देहरी के पार कड़ी - 5:
विक्रांत और उसके साथियों को थाने ले जाने के बाद सभी ड्राइंगरूम आ गए. घर में जो तनाव रात विक्रांत का फोन सुनने के बाद पैदा हुआ था, उससे मुक्ति मिली. सबने सुकून की साँस ली. सब उसी घटना पर बातें करने लगे. तान्या ट्रे में पानी के गिलास लेकर आई, तो सबने महसूस किया कि उन्हें प्यास लगी है, सबने पानी पिया. आकाश ने पूछ लिया, “तान्या, तुमने कैसे जाना कि सबको पानी की जरूरत है?”
“बिलकुल सीधी-सिंपल बात है, पुलिस जाने के बाद मुझे प्यास लगी. . मैंने किचन जाकर पानी पिया. तभी मुझे लगा कि सभी को प्यास लगी होगी, तो मैं पानी ले आई.”
“बस?” आकाश ने कहा.
“अब इसमें बस का क्या?” तान्या ने आकाश की ओर मुहँ बनाते हुए पूछा?”
“घड़ी देख, चार बज गए हैं. चाय का टाइम हो गया है. सबको चाय भी तो चाहिए.”
आकाश की इस बात पर तान्या ने एकदम जीभ बाहर निकाली और अपने ही दाँतों से दबाकर दिखाने लगी.
तभी श्रीमती मल्होत्रा खड़ी हुईं. “तू यहीं बैठ तान्या, मैं चाय बनाकर लाती हूँ” इतना कहकर वे रसोई की ओर चल दीं.
आकाश ने फिर तान्या को चिढ़ाकर कहा, “मुझे तो पहले ही पता था कि चाय मम्मी ही बनाएंगी.”
“वो कैसे?” प्रिया ने आकाश से पूछा.
“मम्मी को खुद और पापा के सिवा किसी और के हाथ की बनी चाय पसंद नहीं. तो सिंपल है, वही बनाएंगी.”
थोड़ी देर में चाय आ गई, साथ में कुछ नमकीन और बिस्कुट भी थे. सब देर तक बातें करते रहे.
शान्ति के बावजूद प्रिया जानती थी कि यह एक पड़ाव मात्र है, मंजिल अभी दूर है. आकाश जब उसके लैपटॉप के लिए प्रिया के घर गया था, तब उसे अपने पिता को अपना नंबर देना पड़ा था. वे लगातार आकाश के फोन पर कॉल किए जा रहे थे. आकाश उनका फोन ले ही नहीं रहा था. अब जैसे विक्रांत ने मल्होत्राजी का पता जाना, वैसे उसके पिता भी जान सकते थे. विक्रांत ही कोटा पहुँचकर बता सकता था. प्रिया को आशंका हो गई थी कि उसके पिता कभी भी वहाँ आ सकते हैं. रात के खाने पर प्रिया ने मल्होत्राजी को अपनी आशंका बता दी.
मल्होत्राजी ने उसे तसल्ली दी, वे आएंगे तो उनसे मैं बात कर लूंगा. कोई दिक्कत नहीं होगी.
सोमवार सुबह प्रिया ने लॉग इन किया और काम करने लगी. दोपहर 1 बजे प्रिया के मैनेजर का फोन आया. "प्रिया, तुम्हारी सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है. कंपनी ने तुम्हारा ट्रांसफर मुम्बई हेड ऑफिस कर दिया है. कल सुबह की फ्लाइट की टिकट तुम्हारे ईमेल पर भेज दी है. कंपनी गेस्ट हाउस में एक हफ्ते के लिए तुम्हारे रुकने की व्यवस्था कर दी है. अब कल फ्लाइट पकड़ कर तुम मुम्बई पहुँचो."
