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Friday 19 February 2010

ताज़गी और बदलाव के लिए ब्लागीरी

शोक उद्यान में हरी दूब के मैदान बहुत आकर्षक थे। हमने दूब पर बैठना तय किया। ऐसा स्थान तलाशा गया जहाँ कम से कम एक-दो दिन से पानी न दिया गया हो और दूब के नीचे की मिट्टी सूखी हो। हम बैठे ही थे कि हरि शर्मा जी के मोबाइल की घंटी बज उठी। दूसरी तरफ कुश थे। वे उद्यान तक पहुँच चुके थे और पूछ रहे थे कि हम कहाँ हैं।  सूचना मिलते ही हमारी निगाहें प्रवेश द्वार की ओर उठीं तो कुश दिखाई दे गए। हम लोगों ने हाथ हिलाया तो उन्हों ने भी स्थान देख लिया। कुछ ही क्षणों में वे हमारे पास थे। सभी ने उठ कर उन का स्वागत किया। उम्र भले ही मेरी अधिक रही हो लेकिन कुश ब्लागीरी में मुझ से वरिष्ठ हैं, और उन्हें यह सम्मान मिलना ही चाहिए था। 
ब ने अपना परिचय दिया जो मुझ से ही आरंभ हुआ, और उस के बाद ब्लागीरी की अनौपचारिक बातें चल पड़ी। सब ने अपने अनुभवों को बांटा। कुश और मेरे सिवा जोधपुर के कुल चार ब्लागीर वहाँ थे। सभी ने तकनीकी समस्याओं का उल्लेख किया। यह एक वास्तविकता है कि हिन्दी ब्लागीरी में कदम रखना बहुत आसान है लेकिन जैसे-जैसे ब्लागीरी आगे बढ़ती है तकनीकी समस्याएँ आने लगती हैं। लेकिन यदि ब्लागीर में उन से पार पाने की इच्छा हो तो वह हल भी होती जाती हैं।  हिन्दी ब्लागीरी में इस तरह का माहौल है कि लोग समस्याओं को हल करने के लिए तत्पर रहते हैं। अवश्य ही कुश को ऐसी समस्याओं से कम पाला पड़ा होगा आखिर वे वेब डिजाइनिंग का काम करते हैं। तो पहले से उन की जानकारियाँ बहुत रही होंगी और नहीं भी रही होंगी तो उन पर पार पाने का तो उन का पेशा ही रहा है।
फिटिप्पणियों पर बात होने लगी। सब ने कहा कि वे टिप्पणी करने में बहुत अधिक समय जाया नहीं करते। उस का कारण भी है कि वे सभी अपने जीवन में व्यस्त व्यक्ति हैं। शोभना भौतिकी के किसी विषय पर शोधार्थी हैं और उन के दिन का अधिकांश समय शोध के लिए प्रयोग करने में प्रयोगशाला में व्यतीत होता है। सभी ने उन के शोध के बारे में जानना चाहा। उन्हों ने बताया भी लेकिन हम कुछ समझे, कुछ नहीं समझे। मैं ने कहा कि जिस क्षेत्र में वे शोध कर रही हैं उस के बारे में भी अपने ब्लाग पर लिखा करें, हम समझ तो सकेंगे कि आखिर समाज में किसी ब्लागीर के काम का क्या योगदान है और किस किस तरह के  लोग ब्लागीरी में आ रहे हैं?  मैं ने शोभना से उन की आयु पूछी थी, उन्हों ने 24 वर्ष बताई तो मैं ने कहा -मेरी बेटी उन से दो बरस बड़ी है। मुझे इस का लाभ यह हुआ कि मैं तुरंत अंकल हो गया। हालांकि इस लाभ का मिलना उस वक्त ही आरंभ हो गया था जब खोपड़ी की फसल आधी रह चुकी थी और जो शेष थी वह सफेद हो रही थी। 
शोभना कहने लगीं -अंकल! मैं दिन भर प्रयोगशाला में सर खपा कर घर लौटती हूँ और ताज़गी और बदलाव के लिए ब्लाग जगत में जाती हूँ, अगर मैं वहाँ भी वही लिखने लगी तो मेरी खोपड़ी का क्या होगा। उन की बात बिलकुल सही थी। मैं ने फिर भी कहा-कभी कभी अपने काम के बारे में बात करना अच्छा होता है। कम से कम ब्लाग पाठक जानेंगे तो कि उन का ब्लागीर क्या कर रहा है? और यह भी हो सकता है कि किसी पाठक की टिप्पणी ब्लागीर को उस के काम के लिए प्रेरित और उत्साहित करे। शोभना वास्तव में बहुत प्रतिभावान हैं। इस छोटी उम्र में जो उपलब्धियाँ उन्होंने हासिल की हैं उन के लिए मेरे जैसा पचपन में प्रवेश कर चुका व्यक्ति सिर्फ ईर्ष्या कर सकता है। हाँ साथ ही गर्व भी कि बेटियाँ अब उपलब्धियाँ हासिल कर रही हैं।
स बीच हरिशर्मा जी बताने लगे कि वे दस बरस से इंटरनेट पर चैटिया रहे हैं। यदि वे इस के स्थान पर ब्लाग लिख रहे होते तो उन का योगदान न जाने कितना होता। उन की बात भी सही थी। जब मैं ने चैट करना जाना तो मैं भी उस में फँस गया था। बहुत सा समय उस में जाया होता था। हालांकि मैं आगे से कभी चैटियाना आरंभ नहीं करता था। इस बीच मैं ने बताया कि नारी ब्लाग की मोडरेटर रचना जी दिन में चार-पांच बार चैट पर आ जाती थीं। मैं अपने स्वभाव के अनुसार उन्हें मना नहीं कर सकता था। एक दिन उन्हों ने किसी ब्लाग  पर की गई उन की टिप्पणियों के बारे में मेरी राय मांगी।  मेरे मन में रचना जी का सम्मान इस कारण से बहुत बढ़ गया था कि वे नारी अधिकारों और उन की समाज में बराबरी के लिए लगातार लिखती हैं और अन्य नारियों को लिखने को प्रेरित करती हैं। उन की भूमिका एक तरह से ब्लाग जगत में नारियों के पथप्रदर्शक जैसी थी।   मैं उन के बताए ब्लाग पर गया। उन की टिप्पणियों को पढ़ कर मुझे बहुत बुरा महसूस हुआ। मैं ने उन को प्रतिक्रिया दी कि वह एक भद्दी बकवास है। बस, वे बहस कर ने लगी कि वह भद्दा कैसे है? और भद्दा का क्या अर्थ होता है। अंततः उन्हों ने कह दिया कि वे आज के बाद मुझ से चैट नहीं करेंगी। मुझे इस में क्या आपत्ति हो सकती थी? मेरी इस बात पर कुश ने कहा कि रचना का स्टेंड बहुत मजबूत और संघर्ष समझौता विहीन होता है। इस से उन का एक विशिष्ठ चरित्र बना है। मैंने कुश की इस बात  पर सहमति  जाहिर की। (जारी) 

