@import url('https://fonts.googleapis.com/css2?family=Yatra+Oney=swap'); अनवरत: अप्रैल 2026

बुधवार, 1 अप्रैल 2026

काउंटर-इंटेलिजेंस

देहरी के पार, कड़ी - 13
रामजी काका के कर्मचारियों की सूचना से स्पष्ट हो गया कि अभी प्रिया का पीछा करने वाले मेवाड़ भोजनालय तक नहीं पहुँचे. प्रशांत बाबू ने अपनी कॉफी का आखिरी घूंट लेकर अपने हैंड बैग से पेंसिल और खाली कागज निकाला, कागज को मेज पर फैला कर पेंसिल से कागज पर एक अजीब सा डायग्राम बनाया. फिर प्रिया से बोले, “प्रिया, तुम डरो मत.”

“मैं डरी कहाँ हूँ, सर. मैं स्कॉर्पियो को चकमा देकर आई हूँ. प्रिया ने पूरी शिद्दत से जवाब दिया. “आखिर वह दोपहर से मेरी निगरानी कर रहा था और पहली बार में ही मेरी निगाह में आ गया.”

"प्रिया, फिर ठीक है, वो फिल्मी डायलॉग बिलकुल सही है कि ‘जो डर गया, सो मर गया, तो जीवन में कभी डरना नहीं है, हर स्थिति में मुसीबत का मुकाबला करना है. अब हम इस काली स्कॉर्पियो को एक सॉफ्टवेयर 'बग' की तरह देखेंगे, जो तुम्हारे सिस्टम में घुसने की कोशिश कर रहा है," प्रशांत बाबू की आवाज़ में एक अजीब ठहराव था.

प्रिया ने गहरी सांस ली और अपना फोन निकाला. "सर, वह मेरा पीछा कर रहा है, तो वह 'डेटा' भी छोड़ रहा है. अब पूरी संभावना है कि वह कल सुबह मेरे ऑफिस पहुँचने के पहले ही वहाँ आ खड़ा होगा." उसने तुरंत एक एक्सेल शीट जैसा मानसिक खाका तैयार किया—समय, स्थान और वाहन का प्रकार. उसने महसूस किया कि 'पैटर्न रिकग्निशन' (नियत ढाँचों की पहचान) ही सुरक्षा की पहली सीढ़ी है. यदि हम पीछा करने वाले के समय और रास्ते को समझ लें, तो उसकी अगली चाल का अंदाज़ा लगा सकते हैं.

“बिलकुल, तुमने ठीक पहचाना. अब वह जानना चाहता है कि तुम कहाँ रहती हो? और ऑफिस के सिवा और कौनसी जगहें हैं जहाँ तुम अक्सर जाती हो. तुमने उसे चकमा देकर बहुत ही बुद्धिमत्ता और बहादुरी का काम किया है. एक आम व्यक्ति से ऐसी आशा कोई नहीं करता. तुम ज़रूर जासूसी उपन्यास पढ़ती होगी?”

“नहीं सर बस कभी-कभी कुछ पढ़ लिया है.” प्रिया ने सकुचाते हुए उत्तर दिया.

“तभी तुमने यह होशियारी कर ली. लेकिन आगे भी यह होशियारी जारी रहनी चाहिए. कम से कम तुम्हारे फ्लैट का उन्हें पता नहीं लगना चाहिए. यहाँ भोजनालय वे पहुँच जाएंगे तो कोई बात नहीं यहाँ उनसे निपटने के लिए हमेशा कुछ लोग रहते हैं.”

“ठीक सर, मैं ध्यान रखूंगी.” कल हम उसकी गतिविधि पर और अधिक ध्यान रखेंगे. अब तुम चाहो तो जा सकती हो.”

“अरे, बिटिया ऐसे कैसे जाएगी? पहले खाना खाएगी. फिर मैं इसे इसके फ्लैट पर छोड़कर आउंगा.

...

अगली सुबह ऑफिस पहुँचते ही प्रिया ने सदा की भाँति टीम मीटिंग की. रोज़ से अलग आज उसने मीटिंग रूम को अंदर से बंद करवाया. उसने काली स्कॉर्पियो और विक्रांत के मुंबई में होने की बात सभी को बताई, तो एकदम सन्नाटा छा गया. लेकिन यह सन्नाटा डर का नहीं, बल्कि रणनीति बनाने का था.

