देहरी के पार, कड़ी - 45
ईसीआई यूनियन सचिव शिंदे और कुलकर्णी जी दादर ऑफिस पहुँगे. वहाँ कुछ पोस्टर और एक पर्चा डिज़ाइन किए हुए मौजूद थे. वे दोनों पोस्टर देखने लगे.
पोस्टरों की टैगलाइन थी, “कारखाना बंदी मंजूर नहीं”. पर्चे की हेड लाइन थी, “कारखाना बंदी को मंजूर करने वाले मंत्री, विधायक, सरकार को जनता नहीं बख्शेगी.” कुलकर्णी जी ने पोस्टर की एक डिजाइन चुनी और पर्चे को ओ. के. कर दिया. ऑफिस सेक्रेटरी को बुलाकर कहा, “ये डिजाइन लातूर यूनियन दफ्तर को व्हाट्सएप कर दो. सौ पोस्टर और ढाई हजार पर्चे छपवाएंगे. पोस्टर आज शाम ही निलंगा शहर में चिपकाए जाएंगे और पर्चे भी रात दस बजे तक सारे बँट जाएँ. पोस्टर और पर्चे बाँटने की खबर लातूर के सभी अखबारों में छपवाने का इंतजाम भी करेंगे. मेरी लातूर और निलंगा दोनों जगह बात हो चुकी है.”
इसके बाद कुलकर्णी जी ने शिंदे को कहा. “आपकी ड्यूटी है कि आप पोस्टर और पर्चे का डिजाइन लातूर पहुँच जाने के बाद लातूर के जिला सेक्रेट्री और निलंगा यूनियन के सेक्रेटरी से संपर्क में रहेंगे, दोनों के नंबर मैं आपको व्हाट्सएप कर रहा हूँ . जब पोस्टर लग जाने और पर्चे बँटने की खबर आपको मिल जाए, तब आप मुझे बताएंगे. आप लातूर में भी पूछेंगे कि खबर छपने की व्यवस्था की गई कि नहीं.”
आठ मई की सुबह साढ़े दस बजे ही शहर गर्मी से तपने लगा था. लेकिन सचिवालय में श्रम मंत्री का विशाल चैम्बर वातानुकूलित होने पर भी बाहर से ज्यादा गर्म था. विधायक महेश फड़के ने कल ही अपनी शिवसेना वाली आक्रामकता दिखाते हुए कुलकर्णी और पाँच मजदूरों के साथ 11 बजे मिलने का समय ले लिया था. लेकिन सुबह जो खबर उन्हें निलंगा से मिली, उसने उन्हें परेशान कर दिया था. ईसीआई के बंदीकरण के मामले में वहाँ पोस्टर लगे थे और पर्चे बँटे थे और सुबह मजदूरों के बीच यह चर्चा का विषय बन गया था.
मंत्री ने लेबर सेक्रेटरी को बुला रखा था. वह जैसे ही चैम्बर पहुँचा. मंत्री ने ऊँची आवाज में पूछा, “ये क्या चल रहा है? मेरे कहे बिना ईसीआई की फाइल लॉ सेक्रेटरी के पास कैसे पहुँची?”
“वो ... सर आप दौरे पर थे, इसलिए मैंने सोचा जब तक आप लौटें वहाँ से लीगल ओपिनियन ले ली जाए. समय बचेगा.” सेक्रेटरी ने दबे स्वर में कहा.
“मुझसे फोन पर पूछ सकते थे.”
“सर, गलती हो गई. आईंदा ध्यान रखेंगे.”
“अभी मेरा बाप, एमएलए फड़के आने वाला है, उसके साथ कामरेड कुलकर्णी भी होगा और पाँच मजदूर भी होंगे. उनको क्या जवाब दूंगा?”
उनकी बात चल ही रही थी कि बाहर से जमादार पर्ची लेकर आ गया कि फड़के और कुलकर्णी मजदूरों के साथ हाजिर हैं.
