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शुक्रवार, 20 मार्च 2026

पहचान की वापसी

देहरी के पार कड़ी : 2
तलवंडी कोटा के ‘ए’ सेक्टर की मोहन विला में अभी भी मातम और गुस्से का मिला-जुला माहौल था. गृहस्वामी ब्रज मोहन गुप्ता जवाहर नगर थाना में रिपोर्ट कराने गए थे, किन्तु उनकी सॉफ्टवेयर इंजीनियर बेटी प्रिया के बालिग होने के कारण पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने से इन्कार कर दिया. बोले लड़की खुद कहीं भी जा सकती है. हाँ हम 24 घंटे बाद गुमशुदा रिपोर्ट दर्ज कर सकते है, यह नियम की बात है. वे घर लौट आए. अगले दिन सुबह फिर थाने गए तो उन्हें पता लगा कि प्रिया खुद एक वकील के साथ आकर बयान दे चुकी है कि, “उसने खुद अपनी मर्ज़ी से घर छोड़ा है. वह अपनी इच्छा के विरुद्ध विवाह नहीं करना चाहती, उसका कोई अफेयर नहीं है.” गुप्ताजी मायूस हो कर फिर लौट आए. यह पहली बार था जब उनकी किसी शिकायत पर पुलिस ने काम करने से इन्कार कर दिया हो. वे अनेक वर्ष से स्माल स्केल इंडस्ट्री ऑनर्स एसोसिएशन के सचिव थे, शहर के एसपी और रेंज के आईजी तक उनका सम्मान करते थे. लेकिन इस मामले में कोई उनके लिए सहायक सिद्ध न हो सका. उन्होंने प्रिया के कमरे को ताला लगा दिया, जैसे स्मृतियों को कैद करने से लज्जा मिट जाएगी.

लेकिन शुक्रवार की दोपहर जयपुर से प्रिया की कंपनी के किसी प्रतिनिधि, आकाश का फोन आया कि “प्रिया से संपर्क नहीं हो रहा है. तो पिता के पास उसे टालने का कोई बहाना नहीं था. कंपनी के लिए वह 'उद्योगपति की बेटी' नहीं, बस एक महत्वपूर्ण कर्मचारी थी जिससे संपर्क नहीं हो पा रहा था. “उसकी सहेली बीमार होने के कारण उसे अचानक इन्दौर जाना पड़ा, कंपनी का लैपटॉप तक ले कर नहीं गयी.” गुप्ताजी ने यही जवाब दिया. आकाश ने बताया कि “प्रिया की टीम जिस प्रोजेक्ट पर काम कर रही थी, वह उसकी वजह से अटक गया है, उसके लैपटॉप की तुरन्त जरूरत है, वह कल लेने कोटा आ रहा है.”

शनिवार की दोपहर, जब आकाश कोटा पहुँचा, तो उसे अंदाज़ा नहीं था कि वह एक सामाजिक रणभूमि में कदम रख रहा है. प्रिया के पिता ने भारी मन से उसे लैपटॉप सौंपा, यह कहते हुए कि "सहेली की बीमारी के कारण उसे अचानक जाना पड़ा. फिर भी फोन पर संपर्क तो करना चाहिए था. उनका भी उससे फोन संपर्क नहीं हो पा रहा है. अब तो उन्हें भी चिन्ता होने लगी है."

लेकिन आकाश, प्रिया की टीम का हिस्सा था, उसे पता था कि प्रिया के ड्यूटी न करने से प्रोजेक्ट को अधिक फर्क नहीं पड़ा था. उसकी मैनेजर ने बस इतनी हिदायत दी थी कि प्रिया ने घर में विवाद के कारण घर छोड़ दिया है और कोटा में ही किसी सहेली के यहाँ है. उसे उसके पिता के यहाँ से लैपटॉप लाकर प्रिया को सौंपना है.

प्रिया ने अपनी मैनेजर को फोन पर पूरी स्थिति स्पष्ट कर दी थी कि उसका विवाह उसकी मर्जी के बिना किया जा रहा था, जिसके कारण उसे घर छोड़ना पड़ा. मैनेजर ने संवेदनशीलता दिखाते हुए आकाश को केवल 'लैपटॉप कलेक्ट' करने के बहाने भेजा था, ताकि कंपनी से आवंटित लैपटॉप प्रिया को मिल जाए और वह काम शुरू कर सके.

ऋचा के फ्लैट पर माहौल कम गरम नहीं था. अमित, समीर और नेहा वहाँ पहले से मौजूद थे. सभी का विचार था कि परिवार से विवाद चलते प्रिया का कोटा में रहकर शांतिपूर्वक काम करना संभव नहीं होगा. या तो वह अपना ‘वर्क फ्रॉम होम’ समाप्त करके मुम्बई अपनी ड्यूटी जॉइन कर ले या फिर जयपुर या उदयपुर में किसी वर्किंग वूमन होस्टल में या कहीं पेइंग गेस्ट स्पेस में रह कर काम करे. एक-दो माह का समय मिल जाएगा. तब माहौल देख कर आगे के निर्णय ले. जब आकाश वहां लैपटॉप लेकर पहुँचा और प्रिया की निगाह अपने लैपटॉप पर पड़ी, तो उसकी आँखें चमक उठीं. कंपनी का लैपटॉप इस समय केवल एक मशीन नहीं था, उसकी 'आज़ादी का औज़ार' था.

समीर कह रहा था, "कोटा अब तुम्हारे लिए सुरक्षित नहीं है प्रिया. यहाँ हर मोड़ पर कोई न कोई तुम्हें पहचानता है. पुलिस और तुम्हारे पापा के रसूख वाले दोस्त तुम्हें चैन से जीने नहीं देंगे."

नेहा ने ठोस दलील दी, "जयपुर बड़ा शहर है. बढ़िया तो यह है कि कोटा से काम करने के बजाय, तुम जयपुर चली जाओ. इससे तुम्हें सुरक्षा भी मिलेगी और एक नया सामाजिक दायरा भी."

आकाश ने भी साथ दिया, "हाँ प्रिया, कंपनी तुम्हारी स्थिति समझती है. मेरे घर के पास ही वर्किंग वुमन हॉस्टल या पेइंग गेस्ट स्पेस मिल जाएगी. मैं अपनी कार लेकर आया हूँ. तुम चाहो तो मेरे साथ चल सकती हो. मैं वहाँ अपने घर से नजदीक ही किसी होटल में कमरा बुक करवा देता हूँ."

खिड़की से हवा के एक झोंके ने अंदर प्रवेश किया. कोटा की यह हवा जो कभी उसे अपनी लगती थीं, अब उसे अजनबी लग रही थी. उसने तय किया कि वह आज ही आकाश के साथ प्रस्थान करेगी. कल से वह जयपुर शहर में काम करने वाली एक प्रोफेशनल होगी.
क्रमशः

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