@import url('https://fonts.googleapis.com/css2?family=Yatra+Oney=swap'); अनवरत: खुद ही विकल्प बनना होगा

शुक्रवार, 16 सितंबर 2011

खुद ही विकल्प बनना होगा

पेट्रोल की कीमतें बढ़ा दी गई हैं। रसोई गैस की नई कीमतें निर्धारित करने के लिए होने वाली मंत्री समूह की बैठक स्थगित हो गई। वह हफ्ते दो हफ्ते बाद हो लेगी। इधर मेरे सहायक नंदलाल जी किसान भी हैं। वे खाद के लिए बाजार घूमते रहे। बमुश्किल अपनी फसलों के लिए खाद खरीद पाए हैं। तीन सप्ताह में खाद की कीमतें तीन बार बढ़ चुकी हैं। दूध की कीमतें बढ़ी हैं। सब्जियाँ आसमान में उड़ रही हैं। जब भी दुबारा बाजार जाते हैं सभी वस्तुओं की कीमतें बढ़ी होने की जानकारी मिल जाती है। दवाओं का हाल यह है कि दो रुपये की गोली बत्तीस से बयालीस रुपए में मिलती है। सस्ती समझी जाने वाली होमियोपैथी दवाएँ भी पिछले तीन-चार वर्षों में दुगनी से अधिक महंगी हो गई हैं। लगता है सरकार का काम सिर्फ महंगाई बढ़ाना भर हो गया है। इस से सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता। आज एक टीवी चैनल दिखा रहा था कि किस किस मंत्री की संपत्ति पिछले दो वर्षों में कितनी बढ़ी है? मुझे आश्चर्य होता है कि जिस देश में हर साल गरीबी की रेखा के नीचे रहने वाले इंसानों की संख्य़ा बढ़ जाती है उसी में मंत्रियों की अरबों की संपत्ति सीधे डेढ़ी और दुगनी हो जाती है।

धर पेट्रोल के दाम बढ़े, उधर प्रणव का बयान आ गया। पेट्रोल के दाम सरकार नहीं बढ़ाती। जब बाजार में दाम बढ़ रहे हों तो कैसे कम दाम पर पेट्रोल दिया जा सकता है? हमें चिंता है कि दाम बढ़ रहे हैं। उन का काम बढ़े हुए दामों पर चिंता करना भर है। चिंता करनी पड़ती है। यदि पाँच बरस में वोट लेने की मजबूरी न हो तो चिंता करने की चिंता से भी उन्हें निजात मिल जाए। कभी लगता है कि देश में सरकार है भी या नहीं। तभी रामलीला मैदान में बैठे बाबा पर जोर आजमाइश करते हैं। किसी को अनशन शुरु करने के पहले ही घर से उठा कर जेल में पहुँचा दिया जाता है, लोगों को अहसास हो जाता है कि सरकार है। सब सहिए, चुप रहिए वर्ना जेल पहुँचा दिए जाओगे। अन्ना भ्रष्टाचार मिटाने के लिए लोकपाल लाने को अनशन पर बैठते हैं तो जनता पीछे हो लेती है। राजनेताओं को नया रास्ता मिल जाता है। एक भ्रष्टाचार मिटाने को रथ यात्रा की तैयारी में जुटता है तो दूसरा पहले ही सरकारी खर्चे पर अनशन पर बैठ कर गांधी बनने की तैयारी में है। इन का ये अनशन न महंगाई और भ्रष्टाचार कम करने के लिए नहीं आत्मशुद्धि के लिए है। पीतल तप कर कुंदन बनने चला है।

लोग जो मेहनत करते हैं, खेतों में, कारखानों में, दफ्तरों में, बाजारों में फिर ठगे खड़े हैं। उन्हें ठगे जाने की आदत पड़ चुकी है। अंधेरे में जो हाथ पकड़ लेता है उसी के साथ हो लेते हैं। फिर फिर ठगे जाते हैं। ठगने वाला रोशनी में कूद जाता है, वे अंधेरे में खुद को टटोलते मसोसते रह जाते हैं। लेकिन कब तक ठगे जाएंगे? वक्त है, जब ठगे जाने से मना कर दिया जाए। लेकिन सिर्फ मना करने से काम नहीं चलेगा। लुटेरों के औजार बन चुकी राजनैतिक पार्टियों को त्याग देने का वक्त है। उन्हें उन की औकात बताने का वक्त है। पर इस के लिए तैयारी करनी होगी। कंधे मिलाने होंगे। एक होना होगा। जात-पाँत, धर्म-संप्रदाय, औरत-आदमी के भेद को किनारे करना होगा। मुट्ठियाँ ताननी होंगी। एक साथ सड़कों पर निकलना होगा। हर शक्ल के लुटेरों को भगाना होगा। इन सब का खुद ही विकल्प बनना होगा। 

14 टिप्‍पणियां:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

आप भी बड़ी आशायें रखने लगे हैं. जनता आजतक खड़ी नहीं हुई अब क्या होगी.

रमेश कुमार जैन उर्फ़ निर्भीक ने कहा…

गुरुवर जी, आज मेरा हिंदी का टूल सही हुआ है.काफी अच्छा आलेख है. व्यक्त विचारों से सहमत भी हूँ.

चंदन कुमार मिश्र ने कहा…

कपिल सिब्बल, 2004 में 15 करोड़, 2010-11 में 23-24 करोड़, जयंती नटराजन, 2004 में 8 करोड़, 2010-11 में 21 करोड़, मनमोहन सिंह, 2007 में तीन करोड़, 2010-11 में पाँच करोड़ दस लाख।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

देश को चिन्ता ने ढाँका,
अब झमाझम करो फाँका।

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

सही कह रहे हैं.

रमेश कुमार जैन उर्फ़ निर्भीक ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

यशवन्त माथुर (Yashwant Raj Bali Mathur) ने कहा…

आपकी पोस्ट की हलचल आज यहाँ भी है

Khushdeep Sehgal ने कहा…

मक्खन का फॉर्मूला अपनाइए...वो पहले भी सौ का पेट्रोल भरवाता था, अब भी सौ रुपये का ही भरवाता है...साथ ही पूछ रहा है...इतना रौला क्यों मचा हुआ है...

जय हिेद...

रचना दीक्षित ने कहा…

हमारे नेताओं को संपत्ति बढ़ाने का तरीका सार्वजानिक करना चाहिये जिससे दुसरे देशवासी भी लाभावान्वित हो सके और महगाई से लड़ सके.

Arun sathi ने कहा…

सारगर्भित..

Dr. Zakir Ali Rajnish ने कहा…

अभी पता चला कि हवाई जहाज का पेट्रोल सामान्‍य पेट्रोल से सस्‍ता है, जबकि वह ज्‍यादा रिफाइंड होता है। मैं तो सोच रहा हूं कि किसी पॉयलट वॉयलट को पकडूं....

------
कभी देखा है ऐसा साँप?
उन्‍मुक्‍त चला जाता है ज्ञान पथिक कोई..

रवि कुमार, रावतभाटा ने कहा…

खुद ही विकल्प बनना होगा...
बेहतर...

सदा ने कहा…

बिल्‍कुल सही कहा है आपने ... आभार ।