@import url('https://fonts.googleapis.com/css2?family=Yatra+Oney=swap'); अनवरत: देश को सही नेतृत्व की जरूरत है

शुक्रवार, 5 दिसंबर 2008

देश को सही नेतृत्व की जरूरत है

आतंकवाद से युद्ध की बात चल रही है। इस का अर्थ यह कतई नहीं है कि शेष जीवन ठहर जाए और केवल युद्ध ही शेष रहे। वास्तव में जो लोग प्रोफेशनल तरीके से इस युद्ध में अपने कामों को अंजाम देते हैं उन के अलावा शेष लोगों की जिम्मेदारी ही यही है कि वे देश में जीवन को सामान्य बनाए रखें।

मेरे विचार में हमें करना सिर्फ इतना है कि हम अपने अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से करते हुए सजग रहें कि जाने या अनजाने शत्रु को किसी प्रकार की सुविधा तो प्रदान नहीं कर रहे हैं।

इस के साथ हमें हमारे रोजमर्रा के कामों को आतंकवाद के साये से भी प्रभावित नहीं होने देना है। लोग अपने अपने कामों पर जाते रहें। समय से दफ्तर खुलें काम जारी ही नहीं रहें उन में तेजी आए। खेत में समय से हल चले बुआई हो, उसे खाद-पानी समय से मिले और फसल समय से पक कर खलिहान और बाजार पहुँचे। बाजार नियमित रूप से खुलें किसी को किसी वस्तु की कमी महसूस न हो। स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय अपना काम समय से करें। कारखानों में उत्पादन उसी तरह होता रहे। हमारी खदानें सामान्य रूप से काम करती रहें।
सभी सरकारी कार्यालय और अदालतें अपना काम पूरी मुस्तैदी से करें। पुलिस अमन बनाए रखने और अपराधों के नियंत्रण का काम भली भांति करे। ये सब काम हम सही तरीके से करें तो किसी आतंकवादी की हिम्मत नहीं जो देश में किसी तरह की हलचल उत्पन्न कर सके।

वास्तविकता तो यह है कि हम आतंकवाद से युद्ध को हमारे देश की प्रणाली को चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए उपयोग कर सकते हैं। बस कमी है तो देश को ऐसे नेतृत्व की जो देश को इस दिशा की ओर ले जा सके।

17 टिप्‍पणियां:

PD ने कहा…

सर, मन से या बेमन से.. ऑफिस तो हर दिन जाना ही है और काम भी करना ही है.. :)
वैसे आप सही कह रहें हैं..

कार्तिकेय मिश्र (Kartikeya Mishra) ने कहा…

सही कहा दिनेश जी,
इजरायल का ही उदाहरण के लीजिये. चारों ओर से दुश्मनों से घिरा मुल्क है, लेकिन अन्दर से इतना मज़बूत बना रहता है कि बाहर का दुश्मन आंख उठाने से पहले सौ बार सोचे. रेनोवेशन हमेशा इनसाइड-आउट होता है.

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

आपकी बातो से सौ प्रतिशत सहमत हूँ !

रामराम !

P.N. Subramanian ने कहा…

बिल्कुल ठीक कहा आपने. एमर्जेन्सी जैसा महॉल बन जाना चाहिए. नेतृत्व तो अब युवा पीढ़ी ही दे सकेगी. आभार.

Anil Pusadkar ने कहा…

हां होना तो यही चाहिये।

Gyan Dutt Pandey ने कहा…

सही कह रहे हैं। चरित्र हो तो कोई आतंक या दुश्मन कुछ नहीं कर सकता।

दीपक कुमार भानरे ने कहा…

श्रीमान जी सहमत हूँ आपसे .
यदि सभी अपने कार्यों का निर्बहन जिम्मेदारी पूर्वक करे ताओ किसी आतंकवादी की हिम्मत नहीं जो देश में किसी तरह की हलचल उत्पन्न कर सके।

प्रवीण त्रिवेदी ने कहा…

हमारा आत्मसम्मान और खुद त्वरित निर्णय लेने की क्षमता मृत हो चुकी है. हम स्वाधीन तो सही पर मानसिक रूप से पराधीन हैं!!!

Anita kumar ने कहा…

100% agreed

विष्णु बैरागी ने कहा…

सामयिक और प्रासंगिक परामर्श है आपका । हम अपनी जवाबदारी और उसे निभाने की समझ पा लें । अपनी गरेबां में झांके, दूसरा अपना काम कर रहा है या नहीं, यह चिन्‍ता छोड दें ।
मरे बिना स्‍वर्ग नहीं देख जाता ।

गिरीश बिल्लोरे मुकुल ने कहा…

गुरु गंभीर चिनान एवं परामर्श है सर
सादर

जितेन्द़ भगत ने कहा…

अपने कार्य के प्रति‍ इमानदारी सभी समस्‍या का हल है मगर ऐसा न हो पाना खुद ही एक समस्‍या है।

डॉ .अनुराग ने कहा…

सभी ने सब कह दिया है पर कार्तिकेय की बात में दम है

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` ने कहा…

ईज़्राइलीयोँ ने होलोकोस्ट के बाद
निर्णय किया कि अब
कोई कौम उन्हेँ इस तरह
बर्बाद नहीँ करेगी
जैसे हीटलर ने किया था -
इसी का नतीजा है
जो आज वे इतने सशक्त हैँ

Smart Indian ने कहा…

सहमत हूँ - और वह सही नेतृत्व भी हम में से ही आयेगा!

Unknown ने कहा…

आपने बिल्कुल सही कहा है. नेतृत्व की गुणवत्ता पर बहुत कुछ निर्भर करता है. यह दुःख की बात है कि आजादी के बाद इस देश को कुशल नेतृत्व नहीं मिला, वरना मानव और अन्य संशाधनों से भरपूर यह देश आज विश्व के शिखर पर होता. आतंकवादी और उन्हें समर्थन दे रहे राष्ट्र और संगठन मानवता के शत्रु हैं. यह लोग अपना काम करते रहेंगे. हमें अपना काम करना है. इस बारे में आपके सुझाव बहुत महत्वपूर्ण हैं.

सरकार और उस की अनेक एजेंसियां अपने कर्तव्य पूरे करें और हर नागरिक अपना कर्तव्य पूरा करे. सब एक स्वर में कहें, 'हम आतंकवाद को विजयी नहीं होने देंगे'.

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

दिनेश जी सही कह रहे हैं....