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गुरुवार, 23 अप्रैल 2026

चक्रव्यूह में दरार

देहरी के पार, कड़ी - 32
ईसीआई फैक्ट्री के गेट से 100 मीटर परे पिकेटिंग के लिए लगाया गया शामियाना आखिर 44वें दिन हटा लिया गया. अगले दिन 23 अप्रैल को हड़ताल के दिनों का वेतन मजदूरों-कर्मचारियों के बैंक खातों में आने वाला था और 24 अप्रैल को उन्हें ड्यूटी पर उपस्थित होना था.

23 अप्रैल को ही क्लोजर की परमिशन के मुकदमे में एएसएल के यहाँ सुनवाई होनी थी. इतनी सारी घटनाओं के बाद इस सुनवाई में मजदूरों-कर्मचारियों की रुचि बढ़ गई थी. उनमें से हर कोई इस सुनवाई में हाजिर रहना चाहता था. सुबह साढ़े दस बजे ही एएसएल के दफ्तर के बाहर मजदूरों का हुजूम इकट्ठा हो गया. इतने लोगों के लिए न इजलास में जगह थी और न ही बाहर के गलियारों और दफ्तर के दालान में. धूप बहुत तेज थी और बाहर सड़क किनारे छाँह का कोई नामोनिशान नहीं. पौने ग्यारह बजे जब यूनियन के अध्यक्ष-सचिव, प्रशांत बाबू के साथ वहाँ पहुँचे तो इस विकट स्थिति को देखते हुए तुरन्त एएसएल से संपर्क किया और उनकी अनुमति लेकर दफ्तर के बाहर दिन भर के लिए शामियाना लगाने और पीने के पानी की व्यवस्था करवाई.

इसी वजह से आज एएसएल (Assistant Secretary Labour) के यहाँ कार्रवाई शुरू होने में एक घंटे की देरी हुई. हड़ताल खत्म हो जाने और फेयर वेजेज का मामला अब औद्योगिक न्यायाधिकरण के पास चले जाने से प्रबंधन दबाव मुक्त था. उनकी टीम के चेहरों पर एक कुटिल 'विजेता' वाली मुस्कान थी. वकील मनोज भट्ट आज बहुत आत्मविश्वास में दिखाई दे रहे थे.

एएसएल ने ठीक 12 बजे इजलास में प्रवेश किया. प्रबंधन के वकील मनोज भट्ट ने खड़े होकर बोलना आरंभ किया, "हुज़ूर, जैसा कि आप जानते हैं, सरकार ने हड़ताल और तालाबंदी पर पाबंदी लगा दी है. हमारे क्लाइंट ने बड़ा दिल दिखाते हुए मजदूरों को हड़ताल अवधि का 'एडवांस वेतन' देना भी स्वीकार कर लिया है. दोपहर तक सभी मजदूरों-कर्मचारियों के खातों में यह राशि पहुँच जाएगी. अब जबकि फेयर वेजेज का विवाद ट्रिबुनल को रेफर हो चुका है और औद्योगिक शांति बहाल हो रही है, तो इस क्लोजर परमिशन को भी 'मानवीय आधार' पर देखा जाना चाहिए. हम फैक्ट्री चलाना चाहते हैं, लेकिन हमारे पास संसाधन नहीं हैं."

एएसएल ने अपनी फाइल पलटते हुए स्वर में पूछा, "मिस्टर भट्ट, संसाधन से आपका क्या तात्पर्य है? जरा समझाइए.”

“सर, मेरा कहना था कि पिछली आर्थिक हानियों के कारण कंपनी के एसेट्स के मुकाबले लाएबिलिटीज बहुत अधिक हैं. बैंकों के कर्जे ओवरड्यू हो चुके हैं. यह बकाया हमें तुरंत चुकाना है. जिसके कारण कुछ महीनों बाद कंपनी की स्थिति अपने एम्पलॉइज को वेतन चुकाने तक की नहीं रहेगी. हम चाहते हैं उसके पहले ही हमें उद्योग बंद कर देने की अनुमति दी जाए. जिससे हम अपने एम्पलॉइज को कानूनी रूप से देय राशियाँ दे सकें और वे अन्यत्र रोजगार तलाश सकें. यदि क्लोजर की अनुमति नहीं दी गयी तो फाइनेंशियल इन्स्टीट्यूशन हमें लिक्विडेशन में जाने को बाध्य कर देंगे.”

“वकील साहब, आप जो कुछ कह रहे हैं उसे आपको साक्ष्य से साबित करना होगा. केवल कहने से काम नहीं चलेगा. फिलहाल आप ये बताइए कि पिछली सुनवाई में आपसे कुछ विशिष्ट विसंगतियों पर स्पष्टीकरण मांगा गया था. क्या वे तैयार हैं?"

