Tuesday, June 16, 2009

'कविता' प्यास

प्यास
  • दिनेशराय द्विवेदी
 असीम है जीवन 
उस की संभावनाएँ भी

हम चाहते हैं पूरा
मिलता है बहुत कम
शायद असीम का
करोड़, करोड........करोडवाँ अंश

प्यास तो रहेगी शेष
हमेशा ही
वह कभी नहीं बुझेगी

प्यास चिरयौवना है
अमर है
प्रेम का असीम स्रोत है

चाहता हूँ 
बनी रहे,
अनंत तक, 
प्यास
मेरे साथ
सब के साथ 

************** 
 
Post a Comment