@import url('https://fonts.googleapis.com/css2?family=Yatra+Oney=swap'); अनवरत: तैयारी

रविवार, 5 अप्रैल 2026

तैयारी

देहरी के पार, कड़ी - 17
'इलेक्ट्रो-सर्किट इंडिया' के प्रबंधक को अंतिम सूचना दे दी गई थी कि उनकी मांगें नहीं माने जाने पर सोमवार से फैक्ट्री के सभी मजदूर हड़ताल पर चले जाएंगे. इस बीच राहुल ने प्रिया को बताया कि फैक्ट्री प्रबंधन के पास सभी मजदूरों के व्हाट्सएप नंबर हैं, वह संदेशों के माध्यम से मिथ्या सूचनाएँ प्रसारित करके मजदूरों में भ्रम उत्पन्न कर सकता है. हम ऐसी सूचनाओं के फैक्ट-चेक करके मजदूरों को सावधान कर सकते हैं. किन्तु इसके लिए हमें सभी मजदूरों के नंबर और यूनियन के किसी ऑफिसर का फोन नंबर चाहिए जिससे मजदूरों को यह संदेश भेजा जा सके.

शनिवार को प्रिया, राहुल, स्नेहा और आदित्य एक साथ एसोसिएशन के ऑफिस पहुँचे. उन्होंने यह बात प्रशांत बाबू को बताई. उन्होंने बताया कि, “कारखाने के सभी मजदूरों का व्हाट्सएप ग्रुप बना हुआ है. उसमें यूनियन के सभी पदाधिकारी जुड़े हुए हैं.”

प्रिया ने कहा, “अब काम आसान है. यूनियन के सभी पदाधिकारी संदिग्ध संदेश प्राप्त होते ही मेरे नंबर पर फॉरवर्ड करेंगे. हम उसका फैक्ट चेक करके संदेश यूनियन के अध्यक्ष के नंबर से सभी मजदूरों के व्हाट्सएप नंबर पर भेज देंगे. हम इस संदेश को ‘पर्दाफाश’ शीर्षक देंगे और हर संदेश को एक क्रमांक देंगे. जैसे ‘पर्दाफाश- नं.1’.

प्रशांत बाबू ने इस काम के लिए यूनियन ऑफिस में एक कमरा उन्हें देने का प्रस्ताव दिया. किन्तु प्रिया ने इसके लिए मना कर दिया. उसने कहा कि हम यह काम कहीं से भी कर लेंगे, जिससे किसी को कुछ पता नहीं लगेगा. इस तरह से 'IIDEA' के ये नए चार सदस्य मिलकर एक ‘अदृश्य कमांड सेंटर’ बन गए थे. जिन्हें हड़ताल के लिए एक डिजिटल ढ़ाल का काम करना था. हालाँकि इन चारों की एसोसिएशन सदस्यता गोपनीय रखी गई थी.

रविवार सुबह से ही 'इलेक्ट्रो-सर्किट इंडिया' के मज़दूरों के व्हाट्सएप में हलचल बढ़ गई. मजदूरों के व्हाट्सएप में अनजान नंबरों से संदेश तैरने लगे— "पंजाब में नई फैक्ट्री का काम शुरू हो गया है, मुंबई की मशीनें रविवार रात तक ट्रक में लद जाएंगी.

प्रिया ने अपने लैपटॉप पर इन संदेशों का 'मेटा-डेटा' और पैटर्न चेक किया. उसने पाया कि सभी मैसेज एक ही 'बल्क मैसेजिंग सॉफ्टवेयर' से भेजे जा रहे थे. उसने तुरंत प्रशांत बाबू को सूचित किया. प्रशांत बाबू ने मुस्कुराते हुए कहा, "प्रबंधक डरा हुआ है, प्रिया. जब तर्क खत्म होते हैं, तो वे अफ़वाहों का सहारा लेते हैं." प्रिया की टीम ने तुरंत उन संदेशों का खंडन करने वाला सटीक 'फैक्ट-चेक' मैसेज ‘पर्दाफाश-1’ तैयार किया, जिसे यूनियन के अध्यक्ष और सचिव ने सभी मज़दूरों तक पहुँचाया.

रविवार की दोपहर तक खबर आई कि कारखाने के कुछ 'जॉबर्स' वरिष्ठ मज़दूरों के घर जाकर उन्हें 'पर्सनल प्रमोशन' और पंजाब वाले प्लांट में ऊँचे ओहदे का लालच दे रहे हैं. मालिक की कोशिश थी कि सोमवार की सुबह गेट पर भीड़ कम रहे.

