@import url('https://fonts.googleapis.com/css2?family=Yatra+Oney=swap'); अनवरत: उपभोक्ता के रूप में क्या आप हिन्दी में काम करने की मांग करते हैं?

बुधवार, 14 सितंबर 2011

उपभोक्ता के रूप में क्या आप हिन्दी में काम करने की मांग करते हैं?

दो दिन पहले सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनी के शाखा कार्यालय जाना हुआ। बीमा कंपनी हर वर्ष 14 सितम्बर से एक सप्ताह तक हिन्दी सप्ताह मनाती है। इस के लिए कुछ बजट भी शाखा में आता है। इस सप्ताह में कर्मचारियों के बीच निबंध, हिन्दी लेखन, हिन्दी प्रश्नोत्तरी जैसी कुछ प्रतियोगिताएँ आयोजित कराई जाती हैं और अंतिम दिन पुरस्कार वितरण होता है। जिस के उपरान्त जलपान का आयोजन होता है और इस तरह हिन्दी को कुछ समृद्धि प्रदान कर दी जाती है। दो वर्षों से इस सप्ताह के अंतिम दिन जब हिन्दी प्रश्नोत्तरी और पुरस्कार वितरण का आयोजन किया जाता है तो वे मुझे बुलाते हैं। इस बार भी उन्हों ने मुझे आने को कहा। मैं ने उन्हें अपनी सहमति दे दी। इन प्रतियोगिताओं के आयोजन में कुछ नवीनता आए और हिन्दी में काम करने के प्रति लोगों का रुझान पैदा हो इस के लिए मैं ने कुछ सुझाव भी दिए। सुझावों को गंभीरता से सुना तो गया। लेकिन उन्हें क्रियान्वित करने के लिए जो उत्साह होना चाहिए वह वहाँ दिखाई नहीं दिया। मुझे लगा कि इस वर्ष फिर पिछले वर्षों की तरह ही बनी बनाई लकीर पर एक और लकीर खींच कर हिन्दी सप्ताह संपन्न हो लेगा।

कुछ देर और मुझे शाखा प्रबंधक के कक्ष में रुकना पड़ा तो मैं ने उन्हें बताया कि उन के कंप्यूटरों में हिन्दी भाषा का उपयोग करने की सुविधा है लेकिन उसे चालू नहीं किया हुआ है। यहाँ तक कि वे इस सुविधा को चालू कर के पूरे कंप्यूटर को हिन्दी रूप प्रदान कर सकते हैं। मैं ने उन के कंप्यूटर के डेस्कटॉप पर लगे आईकॉन के नाम देवनागरी में बदले। उन्हें बताया कि कैसे फाइल और फोल्डर्स के नाम नागरी में अंकित किए जा सकते हैं। उन्हों ने पूछा कि हिन्दी तो उन के कंप्यूटर पर पहले भी टाइप की जाती रही है, लेकिन जब वे उस पर हिन्दी फोन्ट में फाइल का नाम लिखते थे तो रोमन में अजीबोगरीब शब्द आ जाते थे, लेकिन आप ने यह सब कैसे लिखा? 

मैंने उन्हें बताने लगा कि उन का कंप्यूटर उन सब भाषाओं को समझ सकता है जो कि कंट्रोल पैनल के 'क्षेत्र और भाषा' विकल्प में दर्ज हैं, लेकिन वे उस विकल्प का उपयोग नहीं करते। वे केवल अंग्रेजी विकल्प का ही प्रयोग करते हैं जब कि उन का कंप्यूटर एक साथ अनेक भाषाओं और लिपियों में काम कर सकने की क्षमता रखता है। जब वे केवल अंग्रेजी के विकल्प का उपयोग भी आरंभ कर दिया जाता है तो जो कंप्यूटर केवल अंग्रेजी समझता था वह हिंदी भी समझने लगता है। लेकिन कंप्यूटर केवल यूनिकोड के हिन्दी फोन्ट को ही हिंदी के फोन्ट के रूप में मान्यता देता है, अन्य फोंट को नहीं। उस का कारण यह है कि अन्य फोंट वास्तव में अंग्रेजी कोड पर आधारित हैं। अंतर सिर्फ इतना है कि उन में किसी खास रोमन अक्षर के स्थान पर देवनागरी के किसी अक्षर, अर्धाक्षर या मात्रा का चित्र विस्थापित कर दिया गया है जिस से देवनागरी के अक्षर को भी कंप्यूटर रोमन का ही कोई अक्षर समझता रहता है।

