बुधवार, 1 अप्रैल 2026
काउंटर-इंटेलिजेंस
मंगलवार, 31 मार्च 2026
काली स्कॉर्पियो
सोमवार, 30 मार्च 2026
टीम खुशबू
देहरी के पार, कड़ी - 11
प्रशांत बाबू से बातचीत के बाद प्रिया के अशांत मन को बहुत राहत मिली. उसे जल्दी ही नींद आ गई. सुबह आँखें खुली, वह बिस्तर से नीचे भी न उतरी थी कि अलार्म बजने लगा. वह मन ही मन मुस्कुरा उठी कि आज उसके शरीर की घड़ी ठीक काम कर रही थी. थकान पूरी तरह गायब थी, मन का भारीपन भी जाता रहा था, जिससे वह पिछले कई दिनों से परेशान थी. उसने आईने में खुद को देखा—आज अक्स साफ़ था. प्रशांत बाबू ने सही कहा था, डर केवल एक पुरानी आवाज है जिसे हम अनजाने में अपना मान लेते हैं.
ऑफिस पहुँचते ही
प्रिया ने अपनी टीम की एक अनौपचारिक मीटिंग बुलाई. कॉन्फ्रेंस रूम का माहौल हमेशा
की तरह थोड़ा औपचारिक और थका हुआ था. प्रिया ने अपनी डायरी मेज पर रखी और
मुस्कुराते हुए शुरू किया.
"साथियों,
कल तक मैं आप पर एक 'डेडलाइन' का दबाव डाल रही थी, लेकिन कल शाम मुझे अहसास हुआ कि
मैं गलत थी. यह प्रोजेक्ट सिर्फ मेरी जिम्मेदारी नहीं है, यह
हम सबकी साझी विरासत है."
प्रिया ने महसूस
किया कि जैसे-जैसे वह उनके योगदान का उल्लेख करते हुए उनकी प्रशंसा कर रही थी,
कमरे की हवा बदल रही थी. लोगों के कंधों का तनाव कम हो रहा था और
उनकी आँखों में एक चमक लौट रही थी. उसने अंत में कहा, "मैं
यहाँ आपकी बॉस नहीं हूँ, आपकी साथी हूँ. मैं भी टीम का वैसा
ही हिस्सा हूँ जैसे आप सब हैं. बस कंपनी ने मुझे टीम की लीड बना दिया है. पर मेरी
भूमिका क्या है? हम सब मिलकर काम कर रहे हैं. सबका प्रोजेक्ट में समान योगदान है. मैं
एक माध्यम भर हूँ जिससे हमारी कंपनी का प्रबंधन और कंपनी का क्लाइंट हमारी टीम के
साथ कम्युनिकेट करते हैं. यह वैसे ही है जैसे किसी खास मैच के लिए टीम में से एक
खिलाड़ी को कप्तान बना दिया जाता है. हम सब ठान लें तो इस प्रोजेक्ट को समय से
पहले पूरा कर सकते हैं, और हम करेंगे. इसलिए नहीं कि हमें डर
है, बल्कि इसलिए क्योंकि यह हमारी सामूहिक काबिलीयत का सबूत
होगा."
प्रिया के इन चंद
वाक्यों ने सबके मन पर से प्रोजेक्ट का दबाव हटा दिया. सब खुश नजर आ रहे थे.
तभी राहुल ने कहा, “प्रिया,
हमें रोज सुबह एक मीटिंग करनी चाहिए, इससे हमें अपने लक्ष्य पर पहुँचने में बहुत
मदद मिलेगी.”
राहुल से ‘प्रिया’
संबोधन सुनकर एक क्षण के लिए वह चौंकी. राहुल हमेशा उसे मैम कहता था. आज उसने उसके
नाम से संबोधित किया. लेकिन अगले ही क्षण वह मुस्कुरा उठी. यह टीम में समानता की
भावना का आरंभ था. प्रिया ने कहा, “हाँ, हम रोज दिन के आरंभ में मीटिंग करेंगे और
उसके बाद कैंटीन चल कर एक साथ कॉफी पीकर ताजगी हासिल करेंगे और फिर काम में जुट
जाएंगे. अब हम कॉफी के लिए कैंटीन चल सकते हैं.”
आदित्य ने हलकी आवाज
में नारा लगाया, “हिप हिप हुर्रे.”
सबने उसका जवाब दिया,
प्रिया भी उनमें शामिल थी.
