देहरी के पार, कड़ी - 30
19 अप्रैल, 2019 शुक्रवार.
असिस्टेंट लेबर कमिश्नर (ASL) कार्यालय का सुनवाई वाला इजलास आज छोटा लग रहा था. आगे की दो बैंचों को छोड़कर बाकी सभी पर मजदूर बैठे थे. यहाँ तक कि इजलास की बैंचों के दाएँ, बाएँ और पीछे की ओर जो तीन-तीन फुट के करीब स्थान था उसमें भी मजदूर खड़े थे. इजलास के बाहर की गैलरी और उसके आगे जो खुली जगह थी वहाँ सभी ओर मजदूर ही मजदूर थे. आगे दो बैंचों में से दायीं ओर की बैंचों पर प्रबंधन के गवाह, फैक्ट्री का लीगल मैनेजर, वकील मनोज भट्ट और उसके दो सहायक थे. बायीं और की बैंचों पर वकील रमेश चव्हाण, एक सहायक और दूसरे सहायक के रूप में प्रिया अपने वकील वाले आउट फिट में, , प्रशांत बाबू और यूनियन के अध्यक्ष, सचिव बैठे थे. वकील रमेश चव्हाण अपनी फाइलों के साथ जिरह के लिए एकदम तैयार थे. प्रिया का दिल आज एक अलग ही लय में धड़क रहा था. यह डर नहीं, बल्कि उस सच को बाहर लाने का रोमांच था जिसे उसने दस्तावेजों के ढेर से खोद निकाला था. इजलास में उपस्थित लोगों की आपसी बातचीत से हॉल में मधुमक्खियों के झुंड जैसी आवाज गूंज रही थी.
एसीएल ने कमरे में प्रवेश करते ही यह आवाजों की गूंज थम गई. एसीएल कुर्सी पर बैठे, कार्यवाही शुरू हुई. “मिस्टर भट्ट आपके गवाह तैयार हैं.” एसीएल ने पूछा.
“हाँ बिलकुल तैयार हैं.” मिस्टर भट्ट ने कहा, और फैक्ट्री के जनरल मैनेजर (GM) को इशारा किया वह कटघरे में आकर खड़ा हो गया. उसके चेहरे पर वही पुराना आत्मविश्वास था, जो फैक्ट्री में और पिछली कई सुनवाइयों से मजदूरों को डराने के काम आता रहा था.
वकील चव्हाण ने जिरह शुरू की. शुरुआती सवाल सामान्य थे, जैसे प्रबंधन को ढीला छोड़ने की रणनीति हो. उन्होंने इन सवालों के जवाबों से यह स्थापित कर लिया कि फैक्ट्री में सिलिकॉन वेफर्स कच्चे माल के रूप में काम में लिए जाते हैं. और कारखाने के कामों में जो भी काम किए जाते हैं उनके लिए ऊर्जा का एकमात्र स्रोत बिजली है. यहाँ तक कि बिजली चले जाने जैसी आपात स्थितियों के लिए कारखानों में दो डीजल जनरेटर स्थापित हैं जो काम कर रहे हैं.
अचानक चव्हाण साहब ने एसीएल से उनकी केस फाइल ली और उसमें से गवाह का शपथ-पत्र निकाल कर पूछा, "मिस्टर जीएम, यह आपका शपथ पत्र है आपने इसके पैरा 4 में कहा है कि पिछले तीन महीनों से कच्चा माल, विशेषकर सिलिकॉन वेफर्स की वैश्विक कमी के कारण उत्पादन पूरी तरह ठप है. क्या यह सही है?"
जीएम ने गला साफ किया, "जी, बिल्कुल सही है. माल ही नहीं था तो फैक्ट्री में उत्पादन कैसे होता?"
चव्हाण साहब ने एक ग्राफ एएसएल की मेज पर रखा, "देखिए मिस्टर जीएम यह दस्तावेज आपके उद्योग के स्टॉक का ही ग्राफ है?”
“जी हाँ, यह हमारे ही स्टॉक का ग्राफ है.”
“इस ग्राफ में मार्च 2019 के क्लोजिंग स्टॉक में सिलिकॉन वेफर्स की 5,000 यूनिट्स का बैलेंस दिख रहा है, उसका क्या हुआ? क्या वह हवा में गायब हो गया?”
सवाल सुन कर जीएम के चेहरे पर पसीने की बूंदें छलक आई, गला सूख गया, हालाँकि एसीएल का इजलास पूरा एयरकंडीशंड था. उसने जेब से रूमाल निकाल कर पसीना पोंछा और अपने सहायक को इशारा किया कि उसे पानी लाकर दे.
