Tuesday, March 31, 2009

जमाना है परेशान, वाकई परेशान!

जमाना है परेशान!

जमाना है परेशान
वाकई परेशान!

आमादा भी है
उतर भी आता है
लड़ने पर
करता है प्रहार भी
हम पर

वह हो जाता है
और परेशान
देख कर अपने हाथ
लहूलुहान
और हमारे चेहरे की
नयी ताजी मुस्कान।

जमाना है परेशान।
वाकई परेशान!

यह कोई कविता नहीं है। यह एक प्रतिक्रिया है, जो मैं ने रविकुमार के ब्लाग की ताजा पोस्ट पर प्रकाशित कविता पर की है।  रविकुमार बेहतरीन कवि हैं।  जितने बेहतरीन कवि हैं उस से अधिक बेहतरीन वे चित्रकार हैं।  अनेक पत्रिकाएँ उन के रेखाचित्रों से अटी पड़ी हैं। अनेक पत्रिकाओं के मुख पृष्ठ उन के रेखाचित्रों से सजे हैं। उन्हों ने देश के नामी कवियों की सैंकड़ों कविताओं के साथ प्रासंगिक चित्रांकन कर उन्हें पोस्टरों में बदला है।  पेशे से वे इंजिनियर हैं,  पर प्रकृति से एक संपूर्ण कलाकार।
मैं चाहता हूँ आप उन के ब्लाग "सृजन और सरोकार" पर जाएँ और खुद देखें कि जो कुछ मैं ने उन के बारे में कहा है वह कितना सच है?

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