@import url('https://fonts.googleapis.com/css2?family=Yatra+Oney=swap'); अनवरत: सचाई का घेरा

गुरुवार, 16 अप्रैल 2026

सचाई का घेरा

देहरी के पार, कड़ी - 26
रविवार को सीनियर वकील रमेश चव्हाण के साथ हुई मीटिंग में तय हुआ कि एएसएल (असिस्टेंट सैक्रेटरी लेबर) के यहाँ जीएम से जिरह में प्रशांत बाबू वकील साहब के साथ रहेंगे. वकील चव्हाण का आग्रह था कि ‘यदि प्रिया अपने एनालिसिस के चार्टों और ग्राफों सहित उनकी सहायक के रूप में उपस्थित रहे तो बेहतर होगा.’ यह कहते ही प्रशांत बाबू यूनियन के अध्यक्ष और मंत्री प्रिया की ओर देखने लगे. अभी तक प्रिया को एक्सपोज नहीं करना तय था. लेकिन ऐसा करने से वह एक्सपोज हो सकती थी. तभी प्रिया खुद बोल पड़ी. “मैं तैयार हूँ. बस मुझे एक छुट्टी लेनी पड़ेगी, वह मैं ले लूंगी.”

“नहीं प्रिया, अभी तुम्हारा एक्सपोजर ठीक नहीं होगा.” प्रशांत बाबू ने कहा.

“कामरेड, मैं उस फेज से निकल चुकी हूँ, मुझे अब अपने एक्सपोजर का कोई भय नहीं, और उसके बिना काम को आगे बढ़ाना भी संभव नहीं होगा.”

“कोई बात नहीं, हम प्रिया को एक्सपोज नहीं होने देंगे.” वकील चव्हाण बोले, “प्रिया तुम्हारे पास सफेद शर्ट और काली पैंट तो होगी ही, काला कोट या स्लीवलेस जैकेट भी हो तो और बढ़िया.”

“मैं समझ गयी.” प्रिया ने मुसकुराते हुए कहा, “आप मुझे अपना असिस्टेंट वकील दिखाना चाहते हैं. बस एक कोट की कमी है, तो कल मैं एक काला समर कोट खरीद लूंगी. अब तक यूनियन दफ्तर में जिन्होंने मुझे देखा है वे भी मुझे आपका असिस्टेंट वकील समझने लगेंगे.”

तय हुआ कि जिरह के वक्त प्रिया वकील के आउटफिट में चव्हाण की सहायता के लिए उपलब्ध रहेगी.

मंगलवार की सुबह मुंबई के एएसएल के दफ्तर में भारी गहमागहमी थी. प्रिया वकील चव्हाण की सहायक वकील के आउटफिट में मौजूद थी. बाहर चिलचिलाती धूप में ईसीआई फैक्ट्री के करीब साठ-पैंसठ मज़दूर शांत खड़े थे. वे नारेबाजी करते हुए वहाँ पहुँचे थे, लेकिन दफ्तर के बाहर पहुँचते ही उन्होंने नारेबाजी बंद कर दी थी. उनकी खामोश उपस्थिति भी अधिकारियों पर एक नैतिक दबाव बना रही थी.

अंदर, एएसएल के कक्ष में एयर-कंडीशनर की आवाज़ के बीच तनाव साफ़ महसूस किया जा सकता था. मेज के एक तरफ फैक्ट्री के जनरल मैनेजर (GM) और उनके कानूनी सलाहकार बैठे थे, और दूसरी तरफ वकील चव्हाण के साथ प्रशांत बाबू और प्रिया.

कार्यवाही शुरू हुई. वकील चव्हाण ने प्रिया का तैयार किया गया चार्ट पेश किया, जिसमें 'मैनेजमेंट कंसल्टेंसी' के नाम पर हुए खर्चों का ब्यौरा था.

चव्हाण साहब ने कड़क आवाज़ में पूछा, "मिस्टर जीएम, पिछले साल आपकी कंपनी ने 'एस.आर. एसोसिएट्स' को 18 लाख रुपये का भुगतान किया. क्या आप बता सकते हैं कि इस फर्म ने आपको क्या विशेष सलाह दी थी जिससे उत्पादन बढ़ा?"

जीएम साहब थोड़े हकलाए, "वह एक तकनीकी सलाहकार फर्म है. हमने उनसे सलाह ली थी कि हम कैसे प्रोडक्शन की लागत कम कर सकते हैं. जिससे हमारा घाटा समाप्त हो सके."

