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सोमवार, 27 अप्रैल 2026

सर्जिकल स्ट्राइक

देहरी के पार, कड़ी - 36
ईसीआई फैक्ट्री के मजदूरों ने तय किया था कि मंगलवार, 30 अप्रैल, 2019 को दूसरी शिफ्ट वाले साढ़े दस बजे तक एएसएल ऑफिस पहुँच जाएंगे और शिफ्ट समय से आधे घंटे पहले वहाँ से रवाना होकर सीधे फैक्ट्री पहुँचेंगे और पहली शिफ्ट वाले फैक्ट्री से छूट कर सीधे एएसएल ऑफिस पहुँचेंगे. कुछ मजदूरों ने आज फैक्ट्री से अवकाश ले लिया था. वे एएसएल के यहाँ होने वाली आज की पूरी कार्यवाही देखना चाहते थे. सुबह ग्यारह बजे एएसएल (ASL) के इजलास में तिल रखने की जगह नहीं थी. प्रिया ने भी आज अपने ऑफिस से छुट्टी ले ली थी.

कार्यवाही शुरू होते ही प्रबंधन के वकील मनोज भट्ट ने एक प्रार्थना पत्र पेश किया. "हुज़ूर, यूनियन ने अपनी साक्ष्य में कल ही दो गवाहों के शपथ-पत्र पेश किए हैं उनके साथ कुछ दस्तावेज भी पेश किए हैं. हमें ये कल शाम साढ़े चार बजे मिले. उनके तकनीकी पहलुओं को समझने के लिए हमें समय चाहिए. जो दस्तावेज इंटरनेट से डाउनलोड करके पेश किए गए हैं, उनकी साक्ष्य में ग्राह्यता का भी प्रश्न है. इस कारण हम चाहते हैं कि कृपया सुनवाई अगले शुक्रवार तक स्थगित (Adjourn) कर दी जाए."

वकील रमेश चव्हाण, जो आज अपनी कोर्ट यूनिफॉर्म में बहुत प्रभावशाली लग रहे थे, तुरंत अपनी जगह से उठे. "सर, यह 'तकनीकी पहलू' केवल बहाना हैं. वे हमारे लिए अचंभा हो सकते थे लेकिन प्रबंधन के लिए इन्हें परखना और जाँचना मिनटों का काम है. यह शुद्ध रूप से डिले टेक्टिक्स (Delay Tactics) है. प्रबंधन का एकमात्र लक्ष्य 60 दिन की समय-सीमा को पार करना है ताकि 'डीम्ड परमिशन' का लाभ ले सकें. आज यूनियन के गवाह मौजूद हैं, इन्हें हर हालत में उनसे जिरह करनी चाहिए."

एएसएल ने घड़ी देखी और भट्ट की ओर सख्त नज़रों से देखा. "मिस्टर भट्ट, मैंने पहले ही कहा था कि यह टाइम-बाउंड मामला है. मैं सुनवाई नहीं टालूँगा. मैं जिरह के लिए दोपहर ढाई बजे तक का समय देता हूँ. यदि उस समय तक आप तैयार नहीं हुए, तो मैं जिरह का अवसर समाप्त मानकर कार्यवाही पूरी करूँगा."

दोपहर ढाई बजे तक के लिए कार्यवाही स्थगित होने की सूचना श्रमिकों को दे दी गई. जिससे दूसरी शिफ्ट वाले श्रमिक अपने काम पर चले जाएँ. कुछ ही देर में वहाँ मजदूरों की संख्या दस-बारह मात्र रह गई. लेकिन पहली शिफ्ट वाले लगभग सभी मजदूर ढाई बजे तक एएसएल के ऑफिस पहुँच गये थे और उनकी संख्या सुबह से अधिक थी.

ठीक ढाई बजे एएसएल इजलास में आ बैठे. पाँच मिनट बाद ही जिरह शुरू हो गई. प्रशांत बाबू कठघरे में थे. वकील भट्ट ने उन्हें उलझाने की कोशिश की. "क्या यह सच नहीं है कि मार्केट में मंदी के कारण आपके द्वारा बनाई गई आई.सी. (IC) का कोई खरीदार नहीं है और स्टॉक डंप पड़ा है?"

प्रशांत बाबू ने शांति से उत्तर दिया. "जी नहीं, यह कहना गलत है. सच तो यह है कि ईएसआई फैक्ट्री डिफेंस आर्म्स इंडस्ट्री के लिए 'क्रिटिकल कंपोनेंट्स' बनाती है. इन आई.सी. की मांग कभी कम नहीं होती क्योंकि यह देश की सुरक्षा से जुड़ा मामला है."

वकील भट्ट हक्के-बक्के रह गए. "यह आप कैसे कह सकते हैं? आपके पास क्या सबूत है?"

चव्हाण साहब ने तुरंत प्रिया द्वारा तैयार किया गया वह 'कलर प्रिंटआउट' एएसएल की मेज पर रखा. "यह देखिए, सर, कंपनी का अपना प्रोफाइल और उनके पिछले सप्लाई ऑर्डर्स का डेटा. यह फैक्ट्री केवल निजी मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा के लिए ज़रूरी कल-पुर्जे बनाती है. इसका बंद होना 'जनहित' (Public Interest) के विरुद्ध है."

