Saturday, May 10, 2008

प्रोफेशनलिज्म क्या है?

मैं ने, अपनी 28 अप्रेल 2008 की पोस्ट में सवाल किया था कि "क्या चिट्ठाकारों को प्रोफेशनल नहीं होना चाहिए?" इस पोस्ट पर आई 12 टिप्पणियों में से 10 की राय थी कि चिट्ठाकार को प्रोफेशनल होना चाहिए। एक साथी जवाब का इन्तजार के इन्तजार में थे। एक राय यह भी थी कि बेतरतीबी से लगने वाले विज्ञापन चिट्ठों को विज्ञापनों के होर्डिंगों से पाट दिए जाने से असुन्दर हुए नगरों की भांति असुन्दर बना रहे हैं। जिन्हों ने चिट्ठाकार को प्रोफेशनल होने की राय दी थी मुझे लगा कि उन्हों ने भी 'प्रोफेशनलिज्म' को भिन्न भिन्न तरीके से समझा है।
प्रोफेशनलिज्म पर दुनियाँ भर के विद्वानों ने अपने अध्ययन और शोध के आधार पर कुछ मानदण्ड स्थापित करने का यत्न किया है और कुछ सर्वमान्य बिन्दुओं को तलाशा गया है। ग्लासगो विश्वविद्यालय के नैतिक दर्शन में प्रोफेसर रॉबिन डॉनी ने प्रोफेशनलिज्म पर विस्तार से आवश्यक प्रकृति के मौजूदा प्रोफेशनों का अध्ययन कर एक प्रोफेशनल की जरूरी विशेषताओं को छह बिन्दुओं में समेटने का प्रयत्न किया है। उन के द्वारा परिभाषित विशेषताओं का सार संक्षेप इस प्रकार हैं-
  1. प्रोफेशनल को व्यापक ज्ञान पर आधारित दक्षता से सम्पन्न और अपने प्रोफेशन के विषय के कार्यों का विशेषज्ञ होना चाहिए।

  2. प्रत्येक प्रोफेशनल द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं का आधार उस के उपभोक्ताओं से उस का विशेष संबंध है, जिस में जन-कल्याण का संतुलित व अखंडित दृष्टिकोण सन्निहित हो, और जिस में निष्पक्षता व ईमानदारी के साथ-साथ उस की प्रोफेशनल संस्था और आम जनता द्वारा अपेक्षित अधिकार और कर्तव्य सम्मिलित हों।

  3. प्रोफेशनल के कामों का परिणाम हो कि जन कल्याण की नीतियों और न्याय जैसे सामाजिक मामलों पर राय रखने की उस की अधिकारिता को उस के विशिष्ठ सेवार्थियों के साथ-साथ आम जनता भी मान्यता देने लगे।

  4. अपने प्रोफेशनल दायित्वों को निभाते हुए प्रोफेशनल सरकार और वाणिज्य के प्रभाव से पूरी तरह मुक्त रहे।

  5. प्रोफेशनल प्रशिक्षित नहीं अपितु शिक्षित हो, जिस का अर्थ है एक व्यापक और विस्तृत परिप्रेक्ष्य में स्वयं को और अपनी दक्षता को देखने की क्षमता, और मानवीय मूल्यों की सीमा में अपने ज्ञान और कौशल को विकसित करते हुए अपनी इस क्षमता को लगातार निखारना।

  6. एक प्रोफेशनल का अपने काम पर सक्षम अधिकार हो। आम जनता की दृष्टि में विश्वसनीय प्रोफेशनल्स का अपना संगठन हो जो अपने सदस्यों के ज्ञानाधार को विकसित करते रहने और सदस्यों के शिक्षण के लिए सक्रिय रहे और प्रोफेशनल उस के स्वतंत्र और अनुशासित सदस्य के रूप में प्रतिष्ठित हो। इन मानदण्ड़ों पर खरा प्रोफेशनल नैतिकता के उच्च मूल्यों से संम्पन्न होगा और निश्चय ही समाज उसे सम्मान के साथ सुनेगा।

उक्त विशेषताओं को आप चिट्टाकारों की पंचायत के सामने रखते हुए पुनः उसी प्रश्न को दोहरा रहा हूँ, "क्या चिट्ठाकारों को प्रोफेशनल नहीं होना चाहिए?"
........(जारी)
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