
बाघ एक पखवाडे में तीसरी बार आबादी क्षेत्र में घुस आया था। बाघ के पार्क से बाहर आने का मुख्य कारण सरसों के खेत हैं। इन दिनों खेतों में उगी सरसों में नील गाय व जंगली सुअर रहते हैं और बाघ को यहाँ शिकार करने में आसानी रहती है।
खबर कतई चौंकाने वाली है। सुबह ज्ञान दत्त जी अपने आलेख मे इंसानों की बढ़ रही आबादी के थम जाने की सुखद कल्पना कर रहे थे। मैं उस के विश्वसनीय होने की कामना कर रहा हूँ। पर यह मनुष्य के सायास प्रयासों के बिना हो सकेगा ऐसा नहीं लगता है।

हकीकत यह है कि बाघ तो अपने ही साम्राज्य में है। इंसान उस के साम्राज्य में कब का घुसा बैठा है।