अनवरत
क्या बतलाएँ दुनिया वालो! क्या-क्या देखा है हमने ...!
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शनिवार, 10 जनवरी 2026
चिनगारी
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लघुकथा : दिनेशराय द्विवेदी आयुष के बोर्डिंग स्कूल चले जाने के बाद शगुन को कई नए काम मिल गए. पहले आयुष बाहर के छोटे-मोटे काम कर देता था. अ...
4 टिप्पणियां:
शुक्रवार, 9 जनवरी 2026
बोर्डिंग या जेल
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लघुकथा : दिनेशराय द्विवेदी जब आयुष प्राथमिक विद्यालय की अंतिम कक्षा में था तभी अनिल चाचा उसे नवोदय विद्यालय में प्रवेश की तैयारी करा रहे थे....
गुरुवार, 8 जनवरी 2026
बीज
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लघुकथा : दिनेशराय द्विवेदी शगुन चार बरस की होने को थी. दीवाली के पहले पापा कपड़े खरीद कर लाए. उसके लिए एक खूबसूरत गुलाबी चमकदार फ्रॉक थी ...
मंगलवार, 6 जनवरी 2026
बेटा
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लघुकथा : दिनेशराय द्विवेदी आठ साल का आयुष अपनी बहन शगुन की पीठ पर सवार होकर घोड़ा-घोड़ा खेल रहा था. शगुन दस साल की थी, पर आयुष के मुकाबल...
सोमवार, 5 जनवरी 2026
अपनी ही ज़मीन
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लघुकथा : दिनेशराय द्विवेदी जब दुर्घटना ने पति को निगल लिया, तो नियति का 'नाम' भी अँधेरे में खो गया. अब वह 'विधवा' थी. उसे...
रविवार, 4 जनवरी 2026
नई जनता बना लेंगे
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लघुकथा : दिनेशराय द्विवेदी कंप्यूटर मॉनिटर स्क्रीन पर नीली रोशनी फैली हुई थी. रिकार्डो की उंगलियाँ कीबोर्ड पर एक लयबद्ध ताल बजा रही थीं. उ...
5 टिप्पणियां:
शनिवार, 3 जनवरी 2026
रास्ता
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लघुकथा : दिनेशराय द्विवेदी अवनि उस रात के बाद कभी नहीं सो पायी. जिस रात डीजल पम्प की चौंधियाती रोशनी में उसकी बहन तारा को विक्रम सिंह के...
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