उस दिन उनकी टीम के काम
में एक जादुई ऊर्जा थी. लंच ब्रेक में भी उसका असर दिखा. टीम के सब लोग एक साथ
खाने बैठे. सबने एक दूसरे से खाना शेयर किया. खाते हुए भी वे चर्चा करते रहे. खाने
के बाद भी सुस्ती सिरे से गायब थी. शाम को प्रिया ने देखा कि जिस काम के लिए अनुमान
था कि वह तीन दिन का समय तो लेगा. लेकिन उसका आधे से अधिक शाम के पहले ही पूरा हो
चुका था. प्रशांत बाबू का 'टीम लीडर बनाम सुपरवाइजर' वाले सूत्र ने वाकई चमत्कार कर दिखाया था.
उधर कोटा की 'मोहन विला' में सन्नाटा था. पर यह एक बड़े बदलाव की
आहट थी. ब्रज मोहनजी की चुप्पी ने विक्रांत को और ज्यादा हिंसक बना दिया था. वह
सुबह-सुबह पहुँच गया और चिल्लाते हुए व्यापारिक साख की दुहाई देने लगा.
तभी मयंक कमरे में
दाखिल हुआ. उसके हाथ में कुछ दस्तावेज़ थे. "विक्रांत भाई, अब बहुत हुआ. ये उन व्यापारियों की लिस्ट है जिनसे आपने हमारे नाम पर झूठे
वादे किए थे. मैंने उनसे बात कर ली है. कोटा की मंडी अब आपकी धमकियों से नहीं
डरेगी."
विक्रांत गुस्से से
तमतमा उठा. उसने ब्रज मोहनजी की ओर देखा, पर उन्होंने अपनी
नज़रें फेर लीं. मयंक ने आगे बढ़कर कहा, "हम आपकी बातों
में नहीं आएंगे. हमने आपसे प्रिया के रिश्ते की बात करके ही गलती की थी. आप एक
जीती जागती इंसान को अपनी संपत्ति ही समझने लगे. मुम्बई पुलिस की एफआईआर आपके लिए
एक चेतावनी है कि सुधर जाओ."
अपनी जड़ें हिलते देख
विक्रांत वहाँ से पैर पटकता हुआ निकल गया. उसकी आँखों में खतरनाक चमक थी. उसे समझ
आ गया था कि कोटा की ज़मीन उसके पैरों के नीचे से खिसक चुकी है, अब उसे मुम्बई जाकर ही आखिरी दांव खेलना होगा.
रात नौ बजे विक्रांत
मुम्बई जाने वाली राजधानी एक्सप्रेस में था. उसने तय किया था कि अब वह मुम्बई का
कारोबार संभालेगा, और प्रिया को भी सबक
सिखाएगा.
शाम के आठ बजे प्रिया
ऑफिस से सीधे 'मेवाड़ भोजनालय' पहुँची.
रामजी काउंटर पर थे, प्रशांत बाबू अभी नहीं आए थे.
"काका, आज चमत्कार हो गया. टीम ने वह कर दिखाया जो नामुमकिन लग रहा था,"
प्रिया ने उत्साह से कहा.
रामजी ने मुस्कुराकर
उसे पानी दिया. "प्रशांत बाबू कहते हैं कि जब इंसान खुद को छोटा समझना बंद कर
देता है, तो पहाड़ भी हिला सकता है. आज उनकी एसोसिएशन की
मीटिंग है, वे देर से आएंगे."
प्रिया ने बाहर सड़क
की ओर देखा. भीड़ भाग रही थी. अब उसे कोई डर नहीं था. उसने महसूस किया कि उसका अक्स
अब आईने से बाहर आकर खुशबू हो रहा था.
... क्रमशः
रविवार, 29 मार्च 2026
जड़ों की समझ
शनिवार, 28 मार्च 2026
अक्स
देहरी के पार, कड़ी - 9
शुक्रवार, 27 मार्च 2026
संकल्प
देहरी के पार, कड़ी - 8
गुरुवार, 26 मार्च 2026
परछाइयाँ
देहरी के पार कड़ी - 7
फ्लैट में शिफ्ट होने के दिन प्रिया ने केवल चाय-कॉफी बनाने के लिए सामान लिया था. शनिवार सुबह चाय पीकर वह सामानों की लिस्ट बनाने बैठी, सुबह के नाश्ते के लिए उसने इडली-सांभर फ्लैट पर ही मंगा लिए. नाश्ता करके ग्यारह बजे सामान लेने निकली. सामान लेते-लेते उसे ढाई बाजार में ही बज गए. उसे वहाँ मेवाड़ वैष्णव भोजनालय दिखा. उसे भूख लगी थी, वह अंदर जा बैठी. लड़का पानी का जग और गिलास रखकर जाने लगा तो उसने पूछ लिया, “भोजनालय किसका है?”