विशेष-चैट की चर्चा चलने पर रचना जी के बारे में अनायास हुई इस बात को हरि शर्मा जी ने जोधपुर ब्लागर मिलन की रिपोर्ट में रचना जी के नाम का उपयोग किए बिना लिखा। इस पर स्वयं रचना जी ने इस पर आकर टिप्पणी भी की। लेकिन जब कुछ अनाम टिप्पणियाँ आने लगी तो हरिशर्मा जी ने उन्हें मोडरेट कर दिया। रचना जी ने नारी ब्लाग पर मेरे और उन के बीच हुए चैट के एक भाग को उजागर कर दिया। मुझे इस पर कोई आपत्ति नहीं। मैं आज भी रचना जी द्वारा मांगी गई राय पर की गई मेरी प्रतिक्रिया पर स्थिर हूँ। मैं ने जो महसूस किया वह प्रकट किया। उस के लिए मेरे पास अपने कारण हैं। उन्हें किसी और पोस्ट में व्यक्त करूंगा। फिलहाल जोधपुर मिलन की रिपोर्ट जारी रहेगी।

23 comments:

वन्दना अवस्थी दुबे 19 February 2010 11:26 PM  

ये "जारी" श्ब्द तन्मयता को कितना भंग करता है न? मायूस भी.. रोचक विवरण की प्रतीक्षा रहेगी द्विवेदी जी.

