@import url('https://fonts.googleapis.com/css2?family=Yatra+Oney=swap'); अनवरत: शिकंजा

गुरुवार, 2 अप्रैल 2026

शिकंजा

देहरी के पार, कड़ी - 14
योजना के अनुसार, रात साढ़े आठ बजे प्रिया ऑफिस से निकली. उसके कदम सधे हुए थे. उनमें किसी तरह की कोई घबराहट नहीं, बल्कि एक तरह की लापरवाही थी. उसने अपनी स्मार्टवॉच पर 'लोकेशन शेयरिंग' ऑन की और टीम को 'रेडी' का सिग्नल भेजा. कुछ दूर चलकर उसने ऑटो लिया. ऑटो चालक यूनियन का कार्यकर्ता था जिसे इस तरह के कामों की आदत थी. ऑटो मेवाड़ भोजनालय से विपरीत दिशा में जा रहा था. एक किलोमीटर बाद ऑटो एक छोटी गली में मुड़ गया. दूसरी सड़क पर आकर विपरीत दिशा में चलकर उसके पहले वाली गली में तीन मकान आगे आकर खड़ा हो गया. प्रिया ऑटो में बैठी रही, ड्राइवर ने उतर कर सड़क पर जाकर देखा स्कॉर्पियो उस गली से सड़क पर आकर रुक गयी थी. उसके चालक को पता नहीं लग रहा था कि आटो कहाँ चला गया. ड्राइवर वापस आकर बताया कि स्कॉर्पियो वाला कन्फ्यूज है, अब मैं आपको फ्लैट पर छोड़ देता हूँ.

अगले दिन सुबह उन्होंने प्रोजेक्ट क्लाइंट के सर्वर पर शिफ्ट करके उसे सौंप दिया. क्लाइंट को किसी तरह की समस्या आने पर उसे देखने के लिए एक डेवलपर काफी था. प्रिया की टीम के बाकी साथी उसके साथ योजना में शामिल थे. सबने लंच एक साथ लिया. काली स्कॉर्पियो बदस्तूर ड्यूटी पर थी. उसे थोड़ा काम देने के लिए प्रिया, स्नेहा और राहुल ऑफिस से बाहर निकले, आटो लिया और डेढ़ किलोमीटर दूर एक कैफे में कॉफी पीकर लौट आए. स्कॉर्पियो ने उनका पीछा किया. प्रिया ने यह जान लिया कि आज स्कॉर्पियो को विक्रांत ड्राइव कर रहा है, उसके दो लोग पीछे बैठे थे.

शाम ठीक आठ बजे प्रिया अकेली अपने ऑफिस से निकली. उसने स्टैंड से ऑटो लिया. यह कल वाला ऑटो नहीं था, लेकिन चालक वही वाला था. ऑटो जानबूझकर उस रास्ते पर मुड़ा जहाँ 'मेवाड़ भोजनालय' से पहले एक चौड़ी सड़क और फिर एक सुरक्षित मोड़ आता था. काली स्कॉर्पियो किसी भूखे शिकारी की तरह पीछे लग गई. जैसे ही स्कॉर्पियो मोड़ पर पहुँची, अचानक सामने से एक बड़ा मिनी-ट्रक आकर खड़ा हो गया और पीछे से राहुल और आदित्य की गाड़ियों ने रास्ता ब्लॉक कर दिया. मिनी-ट्रक का चालक भी नीचे उतर गया.

स्कॉर्पियो के पहिए चीखते हुए रुक गए. घेराबंदी पूरी थी. स्कॉर्पियो न आगे जा सकती थी, न पीछे और न ही मुड़ने का कोई ऑप्शन था. इस 'घेराबंदी' से विक्रांत बुरी तरह तिलमिला गया वह ड्राइविंग सीट से नीचे उतरा. उसके चेहरे पर वही कोटा वाली सनक थी. उसे लगा कि वह धौंस से इन मिनी-ट्रक वाले को डरा देगा.

उसने चिल्लाकर कहा, ये क्या बदतमीजी है? ट्रक को इस तरह बीच में क्यों खड़ा किया है? अपना ट्रक हटाओ, पीछे जाम लग रहा है.

मैं क्या करूँ बाबूजी, इंजन बंद हो गया है, देखना पड़ेगा या फिर किसी मिस्त्री को बुलाना पड़ेगा. इतना कहकर उसने ट्रक का बोनट खोला और उसके अंदर गड़बड़ी देखने लगा.

