Monday, March 8, 2010

और एक हुसैन.........

 और एक हुसैन.........

  •  दिनेशराय द्विवेदी
एक हुसैन ठेला घसीटता है
और पहुँचाता है
सामान, जरुरत मंदों तक
एक हुसैन सुबह-सुबह 
म्युनिसिपैलिटी की गाड़ी आने के पहले
कचरे में से बीनता है
काम की चीजें
अपनी रोटी के जुगाड़ने को

एक हुसैन भिश्ती
दोपहर नालियाँ धोता है
कि बदबू न फैले शहर में

एक हुसैन सुबह अपनी बेटी को छोड़ कर आता है
स्कूल
दसवीं कक्षा के इम्तिहान के लिए 

एक हुसैन अंधेरे मुँह गाय दुहता है
और निकल पड़ता है
घरों को दूध पहुँचाने

एक और हुसैन ........
एक और हुसैन.........
और एक हुसैन.........
कितने हुसैन हैं?

लेकिन याद रहा सिर्फ एक
जिसने कुछ चित्र बनाए
लोगों ने उन्हें अपनी संस्कृति का अपमान समझा
उसे पत्थर मारे
और उसे यादगार बना दिया
ठीक मजनूँ की तरह।
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