देहरी के पार, कड़ी - 9
रविवार की रात सोने के पहले प्रिया ने फोन देखा. पुलिस के साइबर सेल का मैसेज था. उसकी शिकायत दर्ज कर ली गई थी. उसे सोमवार सुबह दस बजे बयान देने के लिए गोरेगाँव थाने बुलाया था. वह जानती थी कि उसे अब संपत्ति नहीं समझा जा सकता, बल्कि 'प्रिया' होने का गर्व महसूस हो रहा था.
सुबह वह जल्दी उठकर तैयार होने लगी. तभी उसे विचार आया कि अकेले थाने जाने पर पुलिस सोच सकती है कि उसके साथ कोई नहीं. उसे रामजी याद आए, उसने तुरंत उन्हें फोन लगाया. रामजी कहने लगे, “बिटिया हम तुम्हारे साथ पुलिस स्टेशन चलेंगे, पर हम आईटी वालों की आईडिया यूनियन वाले प्रशांत बाबू को साथ ले चलें तो बढ़िया रहेगा. वे सुबह का नाश्ते के लिए अभी थोड़ी देर में आते होंगे. मैं उनसे बात कर लूंगा. तुम इधर ही आ जाओ”
प्रिया सवा नौ बजे भोजनालय पहुँच गई. प्रशांत बाबू पैंतालीस बरस के रहे होंगे. वह पहुँची, तब वे नाश्ता कर रहे थे. रामजी ने उसे उनसे मिलवाया. फिर बोले, “बिटिया तुम भी नाश्ता कर लो मैं भिजवाता हूँ. थाने में न जाने कितनी देर लगे.”
बातचीत में पता लगा कि प्रशांत बाबू आईटी और टेक्नोलॉजी का उपयोग करने वाली नॉन-आईटी कंपनियों के कर्मचारियों की एसोसिएशन (IIDEA) के सचिव हैं. वे बिहार से हैं और छात्र जीवन से ही वाम राजनीति में आ गए थे. वे अभी यहाँ टीसीएस में एसएसई सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट हैं. उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर लड़कियों को बदनाम करने की ऐसी हरकतें बहुत होती हैं. वे उसके साथ चलेंगे. प्रिया को लगा कि अब रामजी को थाने ले जाने की जरूरत नहीं. प्रिया ने रामजी को कहा कि काका आप भोजनालय देखें, मेरे साथ प्रशांत बाबू हैं ही.
दोनों ठीक दस बजे गोरेगांव पुलिस स्टेशन में थे. साइबर सेल की महिला अधिकारी, इंस्पेक्टर शीला ने उसकी बात सुनी. "मैडम, 'इम्पर्सोनेशन' (Impersonation) और 'साइबर स्टॉकिंग' गंभीर अपराध हैं. आपने अच्छा किया कि आपने इसे रिपोर्ट किया. हम मुलजिम को छोडेंगे नहीं." इंस्पेक्टर ने आश्वासन दिया कि वे उसकी सभी फेक आईडी को तुरंत 'टेक डाउन' कराएंगे. प्रिया को लगा कि आज़ादी की लड़ाई सिर्फ भावनाओं की नहीं, बल्कि कानूनों और डिजिटल सबूतों की भी है, और इसमें कुछ लोगों का साथ भी जरूरी है. प्रशांत बाबू कह रहे थे कि अधिकांश आईटी कर्मचारी अकेले रहते हैं. ऐसे में एसोसिएशन के साथी अच्छी भूमिका अदा करते हैं. एसोसिएशन अपने सदस्यों के प्रोफेशनल हितों के लिए भी काम करती है. प्रिया को लगा कि उसे भी एसोसिएशन का सदस्य होना चाहिए. पर वह इसके लिए कुछ समय लेना चाहिए.
