अनवरत
क्या बतलाएँ दुनिया वालो! क्या-क्या देखा है हमने ...!
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बुधवार, 31 दिसंबर 2025
खाई
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"लघुकथा" : दिनेशराय द्विवेदी शहर में हुई ताज़ा बड़ी रैली के बाद, हवा का स्वाद बदल सा गया था. चाय की दुकान पर आवाज़ें ऊँची थीं, और ...
मंगलवार, 30 दिसंबर 2025
साँस
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लघुकथा दिनेशराय द्विवेदी मैंने साँस अन्दर खींची, जितनी हवा मैं अपने फेफड़ों में भर सकता था भर ली. जो फेफड़ों में भरी गयी थी, वह सिर्फ हवा न...
सोमवार, 29 दिसंबर 2025
एकता
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लघुकथा दिनेशराय द्विवेदी मदुरा नगर निगम के एयरकंडीशंड बैठक कक्ष की शीतलता और बाहर की चिपचिपी गर्मी के बीच, पंखे की आवाज़ के सिवा कोई आवाज़ न...
रविवार, 28 दिसंबर 2025
घिरनियाँ
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'लघुकथा' दिनेशराय द्विवेदी तीन साल की कोचिंग, दो बार ड्रॉप, और अंततः आईआईटी दिल्ली का ऐतिहासिक गेट. कौशिक के कदम भारी थे – न सिर्फ ...
शनिवार, 27 दिसंबर 2025
कच्ची ईंटें
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'लघुकथा' - दिनेशराय द्विवेदी सूरज के उगने से पहले ही रामलाल के हाथ चिपचिपी मिट्टी में डूबे थे. हर ईंट को साँचे में ढालते हुए उसकी उ...
शुक्रवार, 26 दिसंबर 2025
बेनकाब उजाले
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लघुकथा दिनेशराय द्विवेदी महानगर की उमस भरी नसों में आज एक अजीब सी बेचैनी थी। एक तरफ कई सौ एकड़ में फैला वह महलनुमा आवास था, जो आज पूरी दुनिय...
गुरुवार, 25 दिसंबर 2025
उम्मीद
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'लघुकथा' दिनेशराय द्विवेदी मॉल रोशनियों से नहाया हुआ था. लाल-सुनहरी गेंदें और टिमटिमाते सितारे हर किसी को अपनी ओर खींच रहे थे. बाहर ...
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