अनवरत
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शनिवार, 26 फ़रवरी 2011
हर कोई अपनी सुरक्षा तलाशता है, ... साहित्य भी
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म नुष्य ही है जो आज अपने लिए खाद्य का संग्रह करता है। लेकिन यह निश्चित है कि आरंभ में वह ऐसा नहीं रहा होगा। उस के पास न तो जानकारी थी कि खाद...
19 टिप्पणियां:
शुक्रवार, 25 फ़रवरी 2011
महेन्द्र नेह का काव्य संग्रह 'थिरक उठी धरती' अंतर्जाल पर उपलब्ध
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म हेन्द्र 'नेह' मूलतः कवि हैं, लेकिन वे कोटा और राजस्थान की साहित्यिक, सामाजिक, सांस्कृतिक गतिविधियों के केन्द्र भी हैं। वे देश के ए...
4 टिप्पणियां:
सोमवार, 21 फ़रवरी 2011
"बेहतर कैसे लिखा जाए?"
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क ल मैं ने कहा कि साहित्य पुस्तकों में सीमित नहीं रह सकता, उसे इंटरनेट पर आना होगा । वास्तविकता यह है कि जब से मनुष्य ने लिपि का आविष्क...
25 टिप्पणियां:
रविवार, 20 फ़रवरी 2011
साहित्य पुस्तकों में सीमित नहीं रह सकता, उसे इंटरनेट पर आना होगा
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म नुष्य का इस धरती पर पदार्पण हुए कोई अधिक से अधिक चार लाख और कम से कम ढाई लाख वर्ष बीते हैं। हम कल्पना कर सकते हैं कि आरंभ में वह अन्य प्रा...
29 टिप्पणियां:
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