प्रिया ऑफिस पहुँची, तो उसे माहौल में एक अजीब सा तनाव महसूस हुआ. वह जानती थी कि वह 'लिंक' सब देख चुके होंगे. वह सीधे अपने मैनेजर, मिस्टर देसाई के केबिन में गई. वे एक अनुभवी व्यक्ति थे. उन्होंने शांत स्वरों में कहा, "प्रिया, हमने फेक प्रोफाइल और तस्वीरें देखी हैं. यह बहुत ही ओछी हरकत है. मैंने एचआर को कहा है कि इसे कंपनी की किसी भी छवि के साथ न जोड़ा जाए और टीम को निर्देश दिए हैं कि इस पर कोई गपशप न हो. कंपनी तुम्हारी सुरक्षा और निजता के साथ खड़ी है." मिस्टर देसाई के कथनों से उसे बहुत मजबूती मिली. उसने टीम मीटिंग में अपना सिर ऊँचा रखकर हिस्सा लिया. उसने महसूस किया कि कुछ नज़रों में सवाल थे, तो अनेक उसके समर्थन में, पर एकजुट भी हो रहे थे. शाम को उसने देखा कि उसके नाम से बनाए गए सभी फेक अकाउंट गायब थे, पुलिस एक्शन में आ चुकी थी.
शाम को घर लौटते समय भोजनालय गयी. रामजी को बताया कि एफआईआर भी दर्ज हुई और पुलिस ने सारे फेक अकाउंट भी बंद करवा दिए हैं.
रामजी कहने लगे, “मुम्बई पुलिस जब काम करती है तो तेजी से करती है. फिर प्रशांत बाबू जाएँ तो पुलिस को फौरन एक्शन में आना पड़ता है. बिटिया, तुम्हें मेरे रहते मुंबई में किसी तरह की फिक्र करने की कोई जरूरत नहीं है.” रामजी का स्नेह उसे अपनी पुरानी ज़मीन से जोड़ता था.
तभी आकाश का कॉल आया. "प्रिया, मैंने साइबर विंग के उच्च अधिकारियों से बात की थी. सभी फेक आईडी ब्लॉक कर दी गई हैं. वे जल्दी ही विक्रांत का आईपी एड्रेस ट्रैक करके कोटा पुलिस को सूचित करेंगे. जिससे उसे मुंबई लाया जा सके. तुम अपने काम पर ध्यान दो." आकाश का प्रेम उसे नए आसमान में उड़ना सिखा रहा था.
प्रिया ने महसूस किया कि वह अकेली नहीं है. एक तरफ रामजी का निस्वार्थ वात्सल्य और दूसरी तरफ आकाश का सुरक्षात्मक और सशक्त साथ. उसने तय किया कि वह डरेगी नहीं. अगले दिन उसने अपने ऑफिस के कंप्यूटर पर वह इंटरनेशनल प्रोजेक्ट का 'डेटाबेस' खोला और एक नई ऊर्जा के साथ काम करना शुरू कर दिया. अब उसे 'सीनियर लीडर' की तरह अपनी टीम को दिशा देनी थी.
उधर कोटा में विक्रांत को जैसे ही पता चला कि उसकी वह फेक आईडी उड़ गई है, वह बौखला गया. वह समझ गया कि यह पुलिस का काम है. प्रिया उसकी करतूतों से घबराई नहीं, बल्कि उसने एफआईआर करके पुलिस को एक्टिव कर दिया है. वह सीधा प्रिया के पिता के पास के 'मोहन विला' पहुँचा.
"अरे अंकल, आपकी बेटी ने तो हद्द कर दी! अब तो पुलिस केस हो गया है. पूरे व्यापारिक जगत में बदनामी होगी."
ब्रज मोहन गुप्ता चुप रहे. उनके चेहरे पर अब गुस्से से ज़्यादा एक गहरा 'अविश्वास' और 'हताशा' थी. उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि वे विक्रांत पर विश्वास करें, जो उनकी प्रतिष्ठा के घाव पर नमक छिड़क रहा था, या अपनी बेटी के उस 'अक्स' पर जो मुम्बई की भीड़ में अपनी आज़ादी के लिए लड़ रहा था. प्रिया के भाई मयंक ने धीरे से कहा, "पापा, प्रिया ने गलत नहीं किया. विक्रांत ने उसकी तस्वीरें चोरी करके गंदी हरकत की है." गुप्ताजी ने मयंक को डाँटा नहीं, बस एक गहरी साँस लेकर रह गए. विक्रांत भी गुप्ता पर कोई प्रतिक्रिया न देख वापस लौट गया.
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