सहायक के पास टेबल के नीचे ही पानी की बोतल रखी थी. लेकिन या तो उसे उसकी याद नहीं आई, या फिर वह अधिक समय लेना चाहता होगा. उसने तुरन्त अपने साथ के एक क्लर्क को पानी लाने को कहा. क्लर्क तुरन्त उठकर पानी लेने बाहर भागा. चव्हाण के सहायक ने जीएम के सहायक को इशारा किया कि उनकी पानी की बोतल टेबल के नीचे रखी है. जीएम का सहायक सकपका गया. उसने टेबल के नीचे से पानी की बोतल निकाल कर जीएम को दी. जीएम ने पानी के चार-छह घूँट गले से नीचे उतारे. वे फिर सवालों के जवाब देने को तैयार थे.
चव्हाण ने एक और चार्ट फाइल से निकाल कर जीएम को दिखाया. “देखिए, क्या यह बिजली की खपत का चार्ट आपकी फैक्ट्री का ही है?”
“जी, हाँ हमारी फैक्ट्री का ही है.” जीएम ने उत्तर दिया.
“गौर से देखिए, क्या यह सही है कि, इसमें फैक्ट्री की मार्च 2019 में बिजली खपत जनवरी और फरवरी की बिजली खपत से कुछ अधिक ही दर्ज है?”
“जी, सही है.”
“तो फिर, आप अदालत को समझाएँ, कि यदि उत्पादन ठप था, तब भी मार्च 2019 में फैक्ट्री की बिजली की खपत 'पीक' पर कैसे थी? क्या आपकी मशीनें बिना उत्पादन के ही बिजली पी रही थीं?"
जीएम के माथे पर पसीने की पहली बूंद चमकी. उनके वकील, मनोज भट्ट ने आपत्ति जताने की कोशिश की, लेकिन एएसएल ने उन्हें हाथ के इशारे से रोक दिया.
चव्हाण साहब ने आवाज़ और बुलंद की, "हुज़ूर, असलियत यह है कि उत्पादन बंद नहीं था. उत्पादन को 'ऑफ द रिकॉर्ड' किया जा रहा था. यह साइफनिंग ऑफ स्टॉक (Siphoning of Stock!) है. तैयार आईसी (IC) को 'वेस्ट डिस्पोजल' के फर्जी बिलों के नाम पर फैक्ट्री से बाहर भेजा गया और मुनाफे को शेल कंपनियों में डाइवर्ट किया गया. यह घाटा प्राकृतिक नहीं है, इसे 'क्रिएट' किया गया है ताकि इन 350 मजदूरों की 'फेयर वेजेज' की मांग को कुचला जा सके."
पूरे हॉल में सन्नाटा छा गया. एएसएल ने चश्मा उतारकर जीएम की ओर देखा, "मिस्टर जीएम, क्या आपके पास बिजली के इन बिलों और गायब हुए 5,000 वेफर्स का कोई तार्किक जवाब है?"
जीएम अपने वकील की ओर देखने लगे, लेकिन भट्ट साहब खुद फाइलों में कुछ ढूंढने का नाटक कर रहे थे. प्रिया ने गौर किया कि जीएम के हाथ कांप रहे थे.
चव्हाण साहब ने अंतिम प्रहार किया, "हुज़ूर, यह मामला केवल क्लोजर का नहीं, बल्कि एक बड़े आर्थिक अपराध और Siphoning of Funds का है. प्रबंधन ने पिछले तीन साल से अकाउंट्स को दूषित किया है ताकि मजदूरों को उनके स्वाभिमान की कीमत न चुकानी पड़े."
एएसएल ने गंभीर मुद्रा में नोटिंग की और आदेश दिया, "मैनेजमेंट सोमवार तक इन विसंगतियों पर चाहे तो अपना लिखित स्पष्टीकरण पेश कर सकता है."
कोर्ट रूम से बाहर निकलते समय मजदूरों ने चव्हाण साहब और प्रिया को घेर लिया. रामजी काका की आँखों में आँसू थे. उन्होंने प्रिया के सिर पर हाथ रखा, "बिटिया, आज तुम्हारी मेहनत ने उन चूल्हों में फिर से आग जला दी है जो बुझने वाले थे."
“नहीं काका, यह मेरी अकेले की मेहनत नहीं है. इसमें राहुल, स्नेहा और आदित्य का भी बराबर का योगदान है.”
... क्रमशः
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