अनवरत

क्या बतलाएँ दुनिया वालो! क्या-क्या देखा है हमने ...!

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गुरुवार, 26 मार्च 2009

जनतन्तर-कथा (1) : हरारत होने लगी

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हे, पाठक! यूँ तो जब भी आप-हम मिलते हैं, तो कोई न कोई बात होती है।  कुछ मैं  कहता हूँ, कुछ आप टिपियाते हैं।  पर इन दिनों मौसम का मिजाज कुछ ...
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दिनेशराय द्विवेदी
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