मेरे इतनी बात करने का लाभ यह हुआ कि शाखा प्रबंधक ने यूनिकोड हिन्दी टाइप करने के औजारों के संबंध में बात करना आरंभ किया। सब कुछ अल्प समय में बताना संभव नहीं था इसलिए मैं ने उन्हें सुझाव दिया कि वे हिन्दी सप्ताह में कंप्यूटर पर हिन्दी में काम करने के तरीकों के बारे में उन की शाखा में क्यों नहीं एक कक्षा आयोजित करते हैं? उन्हों ने आश्वासन दिया कि वे उस के लिए प्रयत्न करेंगे। मैं ने उन्हें यह भी बताया कि वे जो काम अंग्रेजी में करते आए हैं उसे हिन्दी में भी कर सकते हैं। जैसे ग्राहकों से हिन्दी में पत्र व्यवहार करना या भुगतान के चैक आदि हिन्दी में बनाना है। मैं ने उन्हें बताया कि मैं यह सब व्यवहार हिन्दी में ही करता हूँ और अंग्रेजी का उपयोग तभी करता हूँ जब कि वह अपरिहार्य हो जाता है। हिन्दी में चैक आदि बनाने पर राशियाँ लिखना बड़ा आसान है। इस बीच शाखा प्रबंधक ने एक ग्राहक को देने के लिए चैक बनाया तो उसे हिन्दी में लिखा और मुझे बताया। मैं ने उन्हें कहा कि यह चैक अंग्रेजी में लिखे गए चैक से अधिक सुंदर लग रहा है और गड़बड़ की गुंजाइश भी और कम हो गई है। जिस ग्राहक को यह चैक मिलेगा उसे भी हिन्दी में यह काम करने की प्रेरणा मिलेगी। शाखा प्रबंधक ने बताया कि वे प्रयत्न करेंगे कि अधिक से अधिक काम हिन्दी में करें। इस बीच सहायक ने उन्हें बताया कि बीमा पॉलिसी को हिन्दी में छापने की सुविधा भी उपलब्ध है। तो प्रबंधक जी कहने लगे कि जब तक ग्राहक अंग्रेजी में पॉलिसी छापने का खुद आग्रह न करे उसे पॉलिसी हिन्दी में छाप कर दी जानी चाहिए। उन्हों ने कहा कि मुझे अब तक खुद यह बात पता नहीं थी। लेकिन वे अब इस काम को भी हिन्दी में चालू करना चाहेंगे। 

गभग सभी व्यवसायिक संस्थाओं और उपक्रमों में हिन्दी में काम करने की सुविधाएँ उपलब्ध हैं लोग परंपरा के कारण अंग्रेजी में का्म करते रहते हैं। यदि उपभोक्ता खुद हिन्दी में काम करने की मांग करने लगें तो यह काम हिन्दी में हो सकते हैं। मैं तो हर स्थान पर हिन्दी में काम करने की मांग करता हूँ। आप चाहें तो आप भी कर सकते हैं। मुझे लगता है कि उपभोक्ता हिन्दी में काम करने की मांग करने लगें तो हिन्दी को उस का उचित स्थान प्राप्त करने में वे महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते हैं। क्या आप भी उपभोक्ता के रूप में हिन्दी में काम करने की मांग करते हैं? यदि नहीं तो क्या अब करेंगे?

22 टिप्‍पणियां:

चंदन कुमार मिश्र ने कहा…

क्यों नहीं! जरूर। उपभोक्ता के हाथ में बाजार तो है लेकिन हिन्दी के पक्ष का आधार नहीं। अच्छा विकल्प सुझाया है आपने। मैंने भी एक संस्थान में यह बात कही थी कि क्यों नहीं पाठ्यक्रम में हिन्दी के संचालन तंत्र की शिक्षा दी जाती। कम्प्यूटर के छात्रों को इसका ज्ञान भी नहीं है कि हिन्दी में कम्प्यूटर के लिए क्या-क्या उपलब्ध है? मांग से पूर्ति होगी और हिन्दी या किसी भाषा के लिए यह अच्छा सुझाव है।

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

बेशक माँग की जानी चाहिए लेकिन माँग की नौबत आने से पहले ही ऐसा किया जाना चाहिए था।

Udan Tashtari ने कहा…

लोग परंपरा के कारण अंग्रेजी में का्म करते रहते हैं। यदि उपभोक्ता खुद हिन्दी में काम करने की मांग करने लगें तो यह काम हिन्दी में हो सकते हैं।...बिल्कुल सहमत हूँ आपसे....

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

बहुत अच्छी है आपकी भावना.

