देहरी के पार, कड़ी - 35
शनिवार 27 अप्रैल 2019 की रात 11 बजे सीनियर एडवोकेट चव्हाण का दफ्तर एक ऑपरेशन थिएटर बना हुआ था. ईसीआई फैक्ट्री के क्लोजर की परमिशन के केस की फाइल उनकी चार गुणा आठ फुट की टेबल पर खुली पड़ी थी. चव्हाण साहब के अतिरिक्त उनका एक सहायक, प्रशांत बाबू, प्रिया, ईसीआई यूनियन का सचिव और रामजी काका मौजूद थे. रामजी काका अभी-अभी सबके लिए कॉफी बनाकर लाए थे. प्रबंधन के आवेदन और साक्ष्य का 'पोस्टमार्टम' जारी था. मेज पर औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के बेयर एक्ट की किताब खुली रखी थी. धारा 25-ओ (2) वाले पन्ने पर क्लिपर लगा हुआ था. प्रबंधन के आवेदन में फैक्ट्री के क्लोजर के कारणों को पर्याप्त और संतोषप्रद 'Adequate and Sufficient' होने की पहली कसौटी पर जाँचा जा रहा था. सभी के चेहरे पर थकान थी, पर आँखों में आत्मविश्वास चमकता था.
चव्हाण साहब ने चश्मा उतारकर मेज पर रखा और प्रिया की ओर देखा. "प्रिया, प्रबंधन ने 'वर्किंग कैपिटल' की कमी को मुख्य कारण बताया है. क्या हमारी ऑडिट रिपोर्ट इसे ध्वस्त करने के लिए पर्याप्त है?"
प्रिया ने फाइल आगे बढ़ाई. "सर, उनकी बैलेंस शीट में 'देनदारियाँ' (Liabilities) कृत्रिम रूप से गुब्बारे की तरह फुलाकर पेश की गई हैं. सिंगापुर वाला ट्रांजैक्शन साबित करता है कि फंड्स की 'कमी' कृत्रिम है. वरना उद्योग संचालन के लिए उनके पास संसाधन पर्याप्त 'Adequate' हैं, बस उन्हें कहीं और दफ्न कर दिया गया है. उद्योग घाटे में नहीं बल्कि मुनाफे में है और मुनाफा भी कम नहीं है."
अगली कसौटी थी 'Good Faith' (नेक नियत). क्या उद्योग बंद करने की अनुमति का आवेदन नेक नियत से पेश किया गया है. "यहाँ हम मार करेंगे," प्रशांत बाबू ने मेज थपथपाई. "हड़ताल के पहले जिस तरह से उन्होंने मजदूरों को 'ट्रक सिस्टम' में फँसाए रखा और अब 'डीम्ड परमिशन' की ताक में बैठे हैं, यह 'Good Faith' कतई नहीं है. यह पूरी तरह से 'Mala fide' (दुर्भावनापूर्ण) है." यूनियन सचिव ने जोड़ा, "और सर, जीएम का जिरह में झूठ बोलना और 80% प्रोसेस लॉस का तकनीकी रूप से असंभव तर्क देना भी उनकी बदनीयती को साफ़ करता है."
तीसरी कसौटी थी अत्यंत अनुचित या अन्यायपूर्ण 'Grossly Unfair or Unjust'. इस पर प्रिया ने संवेदनशीलता के साथ पक्ष रखा. "सर, प्रबंधन का यूनियन की ट्रक सिस्टम को समाप्त कर फेयर वेजेज की मांग पर बिलकुल तवज्जोह नहीं देना और उन्हें हड़ताल पर जाने को विवश करना. हड़ताल पर जाने के कुछ ही दिन बाद इस कारखाने को बंद करने की अनुमति प्राप्त करने के इस आवेदन को पेश करना पूरी तरह अनुचित और अन्यायपूर्ण है. जबकि एम्पलॉइज को फेयर वेजेज देकर भी मुनाफे में चलाया जा सकता है."
“अब हमें देखना है कि एक इंटीग्रेटेड सर्किट बनाने वाले कारखाने का बंद होना किस तरह सामान्य जनता के हितों 'Interest of the General Public' के विपरीत हो सकता है.” चव्हाण साहब ने प्रश्न सबके सामने रख दिया.
“सर, हमारा कारखाना डिफेंस आर्म इंडस्ट्रीज के लिए ऑर्डर पर इंटीग्रेटेड सर्किट बनाता है, उस काम में हमारी फैक्ट्री को महारत हासिल है. हमारी कंपनी का टेंडर कभी कैंसल नहीं हुआ. कई विदेशी फर्में आयीं, पर हमारे उद्योग का मुकाबला नहीं कर सकीं.” यूनियन सचिव हिमांशु शिंदे ने कहा.
