Sunday, November 2, 2008

तकिए पर पैर

  

तकिए पर पैर
दिनेशराय द्विवेदी

सबसे नीचे, पैर!
दिन भर ढोते 
शरीर ,

बीच में,  उदर
भोजन का संग्रह,

सब से ऊपर, सिर
नियंत्रित करता
सब को,

वहीं एक छिद्र
भकोसता हुआ
पेट के लिए,

रात चारपाई पर
होते सब बराबर
लंबायमान 
एक सतह पर,

टूट जाते अहम्
सिर और पेट के,


कभी  होते
सिर के बजाय पैर
 तकिए पर।
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