Monday, December 1, 2008

चलो कुछ काम किया जाए

वक्त जैसा है, सब को पता है 
उस के लिए क्या कहा जाए।
न होगा कुछ सिर्फ सोचने से 
चलो कुछ काम किया जाए।।

इस वक्त में पढ़िए पुरुषोत्तम 'यकीन' की एक ग़ज़ल ...



'ग़ज़ल'
क्या हुए आज वो अहसासात यारो     

  • पुरुषोत्तम ‘यक़ीन’

क्या कहें आप से दिल की बात यारो
अपने ही करते हैं अक्सर घात यारो

पस्तहिम्मत न हो कर बैठो अभी से
और भी सख़्त है आगे रात यारो

साथ बरसातियाँ भी ले लो, ख़बर है
हो रही है वहाँ तो बरसात यारो

चोट मुझ को लगे, होता था तुम्हें दुख
क्या हुए आज वो अहसासात यारो

चाल है हर ‘यक़ीन’ उन की शातिराना
फिर हमीं पर न हो जाये मात यारो


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