Saturday, June 20, 2009

हम धरती के जाए "गीत" * महेन्द्र नेह


"गीत" 

 हम धरती के जाए

  • महेन्द्र नेह 

आज तुम्हारी बारी है
जो जी आए कर लो 
कलजब वक्त हमारा आए
तो रोना मत भाई!

तुमने हमें निचोड़ा
जीना दूभर कर डाला 
भाग हमारे मढ़ा 
अंधेरा, मकड़ी का जाला 

हम हैं धरती के जाए
हम सब कुछ सह लेंगे 
अंधियारा कल तुम्हें सताए
तो रोना मत भाई!

तुमने जंगल, नदी, खेत
सब हमसे छीन लिए 
संविधान के तंत्र मंत्र से 
बाजू कील दिए 

तंत्र-मंत्र के बल पर 
अब तक टिका नहीं कोई 
कल यह सब वैभव छिन जाए
तो रोना मत भाई! 

तुमने हमें चबाया सदियों,
भूख न मिट पाई 
हविश मनुज के लहू 
पान की तनिक न घट पाई 
.
हम तो हैं मृत्युंजय 
हम को मार न पाओगे 
काल तुम्हारे सिर मंडराए, 
तो रोना मत भाई!


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