राहुल ने तुरंत अपना लैपटॉप खोला. "प्रिया, सबसे पहले अपने 'डिजिटल फुटप्रिंट' साफ करो. हम अक्सर अनजाने में अपनी लाइव लोकेशन, सोशल मीडिया चेक-इन्स और यहाँ तक कि कैब बुकिंग के स्क्रीनशॉट साझा कर देते हैं. यह पीछा करने वाले के लिए 'जीपीएस' का काम करता है."

स्नेहा और आदित्य ने एक 'रोस्टर' बनाया. तय हुआ कि अगले दो दिन प्रिया अकेले कहीं नहीं जाएगी. टीम का एक सदस्य हमेशा उसके साथ रहेगा, लेकिन इस तरह कि दूर से देखने वाले को शक न हो. यह 'कम्युनिटी विजिलेंस' (सामूहिक सतर्कता) का एक पाठ था—कि सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि अपनों की एकजुटता और एकजुट कार्रवाई भी है.

...

उधर, अपने ऑफिस में विक्रांत शेखावत पर चिल्ला रहा था. "कल वह गायब कैसे हो गई? एक लड़की मुंबई की गलियों में तुम लोगों को चकमा कैसे दे गई?"

विक्रांत का अहंकार उसे यह मानने नहीं दे रहा था कि प्रिया अब इतनी बदल चुकी है और इतनी होशियार हो चुकी है कि उसके लोगों को आसानी से चकमा दे दे. उसे लगा कि शायद यह इत्तफाक था. उसने आदेश दिया, "आज रात वह जहाँ भी जाए, मुझे उसकी तस्वीर चाहिए. मुझे देखना है कि वह किसके साथ है." उसे नहीं पता था कि उसका 'शिकार' अब खुद उसे एक नियंत्रित वातावरण (Controlled Environment) में खींच रहा है.

...

अगले दिन दोपहर लंच के समय प्रिया और स्नेहा दोनों बाहर निकली और ऑटो लेकर कोई एक किलोमीटर दूर उतर कर एक रेस्टोरेंट में घुस गयीं, और तुरन्त ही पीछे गली में निकल कर अगली सड़क से ऑटो कर स्कॉर्पियो वाले को चकमा देकर वापस आफिस पहुँच गयीं. वहाँ प्रशांत बाबू उनका इंतजार कर रहे थे.

“कहाँ गई थी?” प्रशांत बाबू ने पूछ लिया?

“कुछ नहीं हम एक बार और स्कॉपियो वाले को चकमा दे आए हैं. अब वह घंटे दो घंटे बाद वापस इधर आएगा. बस उसके साथ थोड़ा मजाक था.” प्रिया की बात सुन कर प्रशांत बाबू को हँसी आ गई.

उन्होंने प्रिया को एक छोटा सा डिवाइस दिया. "यह वॉयस रिकॉर्डर और जीपीएस ट्रैकर है. आज तुम उसी रास्ते से जाओगी जहाँ वह स्कॉर्पियो खड़ी रहती है. लेकिन आज तुम 'शिकार' नहीं, बल्कि 'चारा' (Bait) बनोगी."

योजना सरल थी लेकिन प्रभावी. प्रिया को सामान्य तरीके से ऑफिस से निकलकर एक खास पॉइंट तक जाना था. पीछे स्कॉर्पियो होगी, लेकिन उस स्कॉर्पियो के पीछे टीम के लड़के अलग-अलग टैक्सियों में और प्रशांत बाबू की 'आईडिया' यूनियन के दो साथी बाइकों पर होंगे. प्रशांत बाबू कुछ और बातें प्रिया को समझाकर चले गए. प्रिया और उसके साथी अपने काम में जुट गए. आखिर उन्हें आज ही अपना प्रोजेक्ट पूरा करना था.

रात सवा आठ बजे तक प्रिया का प्रोजेक्ट पूरा हुआ. सबने एक दूसरे को बधाई दी. तय किया कि कल सुबह हम इसकी टेस्टिंग करेंगे और फिर क्लाइंट को हैंडओवर कर देंगे. इसके बाद प्रिया ने आईने में खुद को देखा. अपने फोन की सेटिंग बदली, अपनी टीम को 'सेंड' का बटन दबाया और ऑफिस से बाहर कदम रखा. उसे पता था कि काली स्कॉर्पियो की हेडलाइट्स चालू हो गई होंगी, लेकिन आज उसके चेहरे पर मुस्कुराहट थी. वह अब भाग नहीं रही थी, वह 'एविडेंस गैदरिंग' (सबूत जुटाने के) मिशन पर थी.
... क्रमशः