@import url('https://fonts.googleapis.com/css2?family=Yatra+Oney=swap'); अनवरत: नई पैकिंग

शुक्रवार, 13 मार्च 2020

नई पैकिंग


मान मेराज के घराने का नित्य का आहार था, जिसे वह मंडी में एक खास दुकान से लाता था। कभी वह मंडी की सब से बड़ी दुकान हुआ करती थी। उसका बाप भी उसी दुकान से लाता था। ऐसा नहीं कि मान केवल उसी दुकान पर मिलता हो। मंडी में और भी दुकानें थीं। उसकी बुआएँ दूसरी जगह से मान लेती थीं। बाप मर गया फिर भी वह उसी दुकान से सामान लेता रहा। दूसरी दुकानों वाले कम दाम पर मान देने की पेशकश कर के उसे बार बार आकर्षित करने की कोशिश करते थे। फिर अचानक उसकी वाली दुकान के ग्राहक कम होने लगे। उसने देखा कि मंडी में प्रतिद्वंदी दुकान वाले ने अपना सारा सैट-अप चेन्ज कर दिया है। दुकान का पूरी तरह आधुनिकीकरण कर दिया। यहाँ तक कि केवल फोन या एप पर आर्डर मिलते ही मान घर पहुंचने लगा। मेराज ने भी एप ट्राइ किया। उसे लगा कि पड़ोसी दुकानदार की दुकान पर भी कीमतें कमोबेश वही हैं जो वह अपनी स्थायी दूकान पर चुकाता है। पर उसके प्रतिद्वंदी की दुकान नवीकरण के बाद से चमकती है, पैकिंग चमकती है, दुकानदार भी खूब चमकता है।
कभी-कभी उसे लगता कि उसकी पुरानी दुकान को जितना दाम वह चुकाता है उस के मुकाबले उसे कम और दूसरों को अधिक मान दिया जा रहा है। कभी कभी उसकी बुआएँ भी कहती थीं अब वह दुकान छोड़ तू भी हमारी वाली दुकान पर आ जा। पर खून के रिश्तों पर व्यवसायिक रिश्ते भारी पड़ते ही हैं। वह मुस्कुरा कर बुआओं को जवाब दे देता कि उस दुकान से उसका रिश्ता बाप के वक्त से है, कैसे छोड़ दे? दुनिया बातें जो बनाएगी, लोग फजीहत करेंगे वगैरा वगैरा। लेकिन वह लगातार यह परखता रहता कि कहीं वह ठगा तो नहीं जा रहा है? जाँच करने पर पता लगता कि दाम में भी और मान में भी दोनों ही तरफ कोई खास फर्क नहीं है। वह पुरानी दुकान पर ही बना रहा।
चित्र में ये शामिल हो सकता है: पक्षी
चित्र : सुरेन्द्र वर्मा से साभार
फिर एक दिन प्रतिद्वंदी दुकानदार ने पासा फैंका। अपने यहाँ उसे भोजन पर न्यौता। उस ने सोचा इतने मान से वह न्यौता दे रहा है तो जाने में क्या बुराई है। वह चला गया। उसे खूब मान मिला। यह आश्वासन भी मिला कि यदि वह उस की दुकान पर आ जाए तो निश्चित रूप से उसे विशिष्ट ग्राहक का मान मिलेगा। पुराना दुकानदार उस का मान तो करता है, लेकिन विशिष्ट नहीं। वह दूसरों का भी उतना ही मान करता है। वह वापस लौट कर पुराने दुकानदार के पास पहुँचा उस ने अपनी मांग रख दी कि उसे दूसरे ग्राहकों से अधिक मान मिलना चाहिए और मान भी कुछ डिस्काउंट के साथ मिलना चाहिए। दुकानदार ने उसे कहा कि हमने आप के मान में कभी कमी नहीं रखी। हम अपने स्थायी ग्राहकों को बराबर मान देते हैं। अब दूसरों से अधिक आपको देंगे तो दूसरों को लगेगा कि उनका अपमान कर रहे हैं। रहा सवाल डिस्काउंट का तो जिन जिन्सों में डिस्काउंट सम्भव है उनमें दिया ही जा रहा है, वे सभी ग्राहकों को देते हैं। उनको भी दे रहे हैं। यदि संभव होगा तो कुछ डिस्काउंट बढ़ा देंगे लेकिन देंगे सभी ग्राहकों को, वे ग्राहक-ग्राहक में भेद नहीं कर सकते।
बस फिर क्या था। मेराज की फौरन सटक गई। उसने कह दिया कि उसे प्रतिद्वंदी दुकानदार वह सब देने को तैयार है जो उस की मांग है। इसलिए वह सोचेगा कि वह इस दुकान से मान खऱीदना बंद कर प्रतिद्वंदी की दुकान से क्यों न खऱीदने लगे। उधर जिस दिन से वह न्यौते पर हो कर आया था उसी दिन बाजार में कानों-कान खबर उड़ गयी थी कि मेराज भी अब पुरानी वाली दुकान छोड़ नयी दुकान से मान लेने की सोच रहा है। मेराज शहर के बड़े आसामियों में से था तो खबर को खबरची ले उड़े। अखबारों में भी बात छप गयी। पुरानी दुकान के ग्राहक सतर्क हो गए। वे एक-एक कर दुकानदार के पास पहुँचकर बोलने लगे। मेराज को सुविधाएँ देने में उनको कोई आपत्ति नहीं है पर उन्हें भी वैसी ही सुविधाएँ चाहिए। पुराना