चव्हाण साहब ने तुरंत एक कागज़ मेज पर पटका, "मजे की बात यह है कि इस फर्म का पता वही है जो आपकी पत्नी के मायके का है, और इसकी एकमात्र डायरेक्टर आपकी पत्नी स्वयं हैं. क्या यह मजदूरों का पैसा निकालकर अपनी जेब भरने की 'फाइनेंशियल इंजीनियरिंग' नहीं है?"

पूरे कक्ष में सन्नाटा छा गया. एएसएल ने चश्मा उतारकर जीएम को गौर से देखा. प्रबंधन के वकील ने हस्तक्षेप करना चाहा, लेकिन एएसएल ने उन्हें हाथ के इशारे से रोक दिया.

“क्या यह सही है?”, इस बार खुद एएसएल ने जीएम से पूछा.

“जी यह बात सही है. लेकिन उस फर्म ने तकनीकी सलाहकारों की सलाह पर ही रिपोर्ट दी थी.”

“क्या आप अपनी पत्नी और उन तकनीकी सलाहकारों को उस रिपोर्ट के साथ पेश कर सकते हैं?” एएसएल ने पूछा?

“मुझे अपनी पत्नी से पूछना पड़ेगा. उनके द्वारा एंगेज किए गए सलाहकार अब भी उनके साथ काम कर रहे हैं या नहीं.”

“ठीक है, आप कोशिश कीजिए.”

सुनवाई के दौरान जब 15 मिनट का ब्रेक हुआ, तो प्रिया गलियारे में आकर खड़ी हुई. तभी उसके फोन की घंटी घनघना उठी. जयपुर से आकाश का कॉल था.

"हेलो प्रिया! जयपुर में बहुत गर्मी है, पर सुना है मुंबई में तुम्हारी बहस ने गर्मी बढ़ा रखी है?" आकाश की आवाज़ में हमेशा की तरह वही बेफिक्री थी.

प्रिया ने लंबी सांस ली, "आकाश, यहाँ हम सच के बहुत करीब हैं. आज पहली बार उन सफ़ेदपोश चोरों के चेहरे पीले पड़े देखे. बस दुआ करो कि ये विधिक लड़ाई समय पर पूरी हो जाए. और तुम्हें एक बात और बताऊँ. मैं आज सुनवाई में सीनियर वकील चव्हाण के असिस्टेंट वकील के आउटफिट में हूँ. इस नए रोल में मजा आ रहा है."

"दुआ साथ है प्रिया. वैसे, कोटा से मयंक का मैसेज था कि तुम बहुत थकी हुई लग रही हो. ध्यान रखना, जीत तब तक अधूरी है जब तक तुम खुद स्वस्थ न रहो. जयपुर आने पर पार्टी पक्की है, पर अभी लड़ाई जीतो!"

आकाश की बातों ने प्रिया के चेहरे पर मुस्कान बिखेर दी. उसे लगा कि जयपुर की दोस्ती और कोटा की ममता उसके साथ यहाँ मुंबई में इस सुनवाई में मौजूद हैं.

ब्रेक के बाद, प्रिया की टीम ने 'विदेशी यात्राओं' के बिलों का बम फोड़ा. साबित हो गया कि फैक्ट्री के खर्चे पर डायरेक्टर यूरोप की सैर कर रहे थे. एएसएल ने सख्त लहजे में कहा, "प्रबंधन को इन सभी खर्चों का विस्तृत स्पष्टीकरण शपथ पत्र पर देना होगा. क्लोजर की अनुमति केवल घाटा होने पर नहीं, बल्कि 'ईमानदार घाटा' होने पर मिल पाएगी."

शाम चार बजे जब वे एएसएल के दफ्तर से बाहर निकले तो प्रशांत बाबू ने प्रिया के कंधे पर हाथ रखा, "प्रिया, तुम्हारी डेटा माइनिंग ने आज हमें वह बढ़त दिला दी है जिसकी उम्मीद प्रबंधन ने सपने में भी नहीं की होगी. तुम्हारी मेहनत के कारण ईसीआई का मजदूर आज सीना ताने अपने नियोजक के सामने खड़ा है."

प्रिया ने देखा कि सारे मजदूर दफ्तर के गेट के बाहर खड़े हो गए हैं. जैसे ही वे गेट के बाहर उनके बीच पहुँचे उन्होंने जोर से नारा लगाया, “इंकलाब जिन्दाबाद” “हम झूठ को हराएंगे-सचाई को लाएंगे.” प्रशांत बाबू ने अपने दोनों हाथ ऊँचे किए तो मजदूर चुप हुए. उनकी आँखें अब एक नई उम्मीद से चमक रही थीं.
... क्रमशः

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