इजलास में सन्नाटा पसर गया. हर कोई समझ रहा था कि डिफेंस सप्लाई वाला तर्क एकदम सर्जिकल स्ट्राइक जैसा था. एएसएल ने उस दस्तावेज को बड़ी गंभीरता से पढ़ा. डिफेंस सप्लाई वाला यह तथ्य प्रबंधन के 'घाटे' और 'मंदी' वाले हर तर्क को काट चुका था.

प्रशांत बाबू के बाद यूनियन के सचिव शिंदे कठघरे में आए. उन्होंने अपने शपथ पत्र में बताया था कि बारह वर्ष पहले यूनियन के महंगाई के अनुसार वेतन बढ़ाने की मांग करने पर ‘ट्रक सिस्टम’ आरंभ हुआ था और कैसे वह समय के साथ अमानवीय होता गया था. उन्होंने समाप्त करने और फेयर वेजेज की मांग करने वाला मांग पत्र, हड़ताल का नोटिस, प्रबंधन द्वारा वार्ता से इन्कार करने संबंधी दस्तावेजों को प्रदर्शित किया और प्रबंधन के अड़ियल रवैये संबंधी तथ्य सामने रखे. प्रबंधन वकील भट्ट ने उनसे लंबी जिरह की जो शाम साढ़े पाँच बजे तक चलती रही. शिंदे से हुई जिरह के अंत में एएसएल ने अपनी फाइल पर दोनों पक्षों की साक्ष्य पूर्ण होने की नोटिंग की और आदेश सुनाया कि दोनों पक्ष इस मामले के कानूनी पक्ष पर जो कुछ कहना चाहते हैं उसका लिखित प्रतिवेदन दो मई दोपहर एक बजे तक प्रस्तुत कर दें. उसके उपरान्त यह एक सदस्यीय कमीशन अपनी जांच रिपोर्ट (Inquiry Report) और अनुशंसा तैयार करके सरकार के अंतिम निर्णय के लिए मंत्रालय को भेज देगा."

इस पर मजदूरों की ओर से वकील चव्हाण ने आपत्ति की, “नहीं सर, यह प्रक्रिया ठीक नहीं है. उद्योग बंद करने की अनुमति का आवेदन प्रबंधन का है. वह अपने लिखित प्रतिवेदन की प्रतिलिपि कल शाम 5 बजे तक मेरे कार्यालय पहुँचा दे. जिससे उनके तर्कों और कानूनी पक्ष पर मजदूर पक्ष भी अपनी राय दे सके. हम अगले दिन दो मई को दोपहर एक बजे तक अपने तर्क आपके कार्यालय में प्रस्तुत कर दें.”

एएसएल ने प्रबंधन वकील की ओर देखा, “मिस्टर भट्ट, आपकी क्या राय है?”

“सर, चव्हाण साहब की बात सही है, हमारे लिखित प्रतिवेदन के बाद उन्हें जवाबी लिखित प्रतिवेदन देना चाहिए. लेकिन जवाबी लिखित प्रतिवेदन के नए तथ्यों पर हमें पुनः जवाब का अवसर मिलना चाहिए. और सर, कल शाम तक अपना लिखित प्रतिवेदन तैयार करने के लिए बहुत कम समय है. हम यह दो मई को सुबह प्रस्तुत कर सकते हैं. वैसे भी कल महाराष्ट्र दिवस और मजदूर दिवस दोनों हैं. तो दोनों ही पक्ष कल सुबह व्यस्त रहेंगे.”

एएसएल समझ गए कि प्रबंधन देरी करने की जुगत में है. उन्होंने रीडर को डायरी देखकर बताने को कहा कि दो मई को कोई विशेष अपॉइंटमेंट तो नहीं है? रीडर ने बताया कि दो मई को शाम चार बजे मंत्रालय में मीटिंग है.

“ठीक है, दोनों पक्ष दो मई को सुबह 11 बजे उपस्थित हों. मैं दोनों के तर्क सुनूंगा. और मिस्टर भट्ट, आपको चव्हाण साहब की बहस का जवाब देने का उसी वक्त मौका दिया जाएगा. और यदि आप दोनों को लिखित में कुछ देना हो तो बहस के पहले उसे प्रस्तुत कर सकते हैं. दो मई को शाम तीन बजे के पहले हर हालत में कार्यवाही समाप्त कर दी जाएगी.

इजलास से बाहर निकलते वक्त मजदूरों ने 'इंकलाब' के नारे नहीं लगाए, बल्कि एक-दूसरे का हाथ मजबूती से थामा. प्रिया चव्हाण साहब की ओर देखकर मुस्कुराई, लेकिन प्रशांत बाबू का दिमाग अभी भी सचिवालय की ओर अटका हुआ था. वे जानते थे कि दो मई की शाम एएसएल की मेज से फाइल हटने के बाद 'मंत्रालय वाला असली चक्रव्यूह' शुरू होगा.
... क्रमशः

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