देहरी के पार, कड़ी - 44
सोमवार सुबह प्रिया समय पर अपने ऑफिस पहुँच गई. अपनी सीट पर पहुँचकर उसने लॉग इन किया. कुछ देर में टीम मीटिंग शुरू हुई और पाँच मिनट में खत्म हो गई. अब सभी को आज के अपने टास्क पता थे. वे काम पर जुट गए. कंप्यूटर स्क्रीन पर कोड्स की लाइनें दौड़ने लगीं. प्रिया का सारा ध्यान अपने काम पर था. दिमाग में कोई और चीज थी भी कहीं दूसरी तह में लॉक हो चुकी थी. तभी कलाई घड़ी ने वाइब्रेट किया. उसने देखा तो ठीक 12 बजे थे. यह अलार्म खुद उसी ने सेट कर रखे थे. जो सुबह सात बजे से आरंभ होकर रात ग्यारह तक हर घंटे वाइब्रेट करते थे. उसे कुर्सी पर बैठकर कंप्यूटर पर अपनी आँखें गड़ाए रखते हुए लगातार काम करना पड़ता था. जिसमें यह जरूरी था कि हर घंटे अपनी सीट से उठकर टहल ले. इससे शरीर की अकड़न दूर होती थी, आँखों को आराम मिलता था. वह दो घूँट पानी पीती थी. किसी साथी से बतियाती थी या मशीन पर जाकर अपने लिए कॉफी बना लाती थी और उसे पीते हुए कोई गीत गुनगुनाने लगती थी.
वह सीट से उठी, कूलर पर जाकर दो घूँट पानी पिया और अपने लिए एक कॉफी बनाकर वापस सीट पर पहुँचकर कॉफी की एक सिप ली. उसका ध्यान ईसीआई क्लोजर पर गया. उसने अपने मोबाइल से ट्रैक किया. फाइल अभी भी लॉ सेक्रेटरी के यहाँ थी, यह विभाग खुद मुख्यमंत्री देखते थे. उसने मैसेज टाइप किया: "फाइल अभी भी लॉ सेक्रेटरी के पास है." मैसेज पहले प्रशांत बाबू और उनके जरीए कुलकर्णी जी तक पहुँचा. उन्होंने फोन पर सीधे लॉ सेक्रेटरी से बात की. उसे समझाया कि फाइल को तुरंत क्लियर होना है. आज यह फाइल वापस श्रम मंत्रालय नहीं पहुँची तो फैक्ट्री की सारी लेबर कल सुबह मुख्यमंत्री के बंगले पर होगी. यह भी ध्यान रखना कि अक्टूबर में विधानसभा के चुनाव होने हैं. दो बजे प्रिया ने ट्रैक किया तो पता लगा कि फाइल श्रम मंत्रालय वापस जा चुकी है. कुलकर्णी जी को खबर मिली तो उन्होंने संतोष की साँस ली. अब उन्हें श्रम मंत्रालय से ही निपटना था. श्रम मंत्रालय में उन्होंने सीधे एएसएल से बात की जिसने प्रबंधक के क्लोजर एप्लीकेशन की सुनवाई की थी. उसने बताया कि वह अब इस मामले में कुछ नहीं कर सकता. अब फाइल उनके पास नहीं आनी थी. वे केवल फाइल के मूवमेंट को बता सकते हैं.
श्रम मंत्री लातूर जिले के निलंगा विधानसभा क्षेत्र से आता था और भाजपा विधायक था. यह क्षेत्र मुख्यतः कृषि पर निर्भर था. कुछ चीनी मिलें थीं और अधिकांश किसान गन्ना उगाते थे. वहाँ खेत मजदूर यूनियन का व्यापक प्रभाव था. वहाँ की दो चीनी मिलों में उनके फेडरेशन से संबद्ध यूनियनें थीं. उनका चीनी मिलों के मजदूरों की दूसरी यूनियनों के साथ मोर्चा बना हुआ था. कुलकर्णी जी जानते थे कि जरूरत पड़ने पर वहाँ से दबाव बनाया जा सकता है. लेकिन उसके पहले वे अंधेरी पूर्व के विधायक से बात करना चाहते थे. वह शिवसेना से था. उन्हें पता था कि भाजपा और शिवसेना के गठबंधन के बावजूद, चुनावी जमीन पर दोनों अपनी साख बचाने की होड़ में रहते हैं.
