मूल साँख्य के चौबीस तत्व
अर्थात् त्रिगुण प्रधान (आद्य प्रकृति) स्वतन्त्र रूप से जगत का कारण है।
त्रिगुण-प्रधान साँख्य में वर्णित प्रथम तत्व है। इस में त्रिगुण के साम्य के टूटने से सत्व-गुण की प्रधानता वाला महत् अर्थात् बुद्धि जो साँख्य का दूसरा तत्व है, उत्पन्न हुआ। बुद्धि प्रकृति से उत्पन्न होने से भौतिक है लेकिन उस का रूप मानसिक और बौद्धिक है। बुद्धि से रजस् प्रधानता वाले तीसरे तत्व अर्थात अहंकार की उत्पत्ति हुई। जो स्वः की अनुभूति को प्रकट करता है। साँख्य के अनुसार अहंकार से तत्वों के दो समूह उत्पन्न हुए। सात्विक अहंकार से ग्यारह तत्वों का प्रथम समूह जिस में एक मनस या मन, पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ और पाँच कर्मेन्द्रियाँ उत्पन्न हुईं। तामस अहंकार से पाँच तन्मात्राएँ अथवा सूक्ष्मभूत उत्पन्न हुए और इन पाँच तन्मात्राओं से पाँच महाभूतों की उत्पत्ति हुई।
इस तरह मूल साँख्य में 1. प्रधान या प्रकृति 2. महत् या बुद्धि 3.अहंकार 4. मनस या मन 5. से 9. पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ 10. से 14. पाँच कर्मेन्द्रियाँ 15 से 19 पाँच तन्मात्राएँ या सूक्ष्म भूत तथा 20 से 24 पाँच महाभूत, कुल 24 तत्व कहे गए हैं।
Read more...