मंगलवार, 24 मार्च 2026
कंक्रीट का जंगल
सोमवार, 23 मार्च 2026
नई सुबह
रविवार, 22 मार्च 2026
कवच
देहरी के पार कड़ी - 4:
उस डरावनी धमकी के बाद कोशिश करके भी प्रिया सो
नहीं सकी. उसकी रात करवटें बदलते ही गुजरी. तान्या के कमरे की खिड़की से उसे जयपुर
की सड़कें शांत नजर आ रही थीं, बस कभी कोई वाहन सड़क से गुजर
जाता. उसके मन में विक्रांत की वह आवाज़ गूंज रही थी— "पराई अमानत". वह
किसी की अमानत कैसे हो सकती थी? उसका स्वतंत्र अस्तित्व था. वह एक स्वतंत्र नागरिक
थी. लेकिन उसे लगा कि उसे अपनी स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए बहुत लड़ाइयाँ लड़नी
पड़ेंगी. घर से निकल लेना तो केवल आग़ाज था. सुबह जैसे ही उसे लगा कि आकाश की माँ विमलाजी
जाग गयी हैं, वह भी उठ बैठी. वे रसोई में थीं और अपने लिए चाय गैस पर चढ़ा चुकी
थीं. प्रिया को देख पूछा, “तुम्हारे लिए भी बना लूँ चाय?”
प्रिया ने ‘हाँ’ कह दी और डाइनिंग की कुर्सी
खिसका कर वहीं विमलाजी के पास बैठ गयी.
चाय पीकर लौटी तब तक तान्या जागी नहीं थी.
प्रिया बाथरूम में घुस गयी. वह स्नान करके लौटी तब तान्या कमरे में नहीं थी. वह
सुबह 8:00 बजे वह तैयार होकर निपटी. तभी तान्या आ पहुँची.
“दीदी नाश्ता तैयार है आकाश और पापा डाइनिंग में
आपका इन्तजार कर रहे हैं. मैं बस फ्रेश हो कर पाँच मिनट में मैं भी आती हूँ, आप चलिए.”
वह डाइनिंग में पहुँची तो आकाश और के पापा,
सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी, प्रकाश मल्होत्रा बैठे नाश्ता कर रहे थे.
मल्होत्राजी ने प्रिया को भी बैठने को कहा. विमलाजी उसके लिए नाश्ता रख गईं.
"देखो बच्चों, कानून
डरपोक के लिए नहीं, जागरूक नागरिक के लिए बना है,"मल्होत्राजी ने गंभीर स्वर में कहा. "विक्रांत ने जो 'अमानत' शब्द इस्तेमाल किया है, वह उसकी कुंठित मानसिकता है. हम सबसे पहले 'पुलिस थाना'
में एक इन्फोर्मेटिव रिपोर्ट (Informative Report)
दर्ज करवाएंगे. इसमें हम साफ़ लिखेंगे कि प्रिया बालिग है, अपनी मर्ज़ी से यहाँ रह रही है और उसे एक अज्ञात नंबर से जान का खतरा है.
इससे यह होगा कि हमें फोन करते ही तुरन्त मदद मिल सकेगी."
प्रिया को पहली बार महसूस हुआ कि सुरक्षा केवल
बंद दरवाजों में नहीं, बल्कि सही कानूनी प्रक्रिया में है. वह
आकाश और उसके पापा तुरन्त पुलिस स्टेशन गए. दस बजने के पहले रिपोर्ट की एक कॉपी
उनके हाथ में थी.
लौटते ही प्रिया ने सबसे पहले अपने मैनेजर और एचआर (HR)
हेड को एक 'अर्जेंट मीटिंग' के लिए मैसेज किया. आकाश भी पास ही बैठा था. कुछ देर बाद हुई वीडियो कान्फेंस पर प्रिया ने अपनी
स्थिति साफ़ कर दी:
"सर, मेरे मंगेतर ने
मेरे सहकर्मी को फोन पर धमकी दी है. मुझे लगता है कि मेरी जान और प्राइवेसी खतरे
में है. मुझे तुरंत मुम्बई ऑफिस शिफ्ट होने की अनुमति चाहिए और मेरा बेस लोकेशन
कोटा से मुम्बई बदल दिया जाए."
मैनेजर ने उसकी हिम्मत की दाद दी और तुरंत आईटी
(IT) टीम को निर्देश दिए कि प्रिया के क्रेडेंशियल्स को 'हाई-सिक्योरिटी' पर रखा जाए ताकि कोई बाहरी व्यक्ति
उसे ट्रेस न कर सके.
दोपहर के ठीक तीन बजे थे. प्रिया और तान्या ऊपर
वाले कमरे की धूल झाड़ रही थीं, जिसे प्रिया का नया 'होम ऑफिस' बनना था. तभी अचानक बाहर एक भारी एसयूवी (SUV)
के टायर चरचराए. प्रिया ने खिड़की से नीचे झांका और उसका खून जम गया.