वकील रमेश चव्हाण तुरंत अपनी जगह से खड़े हुए. "सर! प्रबंधन 'मानवीय आधार' का मुखौटा पहनकर अदालत को गुमराह करना चाहता है. एडवांस वेतन देना उनकी महानता नहीं, बल्कि धारा 25-यू के आपराधिक मुकदमे से बचने की विवशता है. और जहाँ तक विसंगतियों की बात है..."

चव्हाण साहब ने प्रिया की ओर इशारा किया. प्रिया ने तुरंत तीन नई फाइलें एएसएल के रीडर को सौंपीं.

"हुज़ूर, प्रबंधन ने सोमवार को जो दस्तावेज इस अदालत में प्रस्तुत किए हैं, वे 'साइफनिंग' के आरोपों को झुठलाने के बजाय उन्हें पुख्ता करते हैं. इन्होंने मार्च के स्टॉक रजिस्टर में जो 5,000 वेफर्स गायब दिखाए थे, उन्हें अब 'प्रोसेस लॉस' (प्रक्रियात्मक हानि) बताया गया है. लेकिन हुज़ूर, इलेक्ट्रॉनिक सर्किट निर्माण में 80% का प्रोसेस लॉस असंभव है! यह नहीं हो सकता कि आप मनमाने लॉस बता दें. लॉसेस की भी कोई सीमा है, कारखाने और गोदाम में आग तो लगी नहीं थी. यह साफ़ तौर पर हेराफेरी है."

प्रिया ने अपनी डायरी से एक और बिंदु वकील साहब को धीरे से बताया. चव्हाण साहब मुस्कुराए और बोले, "एक और बात हुज़ूर. प्रबंधन ने दावा किया है कि उनके पास वर्किंग कैपिटल नहीं है. लेकिन कल ही इन्होंने 350 मजदूरों को एडवांस वेतन देने के लिए करीब 50 लाख रुपये का प्रावधान किया है. यदि पैसा नहीं था, तो यह अचानक कहाँ से आया? क्या यह वही पैसा नहीं है जिसे 'शेल कंपनियों' में डाइवर्ट किया गया था और अब जब फँसने का मौका आया तो उसे वापस लाया जा रहा है?"

एएसएल ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, "मैनेजमेंट का यह तर्क कि 'सब सामान्य हो रहा है', क्लोजर के आवेदन को वैध नहीं बनाता. यदि उत्पादन की क्षमता और कच्चा माल मौजूद था, तो क्लोजर का आवेदन 'दुर्भावनापूर्ण' (Mala fide) माना जाएगा. मिस्टर भट्ट आज आपके जीएम दिखाई नहीं दे रहे हैं. आज उनसे शेष जिरह होनी थी. क्या उनके सिवा आपके अन्य गवाह आज हाजिर हैं?”

“हुजूर, प्रबंधन का कल का पूरा दिन सेक्रेटेरिएट में बीता. शाम चार बजे बाद सरकार ने नोटिफिकेशन जारी किया. उस आदेश की पालना आज ही करनी है. जीएम साहब आज उसी व्यवस्था में लगे हैं. दूसरे दोनों गवाह भी मजदूरों के हड़ताल अवधि का वेतन बनाने और उसे उनके खातों तक पहुँचाने में व्यस्त हैं. इस कारण प्रबंधन आज अपनी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकेगा. हम अगली पेशी पर सभी गवाहों को हाजिर रखेंगे. हम चाहते हैं इस मामले का निर्णय हर हालत में 14 मई के पहले हो जाए.” वकील भट्ट ने अपनी सफाई पेश की.

“देखिए मैं आपको साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए अंतिम अवसर दे रहा हूँ. आप को 26 अप्रैल को सुबह 11 बजे के पहले अपने सभी गवाह हाजिर रखने हैं, वरना उस दिन आपकी साक्ष्य समाप्त कर यूनियन की साक्ष्य आरंभ कर दूंगा. मिस्टर चव्हाण आप उस दिन आप अपने गवाह और उनके शपथ पत्र तैयार रखिए.”

“जी, हम तैयार रहेंगे.” वकील चव्हाण ने कहा.

इजलास से बाहर निकलते समय प्रिया ने देखा कि मनोज भट्ट और एजीएम के बीच तीखी बहस हो रही थी. प्रशांत बाबू ने प्रिया के कंधे पर हाथ रखा, "प्रिया, तुमने सही पकड़ा था. एडवांस वेतन का दांव उन्हीं पर उल्टा पड़ गया. अब उनके पास छिपाने के लिए जगह नहीं बची है."

प्रिया ने आसमान की ओर देखा. 'चक्रव्यूह' अभी टूटा नहीं था, लेकिन उसकी दीवार में पहली दरार साफ़ दिखाई दे रही थी.
... क्रमशः

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