राहुल और स्नेहा ने पिछले तीन सालों के 'प्रोडक्टिविटी डेटा' और 'वेतन वृद्धि' के पुराने रिकॉर्ड्स का विश्लेषण किया. उन्होंने दिखाया कि कैसे ये वही पुराने मज़दूर हैं जिनका वेतन दस साल से 'एम्पलॉइज शॉप' के नाम पर स्थिर रखा गया था. इस डेटा को एक सरल ग्राफ में बदलकर जब मज़दूरों को दिखाया कि उनका वेतन वर्तमान में मिल रहे वेतन से चार गुना से कुछ अधिक होना चाहिए था, तो उनका संकल्प और मजबूत हो गया. "दस साल की गुलामी का इनाम अब केवल एक खोखला वादा है," यह बात मज़दूरों के बीच बिजली की तरह फैल गई.

आदित्य ने मज़दूरों के लिए एक 'इमरजेंसी अलर्ट' सिस्टम बनाया. इसे 'आईडिया न्यूज़ अपडेट' नाम दिया गया. इसका उद्देश्य था कि अगर सोमवार सुबह गेट पर पुलिस या बाउंसरों का हस्तक्षेप हो, तो पलक झपकते ही सभी मज़दूरों और यूनियन के नेताओं तक लोकेशन के साथ जानकारी पहुँच जाए. इस तरह 'अकाट्य एकता' को अपना 'डिजिटल सुरक्षा कवच' मिला.

रविवार शाम, यूनियन ऑफिस के नजदीकी पार्क में मजदूरों की आम सभा हुई. इस सभा में कारखाने के मजदूरों की संख्या साढ़े तीन सौ के करीब थी, जो कारखाने के मजदूरों की संख्या के नब्बे प्रतिशत थे. सभी ने मांगें मंजूर होने तक हड़ताल में बने रहने के साथ इस बात का भी संकल्प लिया कि इस बार मालिक फेयर वेजेज देने को तैयार नहीं होता है तो वे इस कारखाने में काम पर नहीं जाएंगे चाहे कारखाना बंद क्यों न हो जाए. मजदूरों के पूरे जोश के साथ मीटिंग खत्म हुई. ‘मजदूर एकता ज़िंदाबाद’, ‘हर जोर जुल्म की टक्कर में हड़ताल हमारा नारा है’ और ‘इंकलाब ज़िंदाबाद’ के नारों से सारा इलाका गूंज उठा. सभा आरंभ होने से समाप्त होने और मजदूरों के चले जाने तक एक सब इंस्पेक्टर के साथ लगभग बीस पुलिस वाले पार्क के पास तैनात रहे.

सभा के बाद यूनियन ऑफिस के भीतरी कमरे में प्रशांत बाबू, सीनियर वकील, यूनियन अध्यक्ष-सचिव और प्रिया की टीम के बीच एक गुप्त मीटिंग हुई. सोमवार सुबह 6 बजे की पहली शिफ्ट से हड़ताल शुरू होनी थी.

प्रशांत बाबू ने अपनी घड़ी देखते हुए कहा, "कल सुबह जब सूरज निकलेगा, तो गेट पर केवल मज़दूर आत्म-सम्मान के साथ खड़े होंगे. हमें हड़ताल को अहिंसक बनाए रखना है, इसका ध्यान यूनियन के पदाधिकारियों को रखना है. अफवाहों का खंडन करने के लिए समय-समय पर ‘पर्दाफाश’ संदेश और हर आधा घंटे में 'आईडिया न्यूज़ अपडेट' व्हाट्सएप पर आते रहेंगे. प्रबंधन मजदूरों को उकसाने के लिए गुंडों या बाउंसरों का इस्तेमाल कर सकता है, लेकिन हमें पूरा ध्यान रखना होगा कि हम उत्तेजित न हों. यदि मजदूरों को हिंसा के लिए उकसाने की कोई कार्यवाही हो तो हम उससे तुरन्त निपटेंगे और अपनी ओर से हिंसा न करेंगे. हमारे मजदूरों को हर हाल में हिंसा से बचना है. हमारी शांति ही हमारा सबसे बड़ा हथियार होगी."

प्रिया और उसके साथियों ने महसूस किया कि वे पहली बार किसी 'सिस्टम' को क्रैश होने से बचाने का काम नहीं कर रहे थे, बल्कि एक नए, न्यायपूर्ण सिस्टम को जन्म लेने में मदद कर रहे थे. दफ्तरों और घरों में घंटों कोडिंग के जालों से उलझने के दौरान जिस तरह की बोरियत और ऊब उन्हें सामना करना पड़ता था,वैसी यहाँ नहीं थी. उसके विपरीत उन्हें अपने कोडिंग के ज्ञान की ताकत और उसके उपयोग का एक नया मानवीय चेहरा नज़र आ रहा था.
... क्रमशः

1 टिप्पणी:

Digvijay Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में सोमवार 06 एप्रिल, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!