देहरी के पार, कड़ी - 24
शुक्रवार लंच के बाद से यूनियन के सैक्रेटरी अपने चार मजदूर साथियों के साथ एडीशनल सैक्रेटरी लेबर (एएसएल) के दफ्तर में बैठे हुए थे. यह दिन ईसीआई फैक्ट्री के प्रबंधन के लिए किसी डरावने सपने से कम नहीं था. आज शाम तक एएसएल के सख्त आदेश के दबाव में उन्हें 'ऑफिस एडमिनिस्ट्रेशन एण्ड अदर एक्सपेंस' के बिल-वाउचर्स की फाइलें जमा करानी थीं. वे ठीक पौने पाँच बजे पहुँचे, दो बोरे दस्तावेजों से भरे हुए थे, एएसएल के स्टाफ ने एक बोरा अपने यहाँ जमा किया और दस्तावेजों की लिस्ट फाइल के साथ नत्थी कर दी. दूसरा बोरा और दस्तावेजों की सूची यूनियन सैक्रेटरी को दी.
“क्या ये सारे दस्तावेज आपके पास डिजिटल फॉर्म में नहीं हैं?” एएसएल ने पूछा.
“सर हैं तो, पर आपने दस्तावेज पेश करने को कहा था. डिजिटल फॉर्म में पेश करने की हिदायत होती तो हम उसे पेश कर देते.” फैक्ट्री से आए लीगल मैनेजर मनोज भाट ने कहा.
“कोई बात नहीं, हम अब आदेश दे रहे हैं. आप उक्त सभी दस्तावेज डिजिटल फॉर्म में पेन ड्राइव में सेव करके दो प्रति में पेश करें. साथ में भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) की धारा 63 (4) का प्रमाण पत्र भी पेश करें.” एएसएल ने कहा. फिर पूछा, “कब तक कर देंगे?”
“ठीक है, अगले शुक्रवार तक पेश करें?”
“सर, इस आवेदन का फैसला 60 दिन में करके प्रबंधन को सूचित करना है. वरना डीम्ड परमिशन हो जाएगी. पूरे सप्ताह की तारीख देना उचित नहीं होगा. इसे सोमवार को रख लें.” यूनियन सैक्रेटरी ने सप्ताह भर बाद की पेशी नियत करने पर आपत्ति की. फिर भी एएसएल ने यह कहते हुए मंगलवार की तारीख दी कि वे केवल दो ही दिन यहाँ बैठते हैं, शेष दिन उन्हें सेक्रेट्रिएट में बैठकर मंत्रालय का काम निपटाना होता है. उन्होंने आश्वासन दिया कि वे 60 दिन नहीं होने देंगे.
शनिवार दोपहर प्रशांत बाबू, वकील चव्हाण और प्रिया यूनियन दफ्तर में मिले. दस्तावेजों का बोरा खोलकर देखा गया. दस्तावेज बहुत थे; फिजिकल जाँच में कई दिन लग सकते थे. तय किया गया कि डिजिटल रिकॉर्ड मिलने पर ही जाँच की जाए.
प्रिया ने बताया कि, “डिजिटल कॉपी मंगल को मिलेगी. शुक्रवार तक सभी दिन वर्किंग होंगे. उसकी टीम यदि रोज थोड़ा-थोड़ा 'डिटेल्स' मिलान करे तब भी शनिवार के पहले फाइनल करना संभव नहीं होगा.”
वकील चव्हाण साहिब ने बताया कि, “उसके बाद हमें जवाब तैयार करने में दो दिन लग सकते हैं. इसलिए बेहतर है कि जवाब पेश करने की तारीख अगले मंगलवार की ही लें. हम उस दिन जवाब पेश कर देंगे तो प्रबंधक की साक्ष्य के शपथ पत्र पेश करने के लिए फिर शुक्रवार की तिथि मिलेगी. तब तक हड़ताल शुरू हुए 27 दिन और क्लोजर के आवेदन को 20 दिन हो जाएंगे. हमें साक्ष्य के समय बहुत जल्दी करनी पड़ेगी, वरना डीम्ड परमिशन का संकट खड़ा हो सकता है और उसका कोई तोड़ नहीं है.”