बी एस पाबला 19 February 2010 11:37 PM  

अच्छा!? आप चैट भी करते थे?

बी एस पाबला

महफूज़ अली 19 February 2010 11:37 PM  

शोभना बहन के बारे में जानकर बहुत अच्छा लगा... फिजिक्स जैसे सब्जेक्ट में पी.एच.डी. मायने रखती है.... हरी जी के दस साल इन्टरनेट पर जानकर अच्छा लगा...बहुत अच्छी लगी यह पोस्ट....

संगीता पुरी 19 February 2010 11:45 PM  

जगह जगह पर हो रही इस तरह की ब्‍लॉगर मीट और पोस्‍टों में उसकी रिपोर्टिंग से सबों को जानने समझने का मौका मिल रहा है !!

HARI SHARMA 19 February 2010 11:57 PM  

पिछले ५ दिन से इस ब्लोगर मिलन पर हम सब बात कर ही रहे थे और मैने अनुरोध किया था कि अन्य साथी भी अपनी तरफ़ से लिखे जिससे छूटी हुई बाते भी सामने आ जाये.

आज शाम जन औफ़िस से घर आया तो नेट खोलते ही थोडी नयी परेशानी सामने आयी. रचना जी के कुछ कमेट थे जिन पर उनसे लम्बी चर्चा भी हुई उन्हे मेरे द्वारा दिये गये विवरण के किसी हिस्से पर आपत्ति थी लेकिन अनामी कमेट की भी बाढ आयी हुई थी जिन्हे मै अपने ब्लोग पर ठीक नही मानता. अब तक मोडरेशन नही था. अनामी को छपने से रोक दिया है. वकील साहब के कथन और मेरे विवरण पर जो आपत्ति उन्होने की वो यथा स्थान है.

एक निवेदन ये है कि मेरे ब्लोग लेखन का उद्देश्य खुद को ब्लोग का या साहित्य का महारथी साबित करना नही है और ना ही किसी का अपमान करना मेरा उद्देश्य है. जहा भी मै टीप छोडता हू वहा महसूस करता हू कि मुझे यही कहना चाहिये.

वकील साहब ने बहुत सी बाते बहुत अच्छे तरीके से बता दी है. आगे उनकी लेखनी से जानने का लोभ मुझे भी है.

ali 20 February 2010 12:26 AM  

बढ़िया लगा पढ़कर !

राज भाटिय़ा 20 February 2010 12:27 AM  

दिनेश जी आप की यह पोस्ट पढ कर बहुत अच्छा लगा, सब बलंग साथियो के बारे जान्कर बहुत अच्छा लगा, यह अनामी अब ज्यादा देर छुपे नही रह सकते.... बस एक मोके की बात है यह बेनाकब हो जायेगे

Sanjeet Tripathi 20 February 2010 1:04 AM  

blog par to mai khud hi bahut baad me aaya sir.
chat pe is se pahle lambe samay se aaya tha, agar chat ko comment maanein to bin amoderation ke kaam nahi chal payega

;)

Udan Tashtari 20 February 2010 3:39 AM  

आपकी बात बड़े गौरपूर्वक ध्यान से सुन रहे हैं और आगे के विवरण का आपकी कलम से इन्तजार है.

