Wednesday, March 21, 2012

धूल भरे दिन का सूर्यास्त

ल सुबह से ही आसमान में धूल के कण दिखाई देने लगे थे। सूरज की चमक कम थी। लेकिन जैसे जैसे दिन चढ़ता गया धूल बढ़ती गई। सांझ तक सारा आकाश धूल से ढका था। सूर्यास्त का यह दृश्य मैं ने एक ही स्थान से देखा। आप के लिए भी कुछ चित्र हैं -
सूर्यास्त से पहले

सूर्य एक बिंदु


पंछी लौट चले घर को

संध्या के माथे की बन्दी

विदाई की बेला

अलविदा!


अब रोशनी थोड़ी देर और

रात्रि विश्राम की तैयारी

रात हुई, बत्तियाँ जल उठीं
चित्रों को बड़ा कर के देखा जा सकता है

9 comments:

परमजीत सिँह बाली said...

सभी बहुत बढिया चित्र हैं। धन्यवाद।

काजल कुमार Kajal Kumar said...

आपके कैमरे की आंखों से देखना अच्‍छा लगा. धन्‍यवाद.

Arvind Mishra said...

यह धुंध राजस्थान से ही उठी है ..कल दिल्ली और मुम्बई तक की दूरियां मापती दिखी

सतीश सक्सेना said...

बहुत सुंदर विषय चुना है आशा है आगे भी आपका कैमरा अनूठी तस्वीरें देता रहेगा !
शुभकामनायें भाई जी !

Shah Nawaz said...

वाह! बढ़िया चित्र हैं!!!

प्रवीण पाण्डेय said...

धूल में विकीर्णन न हो पाने से संध्या का लाल रंग खो जाता है।

विष्णु बैरागी said...

अरे वाह। सुन्‍दर। अति सुन्‍दर। यह तो 'चित्र कविता' है।

वन्दना said...

बहुत सुन्दर चित्र।

मनोज कुमार said...

अद्भुत छायांकन।

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