मंगलवार को पेन ड्राइव में डिजिटल रेकॉर्ड मिल गया. क्लोजर परमिशन के आवेदन का जवाब प्रस्तुत करने के लिए योजनानुसार अगले मंगल की पेशी तय कर दी गयी. डिजिटल रिकॉर्ड की पेन ड्राइव उसी दिन प्रिया को पहुँचा दी गयीं. प्रिया ने उसकी चार प्रतियाँ तैयार करके एक खुद रखी और बाकी राहुल, स्नेहा और आदित्य को बाँट दी.
प्रिया को डिनर के बाद रात दस बजे समय मिला. उसने पेन ड्राइव को लैपटॉप में लगा कर दस्तावेज देखना शुरू किया तो उसकी आँखें खुली रह गईं. पिछले पाँच वर्षों में 'ऑफिस एडमिनिस्ट्रेशन' और 'अदर एक्सपेंसेस' को लगातार बढ़ाया गया था. जिस तरह हर साल खर्चे बढ़ते गए थे, उससे यह स्पष्ट हो चुका था कि ये जानबूझकर किया गया है.
अगले शनिवार चारों प्रिया के फ्लैट पर मिले. उन्होंने दस्तावेजों का अपने डिजिटल एनालिसिस रिपोर्ट से अंतिम मिलान शुरू किया. जैसे-जैसे बिलों का मिलान होता गया, सच की परतें खुलती चली गईं. चारों ने मिल कर लंच तक यह काम पूरा कर लिया. चारों बहुत थक गए थे उन्होंने लंच बाहर से मंगा लिया. प्रशांत बाबू से मीटिंग शाम पाँच बजे यूनियन ऑफिस में तय हुई.
यूनियन ऑफिस की मीटिंग में प्रशांत बाबू, ईसीआई यूनियन के अध्यक्ष और सैक्रेटरी तो मौजूद थे ही, उन्होंने वकील चव्हाण साहब को भी बुला लिया था. प्रिया ने उत्साह से बताना शुरू किया, "कॉमरेड प्रशांत, ये देखिए! मैनेजमेंट ने जिस 'कंसल्टेंसी फीस' के नाम पर जिस फर्म को लाखों रुपये भुगतान करना दिखाया है, वह असल में मालिक की पत्नी की एक कागजी फर्म है. ये 'ट्रैवल एक्सपेंस'? ये मजदूरों और स्टाफ के लिए नहीं, बल्कि डायरेक्टरों की विदेश यात्राओं के टिकट हैं जिन्हें कंपनी का बिजनेस खर्च में दिखा दिया गया है."
वकील रमेश चव्हाण ने डिजिटल दस्तावेज वाली पेन ड्राइव और उनके मिलान की पेन ड्राइव अपने ब्रीफकेस में रखते हुए कहा, "हम हर हाल में मंगलवार को प्रबंधन के क्लोजर की परमिशन के आवेदन का जवाब प्रस्तुत कर देंगे. अगली पेशी पर वे गवाहों के शपथपत्र प्रस्तुत करेंगे. हमें अपने सीए से समान खर्चों के अन्य उद्योगों के ऑडिटेड दस्तावेज प्राप्त करने के लिए केवल एक सप्ताह का समय मिलेगा. जिससे अगली पेशी पर हम प्रबंधकों के गवाहों से जिरह कर सकें. हम यह मिलान और दूसरे उद्योगों के दस्तावेज जिरह के दौरान ही प्रस्तुत करेंगे, उस समय प्रबंधन की ओर से आए लोगों के चेहरे देखने लायक होंगे.”
मंगलवार को वकील चव्हाण ने यूनियन के अध्यक्ष के साथ एएसएल दफ्तर जाकर क्लोजर परमिशन की प्रबंधन के आवेदन का जवाब प्रस्तुत कर दिया. उससे अगले शुक्रवार की पेशी पर प्रबंधन ने अपनी साक्ष्य में अपने जनरल मैनेजर और सीए के शपथ पत्र प्रस्तुत किए.
इसी शुक्रवार को जोइंट लेबर कमिश्नर के यहाँ मजदूरों के मांग पत्र पर समझौता वार्ता थी. लेकिन प्रबंधन की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ. समझौता अधिकारी ने उन्हें टिप्पणी प्रस्तुत करने के लिए सोमवार की पेशी तय कर दी. मजदूर यूनियन की ओर से प्रशांत बाबू ने प्रबंधन के रवैये पर कड़ी आपत्ति करते हुए कहा कि “मजदूरों की हड़ताल वाजिब है और जारी है. इसलिए आपको सोमवार को कुछ न कुछ निर्णय लेना पड़ेगा.”
... क्रमशः