अजित वडनेरकर 20 February 2010 3:48 AM  

सभी भले मानुसों से मिलना हुआ, अच्छा लगा।

Arvind Mishra 20 February 2010 6:30 AM  

जल्दी से घर लौट आईये जल्दी ही यह ब्लॉग मिलन होली मिलन में तब्दील हो जाएगा!
आपकी चैट की बात से मुझे याद नयी पड़ता की रचना जी से कभी मेरा कोई चैट सेसन हुआ था या नहीं
या शायद ....मगर एक बात ठीक नहीं है निजी चैट को सार्वजनिक किया जाना उभय पक्षों के लिए बिलकुल
उचित नहीं है -वह अपनी एक बेहद निजी संपत्ति होती है -शेयर करने कराने की चीज तो नहीं .

अनूप शुक्ल 20 February 2010 7:00 AM  

जोधपुर मिलन की आगे की रपट का इंतजार कर रहे हैं!

ललित शर्मा 20 February 2010 9:20 AM  

वकील साहब-बहुत बढिया रिपोर्टिंग ब्लागर मिलन की, आगे की कथा का इंतजार है।

ताऊ रामपुरिया 20 February 2010 9:49 AM  

बहुत कुछ मालूम पडा आपकी इस पोस्ट से.

रामराम.

अजय कुमार झा 20 February 2010 11:53 AM  

बहुत बढिया रपट जा रही है सर ..और हम भी डिक्शनरी खोले बैठे हैं ..जिसमें लिखा है कि ...vulagar ....माने ..फ़ूहड...और ..भद्दा माने ..ugly....अब अगली ..इसका क्या मतलब समझ बैठी ये तो राम ही जाने
अजय कुमार झा

डा. अमर कुमार 21 February 2010 1:22 AM  


बड़ी बेरहमी से वक्त के एक एक पल को पोस्ट में बाँध कर रख दिया है, ज़ालिम ने !

anitakumar 21 February 2010 3:03 AM  

आगे के विवरण का इंतजार है।

विष्णु बैरागी 21 February 2010 4:44 PM  

केवल ताजगी और बदलाव ही नहीं, मेरा अपना अनुभव है कि हताशा से उबरने की संजीवनी भी है ब्‍लॉगरी।
चेटिंग के अपने सुख और समान रूप से दुख भी हैं। मैं इन्‍हें प्राय: ही भोगता रहता हूँ।

Rakesh 7 March 2010 12:26 PM  

sammelan halaki bahut kum blogers ka tha magar uski gunj ab bhi usi tarah se barkarar hai ....mujhe laga nahi ki pahli bar kisi se mil reha hun ..aisa bhi nahi ki meine unko kabhi padha bhi ho siway hari sharma ji ke ..magar fir bhi milan sahaj tha ..ek dusre ko sweekar kerne ki lalak jab hoti hai tab milan ki gunj badi der tak aapke saath rehti hai ....vakil saheb bhai dineshji ....hari bhai ..kush ..sanjay v sobhna parivar ki tarah lagne lage ...ye khusboo wo bloggers aur ekl sache bloger hone ke naate saath laye the ..us khushboo mein ham hari gass per baithe gaas ke tinko ko nahi tod rehe the ya ek dusre ki ore kankhiyon se dekh ker apne pass wale ke kaan mein khusfusaa nahi rehe the ....aur na hi jyada koi baat bhi ker rehe the balki apne apne saath laye ekant ko aaapaws mein nisabd baant rehe the ...ye nisabd matri kafi aage tak jayegi ..yaha na to pagdi uchalne aur na hi uchalne ka khel hoga esliye muskan se bhera hoga ye blog sammelan ab sayad jaldi hi paHILE SAAMELAN KI GUNJ KE KHATAM HONE SE PAHILE KISI VYASTHA SE HOGA ...YE AVYASTHIT MULAQAT HI HAME BATA GAYI KI PREM KITNA ADHEER HOTA HAI MILNE KE LIYE....VAKIL SAHEB DINESH BAHI V HARI BAHI KE ES PRAYAS KI SAFALTA AANE WALE BLOG SAMELON SE ZAHIR HOGI .....

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