यूनियन के अध्यक्ष-सचिव और कारखाने के पाँच मजदूरों के साथ कुलकर्णी जी सात मई सुबह साढ़े आठ बजे ही अंधेरी पूर्व के विधायक महेश फड़के के निवास पर थे. पीए ने उन्हें बैठक में बैठाया. कुछ देर में विधायक बैठक में आ गए.
कुलकर्णी जी नमस्कार, कैसे आना हुआ?
“नमस्कार, विधायक साहब, बस ईसीआई का मामला है" कुलकर्णी जी ने मेज पर ईसीआई के मजदूरों की सूची रख दी, "इन साढ़े तीन सौ परिवारों में से ढाई सौ आपके विधानसभा क्षेत्र के वोटर हैं. अक्टूबर में चुनाव हैं. मालिक कारखाना बंद करना चाहते हैं. फाइल भाजपा के श्रम मंत्री की टेबल पर है. उसके एक दस्तखत से ये लोग सड़क पर आ गए, तो अंधेरी पूर्व की जनता यह नहीं पूछेगी कि गलती किसकी थी. वे बस यह देखेंगे कि उनकी अपनी पार्टी (शिवसेना) उन्हें बचा नहीं पाई." कुलकर्णी जी के टोन में चेतावनी थी.
“हाँ, मुझे याद है, कंपनी का एमडी आया था चार दिन पहले. लेबर मिनिस्टर को सिफारिश कराने के लिए कि मैं मिनिस्टर को कह दूँ कि कारखाना बंद होने से चुनाव पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा. चुनाव में बड़ा चंदा देने की बात भी कर रहा था. मैंने फटकार दिया उसको. ‘मेरे यहाँ बेरोजगारी फैलेगी, बदनामी मेरी और शिवसेना की होगी, फर्क तो पड़ेगा. मैं श्रम मंत्री को बंदी की परमिशन देने नहीं दूंगा.’ बहुत चिरौरी करता रहा. पर मैंने उसे विदा कर दिया, जाते-जाते बोलता था, फिर आएगा. पर कुलकर्णी जी आप चिन्ता ना करो. मैं अपने इलाके का मजदूर बेरोजगार नहीं होने दूंगा.” विधायक ने अपने अंदाज़ में कहा.
“फाइल लेबर सैक्रेटरी के पास है. लेबर मिनिस्टर मुंबई में नहीं है, कल लौटेगा. वह कहीं और बिज़ी हो जाएगा. लेकिन ग्यारह मई के पहले क्लोजर एप्लीकेशन निरस्त होने के आदेश पर साइन हो जाने चाहिए, वरना वक्त पर सूचना मैनेजमेंट को न मिलेगी और डीम्ड परमिशन हो जाएगी. मजदूर बेरोजगार हो जाएंगे. आप और हम कुछ नहीं कर पाएंगे. बेरोजगार मजदूर क्या करता है, आपको पता है.”
“कुलकर्णी जी आप फिकर मत करो. कल आठ तारीख है. आप दस बजे इधर आ जाओ. अकेले नहीं, यूनियन के अध्यक्ष-मंत्री और दो-चार मजदूर भी होने चाहिए. आपके साथ चलूंगा लेबर मिनिस्टर के उधर. मेरी नहीं सुनी, वहाँ से सीधे मातोश्री चलेंगे. लेबर मिनिस्टर को क्लोजर एप्लीकेशन खारिज करके ऑर्डर 10 तारीख को भेजना ही पड़ेगा. अब तीन दिन मेरा-आपका यही काम है.”
विधायक निवास से बाहर आए तो यूनियन के अध्यक्ष-मंत्री और मजदूर खुश थे. कुलकर्णी जी ने कहा “अभी खुश होने की जरूरत नहीं है. शिंदे साहब आप मेरे साथ यूनियन ऑफिस दादर चल रहे हैं. हम वहाँ चलकर श्रम मंत्री के इलाके से ही उसे संदेश देने का काम करेंगे.”
... क्रमशः
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