“कहाँ बिठाया उनको?”
“विजिटर्स हॉल में बिठा दिया है.”
“जाकर बोलो मंत्री जी इधर ही आ रहे हैं.”
उधर सेक्रेट्रिएट इंटेलिजेंस का सीनियर इंस्पेक्टर भोंसले चीफ मिनिस्टर के चैम्बर में रिपोर्ट कर रहा था, “ईसीआई के मामले में शिवसेना एमएलए, लेबर लीडर कुलकर्णी और पाँच कार्यकर्ताओं के साथ लेबर मिनिस्टर से मिलने पहुँचा है, उधर निलंगा में पोस्टर चिपकने, पर्चा बँटने और अखबार में उसकी खबर छपने से मिनिस्टर का पारा आसमान पर है, वह पगलाया हुआ है.”
लेबर मिनिस्टर अपने चैंबर से विजिटिंग हॉल के लिए निकलने वाला था कि तभी उसके पीए के फोन की घंटी बजी. उसका चेहरा सफेद पड़ गया. उसने हड़बड़ाते हुए कहा, "सर, सीएमओ (मुख्यमंत्री कार्यालय) से फोन है. ईसीआई की फाइल अभी के अभी छठे माले पर मंगाई है."
“भेजो अभी के अभी भेजो, मैं फड़के से मिलकर लौटूँ उसके पहले भेज दो. बला टले.”
मिनिस्टर फड़के, कुलकर्णी और मजदूर कार्यकर्ताओं से मिला. उनको बोला, “फैक्ट्री बंद होने की परमिशन हरगिज नहीं मिलेगी और कम्युनिकेशन भी 11 मई के पहले हो जाएगा.
दो बजे प्रिया की घड़ी ने वाइब्रेट किया तो वह कंप्यूटर को स्लीप मोड में छोड़कर लंच के लिए उठ गई. लंच रूम में आकर टिफिन खोलने के पहले उसने मोबाइल पर ईएसआई की फाइल की स्टेटस चैक की, उसकी धड़कनें तेज हो गईं. फाइल लेबर सेक्रेटरी से सीधे सीएमओ पहुँच चुकी थी. उसने तुरंत मैसेज टाइप किया: "फाइल श्रम मंत्रालय से सीधे 'CMO' शिफ्ट हो गई है. कुछ बहुत बड़ा होने वाला है."
प्रशांत बाबू को जब यह मैसेज मिला, तो उन्होंने कुलकर्णी जी की ओर देखा. राजनैतिक शतरंज की बिसात पर अब सबसे बड़ा 'वजीर' मैदान में उतर चुका था.
ईसीआई का एमडी, जो अब तक लेबर मिनिस्टर और इंडस्ट्री मिनिस्टर को अपनी उंगलियों पर नचा रहा था, उसे आनन-फानन में मुख्यमंत्री के केबिन में बुलाया गया. वह सूट-बूट में पूरी तैयारी के साथ आया था कि घाटे के आँकड़े पेश करेगा, लेकिन सामने मुख्यमंत्री का शांत पर बेहद सख्त चेहरा देखकर उसकी सारी दलीलें गले में ही अटक गईं.
मुख्यमंत्री ने फाइल को मेज पर सरकाते हुए एमडी की आँखों में देखा. "मिस्टर एमडी, आप पिछले एक महीने से लेबर मिनिस्टर, इंडस्ट्री मिनिस्टर और विधायक को साधने की कोशिश कर रहे थे. आपने सोचा कि सबको 'मैनेज' कर लिया तो रास्ता साफ है? शायद आपने यह भुला दिया कि इस राज्य का नेतृत्व मैं कर रहा हूँ."