ब्लॉ.ललित शर्मा ने कहा…

हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनायें...

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

माँग करने पर ही हिन्दी पर कार्य होगा।

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

सही कह रहे हैं,सहमत.

Satish Saxena ने कहा…

बढ़िया सलाह और जानकारी दी है आपने ! आभार भाई जी !

वाणी गीत ने कहा…

एक सार्थक प्रयास!
मगर जब हमारे बाद की पीढ़ी में अधिकांश अंग्रेजी मध्यम से शिक्षित हैं , क्योंकर हिंदी में काम किये जाने की वकालत करेंगे !!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सार्थक लेख ...

Dr. Zakir Ali Rajnish ने कहा…

बिलकुल।

हिन्‍दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
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जै हिन्‍दी, जै ब्‍लॉगिंग।

घर जाने को सूर्पनखा जी, माँग रहा हूँ भिक्षा।

ZEAL ने कहा…

बिलकुल मांग की जानी चाहिए , आज से ,अभी से ही , आपके माध्यम से ये मांग करती हूँ। पूरे विश्वास के साथ कहती हूँ की यदि उपभोक्ता स्वयं इस मांग की पहल करें तो यह प्रयास ज़रूर सफल होगा। हिंदी केवल एक भाषा ही नहीं बल्कि हमारी माँ है, हमारे देश का स्वाभिमान है, हमारी शान है । हिंदी से ही हमारी पहचान है।

सदा ने कहा…

बिल्‍कुल सही कहा है आपने ...

हिन्‍दी दिवस की शुभकामनाओं के साथ ...
इसकी प्रगति पथ के लिये रचनाओं का जन्‍म होता रहे ...

आभार ।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

वंदना गुप्ता जी की तरफ से सूचना

आज 14- 09 - 2011 को आपकी पोस्ट की चर्चा यहाँ भी है .....


...आज के कुछ खास चिट्ठे ...आपकी नज़र .तेताला पर
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अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

मैं स्वयं अधिक काम हिंदी में ही करता हूं. कई बैंकों ने एटीम सुविधा हिंदी में प्रदान कर रहे हैं. निवेदन है कि हिंदी विकल्प का चुनाव करें. बढ़िया आलेख. मेरा एक आल्केह यहाँ है... "http://raj-bhasha-hindi.blogspot.com/2011/09/blog-post_14.html" ... देखिएगा !

SANDEEP PANWAR ने कहा…

अभी तक तो नहीं।

रमेश कुमार जैन उर्फ़ निर्भीक ने कहा…

गुरुवर जी, मुझे हिंदी ही आती है और अपने सारे काम भी हिंदी में करता हूँ. ज्यादा जानने के लिए निम्नलिखित लिंक को देखें. इसके अलावा मैंने अपने ऊपर दर्ज धारा १२५ में इस बार जज को लिखकर भेज दिया है कि मेरे ऊपर लगाए सारे आरोप हिंदी में दिलवाए जाए. अगर ऐसा नहीं किया जाता है, तब तक मैं ना हाजिर होगा और ना आज के बाद आपको कोई पत्र लिखूंगा, चाहे बेशक फांसी की सजा दे दो. मगर उसका भी आदेश हिंदी में ही होना चाहिए.देखते है क्या होता है?

मैंने अपने अनुभवों के आधार आज सभी हिंदी ब्लॉगर भाई यह शपथ लें हिंदी लिपि पर एक पोस्ट लिखी है.मुझे उम्मीद आप अपने सभी दोस्तों के साथ मेरे ब्लॉग एक बार जरुर आयेंगे. ऐसा मेरा विश्वास है.

विष्णु बैरागी ने कहा…

सब कुछ सम्‍भव है। चाहिए केवल इच्‍छा शक्ति।

रविकर ने कहा…

हिंदी की जय बोल |
मन की गांठे खोल ||

विश्व-हाट में शीघ्र-
बाजे बम-बम ढोल |

सरस-सरलतम-मधुरिम
जैसे चाहे तोल |

जो भी सीखे हिंदी-
घूमे वो भू-गोल |

उन्नति गर चाहे बन्दा-
ले जाये बिन मोल ||

हिंदी की जय बोल |
हिंदी की जय बोल

दिलबागसिंह विर्क ने कहा…

आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है कृपया पधारें
चर्चामंच-638, चर्चाकार-दिलबाग विर्क

रेखा ने कहा…

जरुर मांग की जानी चाहिए ......आज से ही शुरू करते हैं

शरद कोकास ने कहा…

इसे कहते हैं हिन्दी मास की सार्थकता ।