दुकानदार सब को सहता रहा और कहता रहा। वह ऐसा नहीं कर सकता। वह सब ग्राहकों को समान समझता है और समान ही व्यवहार करेगा। इस के सिवा वह और कहता भी क्या? उसे पता था, प्रतिद्वंदी दुकानदार ने उस के व्यवसाय को खासा चोट पहुंचाई है। बाजार में नम्बर एक का स्थान तो उस से कभी का छिन चुका है। अभी भी वह नम्बर दो बना हुआ है तो इन्हीं पुराने ग्राहकों की बदौलत। उस के नए ग्राहक भी इन पुराने ग्राहकों की बदौलत ही आते हैं। वह इन ग्राहकों को कतई चोट नहीं पहुँचा सकता। उस ने मेराज को अलग से कोई सुविधा दी तो उसकी बची-खुची दुकानदारी को बत्ती लग जाएगी। वह चुप्पी खींच कर बैठ गया।
जल्दी ही मेराज पुरानी दुकान पहुँचा और उसका हिसाब-किताब कर आया। बाजार तो बाजार ठहरा। वहाँ चर्चाएँ चलीं। मेराज अब खुद की अपनी दुकान खोल लेगा। कुछ ने कहा उसे दुकानदारी करनी होती तो पहले ही कर लेता। उसका धंधा दूसरा है वह इस धंधे में क्यों पड़ेगा, वह जरूर नई दुकान पकड़ेगा। दो दिन तक ये सारी गपशप बाजारों, अखबारों, चैनलों के साथ साथ फेसबुक और व्हाट्सएप गलियारों में भी खूब चलीं। तीसरे दिन दोपहर को अचानक मेराज अपने घर से निकला और सीधे नई दुकान पर पहुंच गया। दुकान पर न नया दुकानदार था और न ही उसका मुनीम। बस कारिन्दे थे। लेकिन कारिन्दों ने उस का खूब जोर शोर से स्वागत किया। ये सब चैनलों ने लाइव दिखाया।
मेराज का दुकान बदलने का उत्साह ठंडा पड़ गया। वह सोचने लगा कि जब वह दुकान पर पहुँचा तब दुकानदार को नहीं तो उस के मुनीम को तो वहाँ होना ही चाहिए था। दोनों नहीं थे, और यह सब चैनलों ने लाइव दिखा दिया। यह तो उस की भद्द हो गयी, डैमेज हो गया। नयी शुरुआत और वह भी डैमेज से। वह दुखी हुआ। उसने तुरन्त नए दुकानदार को काल लगवाई। पता लगा नए दुकानदार के सभी फोन एंगेज आ रहे हैं। मेराज के कारिन्दों ने मुनीम के फोन खंगाले तो उन पर घंटी जाती रही, किसी ने उठाया ही नहीं। थक हार कर कारिन्दे बैठ गए। सोचा कुछ देर बार फिर ट्राई करेंगे। कोई बीस मिनट ही बीते होंगे कि फोन आ गया। नई दुकान के मुनीम का था। फोन तुरन्त मेराज को पकड़ाया गया। मुनीम बोला- वो बाथरूम में था और किसी कारिन्दे को आप का फोन उठाने की हिम्मत न हुई। उसे मेराज के दुकान पर आने की खबर बहुत देर से हुई वर्ना दुकानदार और वह खुद दुकान पर ही उस का स्वागत करते। वे दोनों जहाँ थे वहाँ से दुकान पर तुरन्त पहुँचना मुमकिन नहीं था। अब वह खुद और दुकानदार फ्री हैं। वे चाहेँ तो मिलने आ सकते हैं।
मुनीम के फोन से मेराज की साँस में साँस आई। वह शाम को दोनों से मिलने गया। ध्यान रखा कि जब वह मिले वहाँ चैनल वाले जरूर हों। कुछ ही देर में चैनलों पर दुकानदार और मुनीम से मेराज की मुलाकात के वीडियो आ गए। कुछ हद तक डेमेज कंट्रोल हो चुका था। रात को मेराज ने अपने कारिन्दे को बुलाया और पूछा- नई दुकान से जो मान आया था उसके बिल चैक किए? मान चैक किया? कारिन्दे ने जवाब दिया- मान में तो कोई खास फर्क नहीं है, कुछ बीस है तो कुछ उन्नीस है। मान की कीमत कम लगाई है, पर पैकिंग अलग से चार्ज की है उसे मिला दें तो पुराने दुकानदार के मान से दाम कुछ अधिक ही लगे हैं। पर ये जरूर है कि मान जूट के बोरों की जगह खूबसूरत रंगे-पुते गत्तों  में आया है। ड्राइंगरूम में भी कुछ घंटे रखा रह जाए तो बुरा नहीं लगता।
मेराज सोच रहा था कि यह तो दो चार महीने के बाद पता लगेगा कि मान कैसा है और दाम कितने। दुकानदार और मुनीम दोनों मिल लिए हैं। चैनलों में वीडियो आ गए हैं। अभी तो मान की भर्ती पूरी हो गयी है। सुबह का डैमेज कंट्रोल कर लिया है। आगे की आगे देखेंगे।

1 टिप्पणी:

अनीता सैनी ने कहा…


जी नमस्ते,
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की शनिवार(१४-०३-२०२०) को "परिवर्तन "(चर्चा अंक -३६४०) पर भी होगी।
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
आप भी सादर आमंत्रित है
….
अनीता सैनी