विक्रांत यह देखकर झुंझला गया. वह पीछे राहुल और आदित्य की ओर बढ़ा, “तुम अपने स्कूटर एक तरफ करो मैं अपनी गाड़ी थोड़ा पीछे लेकर निकालता हूँ, वरना ट्रैफिक रुक जाएगा. वे दोनों उतर कर स्कूटर को एक तरफ करने लगे. तभी उसे ध्यान आया कि प्रिया का ऑटो तो निकल चुका होगा. उसने ट्रक के आगे जाकर देखा तो प्रिया का ऑटो रुका हुआ था, वह बाहर निकल कर खड़ी थी.

प्रिया को इस तरह खड़ी देख कर उसे गुस्सा आ गया. उसने चिल्लाकर कहा, "प्रिया, ये क्या तमाशा है? जयपुर में भी तुमने यही किया था. पुलिस बुलाकर क्या उखाड़ लोगी? वहाँ तुमने मुझे शांति भंग (170 BNS) में गिरफ्तार करवाया था. क्या हुआ? शाम को मजिस्ट्रेट ने जमानत ले ली. आधी रात तक तो कोटा पहुँच गया था. यहाँ तुम क्या कर लोगी? यहाँ भी बॉन्ड भरकर बाहर आ जाऊँगा."

प्रिया ने शांत भाव से अपना फोन ऊपर किया. "विक्रांत, तुमने सही कहा. जयपुर में तुम केवल 'शांति भंग' के मामले में छूट गए थे. लेकिन वहाँ तुमने अपना एक रिकॉर्ड (Criminal Record) छोड़ दिया था. उसके बाद तुमने सोशल साइट्स से मेरे फोटो लेकर उन्हें डिस्टॉर्ट करके जो अपराध किया था उसकी जाँच मुम्बई पुलिस लगभग पूरी कर चुकी है उसे बस अब तुम्हारी तलाश है, उम्मीद है वह जल्दी ही तुम्हें तलाश कर लेगी. इसके अलावा मेरे पास पिछले 48 घंटों की तुम्हारी 'स्टॉकिंग' (Stalking) का वीडियो सबूत है, तुम्हारे मूवमेंट के डिजिटल लॉग्स हैं और तुम्हारे कारिंदों की गवाही है."

प्रिया कुछ आगे बढ़कर विक्रांत के एकदम नजदीक आ गई और कड़क आवाज़ में बोली, "एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के लिए तुम केवल एक 'ट्रैकेबल बग' (Trackable Bug) हो. अब तुम्हारा एक और अपराध मुम्बई पुलिस की डायरी में दर्ज होने को तैयार है. अब तुम एक 'रिपीटर ऑफेंडर' (Repeater Offender) हो."

तभी सड़क पर नजदीक ही नीली-लाल बत्तियाँ चमकने लगीं. प्रशांत बाबू ने पहले ही पुलिस को सारे डिजिटल सबूत और विक्रांत की लाइव लोकेशन भेज दी थी. पुलिस की गाड़ी ठीक प्रिया के पीछे आकर रुकी, गाड़ी से मुम्बई पुलिस का एक इंस्पेक्टर और दो सिपाही बाहर निकले. तीनों ने विक्रांत को दबोचा और उसे जबरन धकिया कर कार की पिछली सीट पर ठेलकर दरवाजा बंद किया और डोर लॉक कर दिए. अब वह पुलिस गाड़ी से नीच नहीं उतर सकता था.

इंस्पेक्टर ने प्रिया को कहा, “आपको कुछ देर के लिए पुलिस स्टेशन आना पड़ेगा. हमने आपकी सूचना दर्ज कर ली थी. आपको आकर दस्तखत करने होंगे. फिर हम उसे एफआईआर के रूप में दर्ज कर आपको उसकी एक प्रति दे देंगे.

प्रिया अपने ही ऑटो से पुलिस स्टेशन पहुँची, कुछ देर बाद ही राहुल और आदित्य भी पहुँच गए. इंस्पेक्टर ने सूचना पर प्रिया के हस्ताक्षर लिए फिर एफआईआर दर्ज कर उसपर और एक प्रति प्रिया को दी. फाइल देखकर उसने कहा, “जयपुर का पुराना रिकॉर्ड, मुम्बई में फेक प्रोफाइल का मामला और अब स्टॉकिंग का नया मामला... इस बार विक्रांत साहब का बिना सजा काटे जेल से बाहर आना मुश्किल होगा. प्रिया, राहुल ओर आदित्य बाहर आए. राहुल ने प्रिया से पूछा, “अब?”

“अब क्या? अब मेवाड़ भोजनालय चलना है, सब वहाँ प्रतीक्षा कर रहे होंगे. आज डिनर वहीं होगा.”
... क्रमशः

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