Friday, August 27, 2010

सत्तू उर्फ सत्यप्रकाश गुप्ता, एयरटेल की मोबाइल सेवा और सचिन तेंदुलकर का नंबर

त्तू उर्फ सत्यप्रकाश गुप्ता मेरे एक मित्र का पुत्र है। वह एक नौजवान प्रोफेशनल है, भारतीय जीवन बीमा निगम व डाक बचत योजनाओं के लिए अभिकर्ता तथा सम्पत्ति और वित्तीय सलाहकार के रूप में का काम करता है। उस के बहुत से सेवार्थी हैं जिन्हें वह अपनी सेवाएँ प्रदान करता है। उस की आय में वृद्धि सेवाओं पर टिकी है। वह जितना अधिक काम करेगा उतनी ही उस की आय में वृद्धि होगी। अपने सेवार्थियों से उस का संपर्क उस के मोबाइल फोन पर निर्भर है। सेवार्थी उस से उस के मोबाइल फोन पर संपर्क करते हैं, अपनी जरूरतें बताते हैं और वह दौड़ पड़ता है उन की जरूरतों को पूरी करने के लिए। यदि उस का फोन एक दिन के लिए भी बंद हो जाए तो उस के सेवार्थी परेशान हो उठते हैं। इस लिए वह हमेशा अपने सिम-कार्ड को सक्षम रखता है। जिस से उस के किसी सेवार्थी को परेशानी न हो। वर्ष 2004 में उस के पास ओएसिस ब्रांड की मोबाइल फोन सेवाएँ थीं। इन सेवाओँ को हेक्साकोम इंडिया लिमिटेड ने खरीद लिया और ओएसिस ब्रांड की सेवाएँ एयरटेल के नाम से काम करने लगीं।
सितम्बर 2004 की 27 तारीख की सुबह अचानक सत्तू के मोबाइल फोन की घंटी बजी, उस पर कोई अपरिचित व्यक्ति बोल रहा था - हाय! कैसे हो, 37वीं सेंचुरी के लिए कोंग्रेचुलेशन्स। सत्तू को कुछ समझ नहीं आया, उस ने फोन काट दिया। तुरंत ही दूसरा फोन तैयार था। इस बार कोई लड़की बोल रही थी।  हाय! लवी! मुझे पहले ही पता था इस बार तुम जरूर सेंचुरी बना लोगे .....यह फोन भी उस ने काट दिया। इस के बाद कोई अंग्रेजी पेल रहा था... फोन फिर काटना पड़ा। उसे काटा तो फिर घंटी तैयार थी, और उस के बाद एक और। सत्यप्रकाश को क्रिकेट में अधिक रुचि नहीं थी लेकिन सचिन तेंदुलकर का नाम उस ने न सुना हो ऐसा भी नहीं था। आठ दस फोन काल्स के बाद उसे समझ आ गया था कि ये सब फोन भारत के चहेते क्रिकेट खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर के लिए आ रहे हैं। वह कुछ फोन करना चाहता था। पर वह फोन लगाता और इच्छित नंबर पर फोन जुड़ता उस के पहले ही घंटी फिर बजा जाती। वह परेशान हो गया। उस ने अपने फोन को बंद कर दिया।  तभी हॉकर अखबार दे कर गया उस ने उसे देखा तो आखिरी पन्ने पर आधे पन्ने का एक विज्ञापन मौजूद था। 

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स विज्ञापन को देख उसे सारा माजरा समझ आ गया। इस विज्ञापन में जो नंबर छापा गया था, वह सत्तू के मोबाइल फोन नंबर था। सचिन तेंदुलकर ने मार्च 2004 में 37वाँ एक दिवसीय शतक बनाया था और एयरटेल वालों ने उस के मोबाइल नं. के पिछले पाँच नंबरों में थर्टीसेवन हंड्रेड होने से तुक मिला कर इस का उपयोग किया था। उसे बड़ा बुरा लगा। एयरटेल के कर्ता-धर्ताओं ने उन का उपभोक्ता होते हुए भी उस से इस मामले में कुछ नहीं पूछा था, न ही इस की सूचना दी थी कि उस  के मोबाइल नं. का उपयोग किया जा रहा है। उन्हें इस से होने वाली परेशानी से उन्हें कोई मतलब नहीं था। इधर सचिन तेंदुलकर के लिए फोन करने वालों की घंटियाँ लगातार बज रही थीं। यह सिलसिला 10 अक्टूबर तक लगातार चलता रहा। उस के बाद कुछ कम हो गया। अब उस के कुछ सेवार्थियों के फोन के लिए जगह मिलने लगी थी और वे आने लगे थे और वह भी कुछ टेलीफोन कर सकता था। इस परेशानी से बचने के लिए उस ने दिन में कुछ घंटों तक फोन को बंद रखना भी शुरू कर दिया था। लेकिन यह वह लगातार नहीं कर सकता था। उस के व्यवसाय के लिए यह ठीक भी नही था कि उस के  सेवार्थियों  को लिए यह ठीक भी नहीं था कि उन्हें उस का टेलीफोन बंद मिले इस से तो अच्छा था कि वह उन्हें व्यस्त मिले।
स परेशानी से सत्तू ने एयरटेल के कार्यालय में सूचित किया किंतु उन्हों ने उस की कोई मदद नहीं की। आखिर वह मेरे पास पहुँचा। मैने उसे एयरटेल मोबाइल सेवा की कंपनी हेक्साकॉम इंडिया लि. को कानूनी नोटिस भेजने का सुझाव दिया। आखिर हम ने 26अक्टूबर 2004 को कंपनी को एक नोटिस प्रेषित कर शिकायत की और असुविधा के लिए मुआवजा देने की मांग की और यह भी चेतावनी दी कि भविष्य में किसी भी विज्ञापन में सत्तू के मोबाइल नं. का उपयोग न किया जाए।

(लगातार ... आगे की कहानी अगली पोस्ट में ...... )
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