एमडी ने कुछ कहना चाहा, पर मुख्यमंत्री ने हाथ के इशारे से उसे चुप करा दिया. "मुझे आपके घाटे की बैलेंस शीट में कोई दिलचस्पी नहीं है. मेरी दिलचस्पी अक्टूबर में होने वाले चुनावों में है. अगर ये 350 मजदूर बेरोजगार हुए, तो अंधेरी पूर्व से लेकर आपके इंडस्ट्रियल बेल्ट तक जो आग लगेगी, उसे बुझाने की ताकत आपमें नहीं है."
मुख्यमंत्री की आवाज़ अब और ठंडी और मारक हो गई. "मैनेजमेंट को तरजीह चाहिए थी, वह मैंने दे दी—सीधे आपको यहाँ बुलाकर. अब फैसला आपका है. या तो यूनियन के साथ बैठकर समझौता कीजिए और दीवाली तक कारखाना चालू रखिए, वरना मैं अभी इसी वक्त इस एप्लिकेशन को रिजेक्ट करने का आदेश दे रहा हूँ. आज ही आपको कम्युनिकेशन मिल जाएगा. और याद रखिए, एक बार रिजेक्ट हुआ तो अगली एप्लिकेशन के लिए पूरे एक साल का इंतजार करना होगा. एक साल का करोड़ों का मुनाफा छोड़ने के लिए तैयार हैं?"
एमडी के माथे पर पसीना चमकने लगा. उसका सारा अहंकार भाप बनकर उड़ रहा था.
मुख्यमंत्री ने फाइल को परे धकेलते हुए ठंडे स्वर में कहा, "मिस्टर एमडी, आप अब तक अपनी रसूख के जोर पर सिस्टम को हांक रहे थे, लेकिन आप भूल गए कि जब सत्ता का ‘चाबुक’ चलता है, तो बड़े-बड़े मैनेजमेंट के आंकड़े धुल जाते हैं. समझदार हो तो आज ही विद्ड्रॉल की एप्लिकेशन दो. आधे घंटे का समय है—फैसला आपका है. सोच लो और मुझे बताओ," मुख्यमंत्री ने अपनी कलम उठाई और दूसरी फाइल की ओर देखने लगे. एमडी के लिए यह इशारा था कि उसे फौरन उठकर बाहर जाना है.
एमडी केबिन से बाहर निकला. उसके चेहरे पर वह चमक नहीं थी जो चार दिन पहले थी. बाहर वकील भट्ट उसका इंतजार कर रहा था. “मिस्टर भट्ट, बीस मिनट में क्लोजर एप्लीकेशन विद्ड्रॉल की एप्लीकेशन तैयार करके लेबर सेक्रेटरी को देनी है. भट्ट फौरन लेबर सेक्रेटरी के पीए के दफ्तर में घुसा. वहाँ क्लर्क को पटाया और दो लाइन की एप्लीकेशन टाइप करवा लाया. एमडी से हस्ताक्षर करवाकर एप्लीकेशन सीधे लेबर सेक्रेटरी को जाकर थमा दी.
लेबर सेक्रेटरी एमडी को आश्चर्य से देखने लगा. उसने एप्लीकेशन ले ली और बोला, “एमडी साहब साथ हैं, उन्हें लेकर यहाँ मेरे चैम्बर में बैठो मैं बीस मिनट में लौटता हूँ.
प्रिया अपने कंप्यूटर पर काम कर रही थी कि उसकी घड़ी वाइब्रेट हुई. शाम के छह बजे थे. उसने मोबाइल उठाया और ईसीआई की क्लोजर एप्लीकेशन की स्टेटस देखने लगी, अपडेट था— 'एप्लिकेशन विद्ड्रॉन बाई एप्लीकेंट'.
उसकी आँखों में आँसू आ गए. उसने कांपते हाथों से कुलकर्णी जी को फोन किया. "सर... फाइल क्लोज हो गई. उन्होंने विद्ड्रॉ कर लिया!"
कुलकर्णी जी ने लंबी सांस ली और मुस्कुराए. "अभी आधी जंग जीती है प्रिया. असली जंग कल सुबह शुरू होगी.”
... क्रमशः
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