उसकी बात सुनकर सबके-सब पूरी मीटिंग में अब तक बिल्कुल चुपचाप रहे शिंदे की ओर देखने लगे. कुछ पल के लिए ऑफिस में एक अजीब सा सन्नाटा छा गया.
फिर सबसे पहले चव्हाण साहब बोले, “मग बाबा, तुम्ही आतापर्यंत गप्प का राहिलात, मला आधी का नाही सांगितलंत?” ("तो अब तक चुप क्यों रहा मेरे बाप, पहले क्यों नहीं बताया.") उन्हें मराठी में बोलते देख रामजी काका को हँसी आ गई. वे बोल पड़े, “तुम्ही अगदी बरोबर म्हणालात चव्हाण साहेब.” (“तुमने खूब कहा चव्हाण साहब.”)
इस बार चव्हाण साहब सहित सभी हँस पड़े. फिर चव्हाण साहब कहने लगे, “वाकई यह अत्यन्त गंभीर बात है, इसे तो मुकदमे के शुरुआत में बतानी चाहिए थी. यदि पता होता तो उनके गवाह से पूछते कि ‘क्या आप डिफेंस आर्म इंडस्ट्री के ऑर्डर्स पर आई.सी. बनाते हैं?’ उनके जवाब से यह तथ्य आसानी से स्थापित हो जाता. अब हमें खुद इस तथ्य को स्थापित करना पड़ेगा. उसके लिए कुछ दस्तावेज तलाशने पड़ेंगे. मौखिक बयान की अहमियत कम होती है.”
तभी प्रिया बोल पड़ी. “डिफेंस इंडस्ट्री को आई.सी. सप्लाई करना व्यवसाय में महत्वपूर्ण तथ्य है यह जरूर कंपनी के प्रोफाइल में दर्ज होगा. मैं अभी ढूंढ निकालती हूँ. पर मुझे आपके कंप्यूटर का हैंडल चाहिए.” तभी चव्हाण साहब का सहायक विनय बोल पड़ा, “इधर कंप्यूटर पर आ जाओ दीदी, कंप्यूटर चालू है और लॉग-इन भी कर रखा है.”
प्रिया उठकर दफ्तर के कोने में रखे डेस्कटॉप पर जाकर बैठी, उसने कंपनी की प्रोफाइल तलाश की जहाँ सब कुछ मिल गया. पास ही रखे कलर प्रिंटर से उसने तुरंत प्रोफाइल का प्रिंट निकाला और उसे किसी झंडे की तरह लहराते हुए वापस टेबल की ओर आई. “ये देखिए चव्हाण सर!”
“वाह, क्या कमाल का काम किया है प्रिया तुमने. पर इस का श्रेय हमें कॉमरेड शिंदे को देना पड़ेगा कि उन्हें देर से ही सही पर ठीक वक्त पर यह सब याद आ गया. अब हम साबित कर सकते हैं कि इंडस्ट्री के क्लोजर से डिफेंस इंडस्ट्री को भी फर्क पड़ेगा और फौज के लिए जरूरी हथियारों के निर्माण में देरी हो सकती है. यह हमारा सबसे मजबूत पक्ष होगा. 350 परिवारों का सड़क पर आना केवल उन मजदूरों की हार नहीं है, बल्कि यह उस पूरे इलाके की अर्थव्यवस्था, सामाजिक ढांचे और देश की सुरक्षा के लिए भी घातक है. यह 'Prejudicial to the public interest' है."
सबके बीच लंबी बहस के बाद तय हुआ कि यूनियन की साक्ष्य केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि 'टेक्निकल और डेटा-ड्रिवन' होगी. तय हुआ कि यूनियन की ओर से प्रशांत बाबू एक 'एक्सपर्ट विटनेस' (Expert Witness) के रूप में अपना विश्लेषण पेश करेंगे. दूसरे गवाह सचिव शिंदे होंगे. ये दोनों केवल अपनी बातें नहीं कहेंगे, बल्कि उन दस्तावेजों को साक्ष्य में लाएंगे जो साबित करेंगे कि प्रबंधन ने रिकॉर्ड्स के साथ छेड़छाड़ की है.
चव्हाण साहब ने फाइल बंद करते हुए कहा, "प्रबंधन ने अपना जाल बिछाया था, लेकिन अब हम उनके ही दस्तावेजों को उनके खिलाफ हथियार बनाएंगे. 30 अप्रैल को इजलास में हमारे गवाह 'सर्जिकल स्ट्राइक' के मोर्चे पर होंगे."
... क्रमशः