Tuesday, June 10, 2008

पितृशोक,..... हिन्दी चिट्ठाकार श्री राज भाटिया वापस जर्मनी पहुँचे

दो हिन्दी चिट्ठों पराया देश और मुझे शिकायत है के चिट्ठाकार श्री राज भाटिया 29 मई की सुबह भारत से पुनः बेयर्न, जर्मनी अपने वर्तमान आवास पर पहुँच गए हैं। उन की दिली तमन्ना थी कि वे जब भी भारत आएँ जितना संभव हो सके अधिक से अधिक हिन्दी चिट्ठाकारों से मिलें। लेकिन यह नहीं हो सका।

Raj Bhatiya's profile दिनांक 15 मई को राज जी के पिता का स्वर्गवास हो जाने के कारण अनायास और तुरंत ही भारत आना पड़ा। वे 16 मई को सुबह ही भारत पहुँच गए थे। 

राज जी  कुल तेरह दिनों तक भारत में अपनी माँ और अन्य परिजनों के साथ रहे। इस बीच वे नैट की दुनियाँ से दूर रहे। कल ही चैट सूची में उन की बत्ती हरी दिखाई देने पर उन से सम्पर्क हुआ। वे अपने पिता के निधन पर बहुत दुखी थे।  वे उन से जीवित अवस्था में ही मिलना चाहते थे, लेकिन उन की यह इच्छा पूर्ण नहीं हो सकी।

मैं ने उन्हें अपने ब्लाग पर कुछ लिखने को कहा लेकिन वे अभी मन  नहीं बना सके हैं। कहने लगे। 14 जून को उन के पिता का पहला मासिक श्राद्ध है। उस दिन घर में पूजा है। उसी दिन जर्मनी में उन के परिचित आदि, सब लोग पूजा पर उन के घर आएँगे। उसी के बाद वे अपने ब्लॉग पर आने का मन बना सकेंगे।

अपने पिता से उन की जीवित अवस्था में भेंट न कर पाने का दुखः क्या होता है? यह मैं समझ सकता हूँ।

मैं उन के पिता श्री को अपनी ओर से तथा समस्त हिन्दी चिट्ठाकार परिवार की और से श्रद्धाँजली अर्पित करता हूँ और कामना करता हूँ कि उन्हें और उन के परिजनों विशेष रूप से उन की माताजी को इस दुखः से बाहर आने की शक्ति प्राप्त हो। सभी हिन्दी चिट्ठाकार इस दुखः की घड़ी में राज जी के साथ हैं।

राज जी को उन के ई-मेल पते rajbhatia007@googlemail.com  

पर संदेश प्रेषित किए जा सकते हैं।

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