@import url('https://fonts.googleapis.com/css2?family=Yatra+Oney=swap'); अनवरत: शिवराम की कविताएँ 'बवंडर' और 'तौहीन'

शनिवार, 8 नवंबर 2008

शिवराम की कविताएँ 'बवंडर' और 'तौहीन'

दो दिन कोटा से बाहर हूँ, कम्प्यूटर और जाल हाथ लगे न लगे, कुछ  कह नहीं सकता। 
पहले से सूची-बद्ध की गई इस कड़ी में पढ़िए शिवराम की शिवराम की कविताएँ  'बवंडर' और 'तौहीन' ...
बवंडर
 यह बवंडर भी थमेगा एक दिन 
थम गई थीं जैसे सुनामी लहरें

आखिर यह बात 
आएगी ही समझ में 
कि- यह दुनियाँ 
ऐसे नहीं चलेगी
और यह भी कि 
कि- आखिर कैसे चलेगी 
यह दुनिया? 

ज्यादा दिन नहीं चलेगा 
यह बवंडर बाजारू
थमेगा एक दिन
 ... शिवराम
***** 
 
तौहीन 
सातवें आसमान के
पार जाना था तुम्हें
तुम उड़े ,
और ठूँठ पर जा कर बैठ गए

यह उड़ान की नहीं,
परों की तौहीन है
तुम्हारी नहीं, 
हमारी तौहीन है।  
... शिवराम 
*****

17 टिप्‍पणियां:

makrand ने कहा…

bahut sunder rachanyen

Gyan Dutt Pandey ने कहा…

मन को प्रफुल्लता मिली।

डॉ .अनुराग ने कहा…

दूसरी ज्यादा पसंद आयी

Vivek Gupta ने कहा…

सुंदर |

Dr. Amar Jyoti ने कहा…

बहुत ख़ूब!

समयचक्र ने कहा…

मनभावन रचनाये प्रस्तुत करने के
लिए धन्यवाद्. मन आनंदित भयो . धन्यवाद्
जी

Udan Tashtari ने कहा…

शिवराम जी की दोनों रचनाऐं पसंद आई. आभार प्रस्तुत करने का.

पारुल "पुखराज" ने कहा…

यह उड़ान की नहीं,
परों की तौहीन है
तुम्हारी नहीं,
हमारी तौहीन है। bahut badhiyaa

Smart Indian ने कहा…

बहुत ही गहरे भाव, धन्यवाद!

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

आनंदम ! बहुत आभार आपका ! सही में लाजवाब !

बवाल ने कहा…

Shivraam jee kee kavitaaon badee achhee hai. Tathyaparak.

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` ने कहा…

अच्छी लगीं दोनों कवितायेँ

अनुपम अग्रवाल ने कहा…

बेहतरीन भाव हैं

Girish Billore Mukul ने कहा…

aanand daayak

Abhishek Ojha ने कहा…

सुंदर !

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी ने कहा…

अच्छी कविताएं। शिवराम जी को यहाँ लाने का धन्यवाद।

विष्णु बैरागी ने कहा…

कविताएं तो दोनों ही उत्‍कृष्‍ट हैं किन्‍तु 'तौहीन' अधिक अपने पास अनुभव हुई ।
प्रभावी कविताएं उपलब्‍ध कराने के लिए धन्‍यवाद ।