रात नौ बजे डाइनिंग पर यही चर्चा थी कि प्रिया की सुबह 8 बजे की फ्लाइट है, उसे छह बजे तक एयरपोर्ट पहुँचना होगा. एयरपोर्ट पहुँचने में आधा घंटा लगेगा, तो सुबह साढ़े पाँच से पहले उसे निकलना होगा. वह अपनी तैयारी अभी पूरी कर ले. यह तय हुआ कि सुबह आकाश उसे छोड़ने एयरपोर्ट जाएगा. तभी तान्या कहने लगी, “मैं भी दीदी को छोड़ने सुबह एयरपोर्ट चलूंगी.”
“तू बड़ी कब होगी, तान्या?” आकाश ने हमेशा की तरह उसे चिढ़ाने के स्वर में कहा.”
“मैं बड़ी ही हूँ भैया. बस आप ही बड़े नहीं हुए. हर दम मुझे चिढ़ाते रहते हो.” तान्या जवाब दिया और उठ कर चल दी.
मंगलवार सुबह तान्या और आकाश प्रिया को छोड़ने जयपुर एयरपोर्ट पर आए. प्रिया के बोर्डिंग के लिए चले जाने के बाद भी उन्होंने एयरपोर्ट न छोड़ा. जब जहाज टेक ऑफ कर आकाश में पहुँच गया तभी वे रवाना हुए.
तीन घंटे बाद, मुम्बई की नम हवाओं ने प्रिया का स्वागत किया. यहाँ कोई उसे 'गुप्ता जी की बेटी' या 'विक्रांत की अमानत' के रूप में नहीं जानता था. यहाँ वह केवल प्रिया थी, एक ‘सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर’. प्लेन से बाहर आते ही उसने आकाश को सूचित किया कि उसकी फ्लाइट उतर गई है. कंपनी गेस्ट हाउस में सामान रखा, फ्रेश हुई और ऑफिस पहुँची.
उसने दो बजे जॉइनिंग दी. उसे काम करने के लिए स्थान आवंटित कर दिया गया था. मैनेजर ने उसे टीम के सभी इंजीनियरों से मिलवाया और जाते हुए कहा, सबको जान लो और चाहो तो गेस्ट हाउस जाकर आराम करो. कल से समय पर काम पर आना होगा.
रात आठ बजे आकाश का फोन आया. उसने बताया कि “सुबह 11 बजे तुम्हारे पिता और भाई उनके घर पहुँच गए थे. पापा ने उन्हें बड़े प्रेम से ड्राइंग रूम में बिठाया, उन्हें चाय पिलाई और दोपहर के खाने के लिए पूछा. कुछ हुआ, उसके लिए वे खुद को शर्मिंदा महसूस कर रहे थे. बता रहे थे, तुमने तो उन्हें बता दिया था कि तुम अभी शादी नहीं करना चाहती. लेकिन वे ही पीछे लगे रहे. सोचा था एक बार शादी हो जाएगी तो सब ठीक हो जाएगा. विक्रांत के परिवार का अच्छा बिजनेस है और विक्रांत ने उसे बढ़ाया भी है. लेकिन जिस तरह वह जयपुर पहुँचा और अपने व्यवहार के कारण शांति भंग में गिरफ्तार होकर रात भर हवालात में रहा, उससे उसके बारे में उनका भ्रम टूट गया है. जमानत पर छूटकर आधी रात को कोटा पहुँचने के बाद उसने ही बताया कि तुम कहाँ हो. वे तुमसे माफी मांगने और विक्रांत की ओर से सावधान करने ही यहाँ आए हैं. जाते हुए कह कर गए हैं कि प्रिया को कहना कि वह अपनी माँ से बात जरूर कर ले.”
प्रिया को यकायक विश्वास नहीं हुआ. फिर भी उसने मन ही मन तय कर लिया कि अभी नहीं, लेकिन सप्ताह भर बाद जब वह फ्लैट में शिफ्ट हो जाएगी, तब मम्मी को फोन अवश्य करेगी और सब कुछ सही लगा तो पापा से भी बात करेगी.
... क्रमशः
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