Sunday, December 11, 2016

अब तो मैं यहीं निपट लिया

'लघुकथा'

        बस स्टैंड से बस रवाना हुई तब 55 सीटर बस में कुल 15 सवारियाँ थीं। रात हो चुकी थी। शहर से बाहर निकलने के पहले शहर के आखिरी कोने पर रोडवेज की एक बुकिंग विण्डो थी। वहाँ कुछ सैकण्ड्स के लिए बस रुकी बुकिंग विण्डो बन्द थी। कण्डक्टर कम ड्राइवर ने  सीट से उतर कर देखा। वहाँ से 2 सवारियाँ और चढ़ीं। कुल मिला कर बस में 17 सवारियाँ हो गयीं। अब बस में कैपेसिटी की लगभग 31% सवारियाँ थीं। ड्राइवर जो कण्डक्टर भी था वापस अपनी सीट पर आ बैठा। बस में बैठी एक सवारी ने खड़े हो कर ड्राइवर को आवाज लगाई और हाथ खड़ा कर के अपनी कनिष्ठिका दिखाई। ड्राइवर समझ गया कि उसे पेशाब करना है। तब तक ड्राइवर गियर लगा कर एक्सीलेटर दबा चुका था। उस ने ड्राइविंग सीट से ही चिल्ला कर कहा। बस थोड़ी देर में आगे बस रुकेगी तब कर लेना।

बस कोई आठ--8-10 किलोमीटर आगे आई तो फिर उसी सवारी ने खड़े हो कर पूछा -ड्राईवर साहब! बस कब रुकेगी?
- बस थोड़ी देर में रुकेगी।

5 किलोमीटर बाद फिर वह सवारी उठ खड़ी हुई उस ने फिर ड्राईवर से पूछा -ड्राईवर साहब! बस कितनी देर बाद रुकेगी?
ड्राईवर ने फिर अपनी सीट से चिल्ला कर कहा बस थोड़ी देर में रोकेंगे। 

बस जब 20वें किलोमीटर पर पहुँची तो फिर वह सवारी उठ खड़ी हुई और जोर से कहा -ड्राईवर साहब! कित्ती देर और लगेगी?
ड्राईवर साहब ने जोर से कहा -बस दो किलोमीटर और। 

22वें किलोमीटर पर कस्बे का बस स्टेैंड था। ड्राईवर ने बस रोकी और उतर कर बुकिंग विण्डो की और जाते हुए चिल्ला कर कहा जिस को पानी पेशाब करना हो कर ले। आगे बस कोटा जा कर रुकेगी। ड्राईवर बुकिंग विण्डो पर बस बुक कराने चला गया। वह सवारी अपनी सीट से नहीं उठी तो मुझे बहुत आश्चर्य हुआ। मैं ने पीछे मुड़ कर उसे कहा -तुम्हें पेशाब करना था, कर आओ। ड्राईवर कह कर गया है कि आगे न रोकेगा।

-अब तो मैं यहीं निपट लिया। बाराँ से बीयर की बोतल पी कर चला था। जोर की लगी थी, नहीं रुकी तो क्या करता। सवारियाँ जिन ने सुना वे सब हँस पड़े। एक ने कहा वहीं कह दिया होता तो हम ही ड्राइवर से बस रुकवा देते। कुछ सवारियाँ जो उस सवारी के ठीक अगली सीट पर बैठी थीं। उन्हों ने सीट बदल ली। कोटा आने पर सब सवारियाँ बस से उतर गईं। उस सवारी को नीन्द लग गयी थी उसे जगा कर उतारना पड़ा।
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