नीचे विक्रांत खड़ा था, उसके साथ दो और गठीले बदन के युवक थे.
"आकाश! बाहर निकल!" विक्रांत का गला
फटने को था. "मेरी अमानत को लेकर तू बहुत बड़ा सूरमा बन रहा है? इज़्ज़त से उसे बाहर भेज दे, वरना तेरा ये छोटा सा घर
और तेरी सरकारी नौकरी... दोनों मिट्टी में मिला दूंगा."
विक्रांत को वहाँ देख उसके शरीर में सिहरन दौड़
गयी. उसने दो मिनट बैठ कर अपने आपको शान्त किया और नीचे की ओर चल दी.
मल्होत्राजी ने आकाश को कहा कि वह थाने को फोन
करे. फिर शांत भाव से कुर्ता पहना और बिना किसी घबराहट के गेट की ओर बढ़े. आकाश ने थाने फोन किया, "सर, वे आ गए हैं. सिद्धार्थ नगर, मकान नंबर 42." फोन जेब में डालकर वह भी अपने
पिता के पीछे चल दिया.
मल्होत्राजी ने गेट की जाली के पीछे से ही कहा,
"बेटा विक्रांत, यह घर है, कोई मंडी नहीं जहाँ तुम 'अमानत' लेने आए हो. यहाँ स्वतंत्र नागरिक हैं. तुम मर्यादा लांघ रहे हो, बेहतर होगा यहाँ से चले जाओ."
विक्रांत ने गेट पर जोर से लात मारी,
"बुड्ढे, ज्ञान मत दे! वो मेरी होने वाली
पत्नी है. मेरा उस पर कानूनी और सामाजिक हक है." उसके साथी डराने के लिए अपनी
जेबों में हाथ डालकर आगे बढ़े, जैसे कोई हथियार छिपा हो.
तभी दूर से सायरन की आवाज़ गूँजी. विक्रांत के
चेहरे का रंग यकायक उड़ गया. अगले ही पल पुलिस की एक जीप तेज़ी से मुड़कर उनके ठीक
सामने रुकी. जीप से एक इंस्पेक्टर और चार हट्टे-कट्टे कांस्टेबल उतरे.
"क्या तमाशा है यह?" इंस्पेक्टर ने अपनी बेल्ट ठीक करते हुए कड़क आवाज़ में पूछा.
विक्रांत की अकड़ धुआं हो गई. वह हकलाने लगा,
"सर... वो... पारिवारिक मामला है. मेरी मंगेतर यहाँ छिपी है."
"मंगेतर? बालिग लड़की
को तुम 'अमानत' बोलकर डराओगे?"
इंस्पेक्टर ने आगे बढ़कर विक्रांत की कलाई पकड़ ली. . "सुबह ही रिपोर्ट दर्ज हुई है तुम्हारी
धमकी की. चलो, अब थाने में बैठकर विस्तार से बताना कि 'अमानत' की परिभाषा क्या है."
इंस्पेक्टर ने एक कांस्टेबल को निर्देश दिया कि
वह विक्रांत की गाड़ी खुद ड्राइव करके थाने ले आए. विक्रांत और उसके साथियों को
अपराधियों की तरह जीप में बिठाया गया. जिस गली में वे शोर मचा रहे थे, अब वहाँ सन्नाटा था, पर यह सन्नाटा खौफ का नहीं,
सुकून का था.
प्रिया ड्राइंगरूम की खिड़की से यह सब देख रही थी.
उसकी आँखें नम हो गईं. उसने अपने रूमाल से उन्हें पोंछा और बाहर बरामदे में आ
गई. आकाश के पिता ने प्रिया को देखा और धीरे से मुस्कुराए. प्रिया ने समझ लिया था
कि अब वह अकेली नहीं है. अंदर कमरे में पहुँच कर उसने अपना लैपटॉप खोला और मुम्बई
ऑफिस के मैनेजर को मेल किया— "मैं कल सुबह से ही
काम पर हूँ. और हाँ, मेरा मुम्बई शिफ्टिंग का प्रोसेस शुरू
कर दीजिए."
... क्रमशः
शनिवार, 21 मार्च 2026
आश्रय
शुक्रवार, 20 मार्च 2026
पहचान
गुरुवार, 19 मार्च 2026
देहरी के पार
बुधवार, 18 मार्च 2026
बंकर महाराज
भीड़ में से एक युवक खड़ा हुआ. उसके चेहरे पर डर नहीं, एक शांत दृढ़ता थी. "पर महाराज, यह तो कोयला ही है. आप इजाजत दें तो हम इसे जला कर सिद्ध कर देंगे कि यह कोयला है, हीरा नहीं..."