से अनजान कि उनके नाम एक डिजिटल सूची से हटा दिए गए हैं. रिकार्डो ने किताब के अंतिम पैराग्राफ को देखा, जहाँ जनता चिल्लाती है:
"मत भूलो जुल्म जब हद से गुजरता है तो मिट जाता है... जनता पागल हो गई है..."
उसने मुस्कुराते हुए पन्ना पलट दिया. असली नई जनता को बनाने की ज़रूरत नहीं थी. उसे बस पुरानी, सच्ची जनता को उसके मूल स्वरूप में रहने देने की ज़रूरत थी. और कभी-कभी, उसकी रक्षा के लिए, एक आदमी को अपने कोड में एक छोटा सा, नेक बग डालना पड़ता है.
2 टिप्पणियां:
रिकार्डो सिर्फ एक प्रोग्रामर नहीं लगता, वह हमारे समय का आम इंसान लगता है। सत्ता जब कोड के पीछे छिपकर लोगों को छांटने लगती है, तब डर असली बन जाता है। पिता और बेटे का टकराव कहानी को दिल से जोड़ देता है। शिवराम के नाटक का संदर्भ मुझे चौंकाता है, क्योंकि सच कभी पुराना नहीं होता।
आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर सोमवार 5 जनवरी 2026 को लिंक की जाएगी है....
http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!
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